नासिक हत्याकांड: पत्नी हसीना ने आधी उम्र के प्रेमी से करवाई पति वसंत की हत्या, 12 दिन बाद कसारा घाट के जंगल से मिला शव
सारांश
मुख्य बातें
नासिक पुलिस ने एक सुनियोजित हत्या का पर्दाफाश किया है, जिसमें हसीना शेख (45) ने अपने 23 वर्षीय प्रेमी शाहिल शेख और उसके दो साथियों की मदद से अपने पति वसंत सातपुते (40) की हत्या करवाई। 16 अगस्त 2026 को नासिक क्राइम ब्रांच ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनकी निशानदेही पर कसारा घाट के जंगल से बोरी में बंद शव बरामद किया। पुलिस को गुमराह करने के लिए हसीना ने अपहरण की झूठी शिकायत भी दर्ज कराई थी।
मुख्य घटनाक्रम
5-6 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि को शाहिल शेख, मोईन और सरफराज ने नासिक शहर स्थित वसंत सातपुते के घर में घुसकर हसीना की मौजूदगी में उनकी गला काटकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को एक बोरी में भरकर नासिक ग्रामीण के कसारा घाट के जंगल में फेंक दिया गया और सभी आरोपी नासिक शहर लौट आए।
हत्या के बाद हसीना ने इंदिरा नगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई कि अज्ञात लोगों ने उनके पति का अपहरण कर लिया है। पुलिस लगभग 12 दिन तक वसंत सातपुते की तलाश करती रही।
हत्या की साजिश कैसे उजागर हुई
नासिक क्राइम ब्रांच के एसीपी संदीप मिटके के अनुसार, 16 अगस्त को पुलिस को सूचना मिली कि वसंत सातपुते की हत्या हो चुकी है और आरोपी नासिक के शालीमार इलाके में मौजूद हैं। इस सूचना पर क्राइम ब्रांच की टीम ने हसीना, शाहिल, मोईन और सरफराज को हिरासत में लिया। पूछताछ में चारों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
आरोपियों की निशानदेही पर कसारा घाट में चार से पाँच घंटे का सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसके बाद सोमवार देर शाम बोरी के अंदर से वसंत का शव बरामद किया गया।
रिश्ते की पृष्ठभूमि
जाँच में सामने आया कि वसंत सातपुते और हसीना ने वर्षों पहले प्रेम विवाह किया था और लंबे समय से साथ रह रहे थे। इसी दौरान हसीना का झुकाव अपने से 22 साल छोटे शाहिल शेख की ओर हो गया। पुलिस के अनुसार, हसीना ने वसंत को रास्ते से हटाने का निर्णय किया और शाहिल को इसके लिए राजी किया। शाहिल ने अपने दोस्तों मोईन और सरफराज को भी इस साजिश में शामिल किया।
कानूनी कार्रवाई
न्यायालय ने चारों आरोपियों को 6 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। एसीपी मिटके ने बताया कि आगे की जाँच जारी है और साजिश के अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
यह मामला महाराष्ट्र में घरेलू अपराध की बढ़ती जटिलता को रेखांकित करता है, जहाँ अपराध को छुपाने के लिए झूठी पुलिस शिकायतों का सहारा लिया जाता है।