नशामुक्ति अभियान गुजरात से शुरू हो: संजय राउत का अमित शाह के पंजाब बयान पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने 22 अक्टूबर 2026 को मुंबई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब को 2029 तक नशामुक्त करने के बयान पर तीखा पलटवार किया। राउत ने कहा कि नशामुक्ति अभियान केवल पंजाब तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसकी शुरुआत गुजरात सहित पूरे देश से होनी चाहिए।
राउत का बड़ा आरोप: महाराष्ट्र में ड्रग्स फैक्ट्री
संजय राउत ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, 'महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम के घर के बगल में सातारा में ड्रग्स की फैक्ट्री चल रही थी और पुलिस को पता तक नहीं चला।' राउत के अनुसार, ड्रग्स सिंडिकेट का पूरा पैसा महाराष्ट्र की राजनीति में आता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नशे के खिलाफ अभियान केवल पंजाब चुनाव की पृष्ठभूमि में चलाया जा रहा है, तो यह राजनीतिक दिखावे से अधिक कुछ नहीं है। राउत का कहना है कि नशामुक्ति एक राष्ट्रीय मुद्दा है और इसे समान रूप से सभी राज्यों पर लागू होना चाहिए।
अमित शाह का पंजाब पर बयान
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब से अवैध मादक पदार्थों के कारोबार को पूरी तरह समाप्त करने के लिए 31 दिसंबर 2029 की समयसीमा तय की है। शाह ने कहा था कि 2029 तक पंजाब में नशे के व्यापार को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा। आलोचकों का कहना है कि यह घोषणा आने वाले पंजाब चुनावों को ध्यान में रखकर की गई है।
परकाला प्रभाकर के विरोध प्रदर्शन पर राउत की प्रतिक्रिया
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति और जाने-माने अर्थशास्त्री परकाला प्रभाकर के बारे में भी संजय राउत ने अपनी राय रखी। प्रभाकर 23 अक्टूबर को चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले हैं।
इस पर राउत ने कहा, 'परकाला प्रभाकर हमेशा से लोकतंत्र और किसानों के लिए खुलकर बोलते रहे हैं — यह अच्छी बात है।' राउत ने प्रभाकर के इस कदम का स्वागत किया।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि परकाला प्रभाकर अक्सर केंद्र सरकार की नीतियों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं। एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री के पति का सरकार की ही चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होना राजनीतिक रूप से असामान्य और चर्चा का विषय बना हुआ है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। राउत की इन टिप्पणियों से स्पष्ट है कि नशे की समस्या और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता दोनों मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रहेंगे।