नशा मुक्त पंजाब: अमित शाह के अभियान को संजय निरुपम का समर्थन, नक्सलवाद जैसी सफलता का भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 30 सितंबर को मुंबई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' का पुरज़ोर समर्थन करते हुए कहा कि जिस तरह सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में सफलता हासिल की, उसी रणनीति से ड्रग्स के कारोबार और नशाखोरी को भी जड़ से समाप्त किया जा सकता है। जालंधर में आयोजित इस यात्रा के संदर्भ में निरुपम ने स्पष्ट किया कि गृह मंत्री के नेतृत्व में चल रहा यह अभियान देशव्यापी स्तर पर असर दिखाएगा।
नक्सलवाद से तुलना: अभियान की रणनीति
निरुपम ने कहा कि देश में नक्सलवादी और उग्रवादी संगठनों के विरुद्ध चलाई गई कार्रवाई का परिणाम ज़मीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है और नक्सलवाद काफ़ी हद तक नियंत्रण में आया है। उनके अनुसार, यही सुनियोजित रणनीति अब ड्रग्स के नेटवर्क को तोड़ने में भी कारगर होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में नशाखोरी उन्मूलन के प्रयास सफल होंगे और नई पीढ़ी भी इस अभियान से जुड़ेगी।
पंजाब में ड्रग्स की गंभीर समस्या
निरुपम ने स्वीकार किया कि पंजाब में ड्रग्स के कारोबार को लेकर लंबे समय से गहरी चिंता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और शहरों में नशे का फैलाव एक बड़ी सामाजिक समस्या बन चुका है। उनका आग्रह था कि यह अभियान चुनावी मौसम से परे, हर परिस्थिति में पंजाब पर केंद्रित रहना चाहिए।
इंडिया गठबंधन पर निरुपम की टिप्पणी
इंडिया गठबंधन की हालिया बैठक पर सवाल किए जाने पर निरुपम ने कहा कि बैठक में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की अनुपस्थिति और उसके किसी प्रतिनिधि का न आना महत्त्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने इसे कांग्रेस और DMK के बीच राजनीतिक मतभेदों का परिणाम बताया। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने भी बैठक में व्यक्तिगत रूप से भाग नहीं लिया और केवल एक प्रतिनिधि भेजा।
निरुपम ने दावा किया कि कांग्रेस की ओर से गठबंधन में वर्चस्व बनाए रखने की कोशिशें होती रही हैं, जिसका कई विपक्षी दलों ने विरोध किया है। उनके अनुसार, यह गठबंधन अलग-अलग राज्यों में भिन्न राजनीतिक समीकरणों के कारण बिखरा हुआ है।
ठाकरे बंधुओं पर कटाक्ष
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे द्वारा 4 अक्टूबर को प्रस्तावित गैर-राजनीतिक 'महा मोर्चे' पर निरुपम ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं के पास अब अपना कोई स्वतंत्र राजनीतिक एजेंडा नहीं बचा है और वे अन्य संगठनों के मुद्दों तथा कार्यक्रमों के पीछे चल रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध प्रस्तावित आंदोलन का संदर्भ देते हुए उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में यह भी कहा कि आने वाले समय में दोनों ठाकरे अपनी-अपनी पार्टियों का किसी अन्य राजनीतिक संगठन में विलय भी कर सकते हैं।
निरुपम की यह टिप्पणियाँ महाराष्ट्र की राजनीति में बदलते समीकरणों की पृष्ठभूमि में आई हैं, जहाँ शिवसेना के विभिन्न धड़े अपनी-अपनी प्रासंगिकता स्थापित करने की कोशिश में हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' का असर राज्य स्तर पर किस रूप में सामने आता है।