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नवप्रीत सिंह तुर्किए से प्रत्यर्पित, अमित शाह बोले — 'मोदी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि'

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नवप्रीत सिंह तुर्किए से प्रत्यर्पित, अमित शाह बोले — 'मोदी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि'

सारांश

फर्जी पहचान से तुर्किए की नागरिकता लेने वाला कथित ड्रग सरगना नवप्रीत सिंह आखिरकार भारत पहुँच गया। यह प्रत्यर्पण 2026 में तुर्किए से भारत आने वाला दूसरा बड़ा मामला है — और सरकार के 2029 तक हर ड्रग कार्टेल खत्म करने के दावे की असली परीक्षा अब शुरू होती है।

मुख्य बातें

कथित नार्को-ट्रैफिकिंग सरगना नवप्रीत सिंह को 3 अक्टूबर 2026 को तुर्किए से भारत प्रत्यर्पित किया गया।
नवप्रीत ने 'नवाब विर्क' की फर्जी पहचान से तुर्किए की नागरिकता ली थी और अफगानिस्तान से हेरोइन व मेथामफेटामाइन की तस्करी करता था।
गृह मंत्री अमित शाह ने इसे मोदी सरकार की 'ऐतिहासिक उपलब्धि' बताया और दिसंबर 2029 तक सभी ड्रग कार्टेल खत्म करने का संकल्प दोहराया।
इससे पहले अप्रैल 2026 में मोहम्मद सलीम डोला और मई 2026 में प्रभदीप सिंह को भी क्रमशः तुर्किए और अज़रबैजान से प्रत्यर्पित किया गया था।
भारत-तुर्किए प्रत्यर्पण संधि 2001 में हस्ताक्षरित हुई और जून 2002 में लागू हुई।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि कथित नार्को-ट्रैफिकिंग सरगना नवप्रीत सिंह को तुर्किए से भारत वापस लाने में सफलता मिली है। नवप्रीत पर अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथामफेटामाइन की तस्करी के गंभीर आरोप हैं। उसे फिलहाल ड्रग तस्करी और अन्य अपराधों से जुड़े मामलों में जेल भेज दिया गया है।

मामले का पूरा घटनाक्रम

अमित शाह के अनुसार, नवप्रीत सिंह ने 'नवाब विर्क' की फर्जी पहचान का सहारा लेकर तुर्किए की नागरिकता हासिल की थी। इस नकली पहचान की आड़ में वह लंबे समय तक अफगानिस्तान से भारत में मादक पदार्थों की तस्करी करता रहा। भारतीय एजेंसियों ने उसकी असली पहचान उजागर की और तुर्किए सरकार के साथ समन्वय कर उसे डिपोर्ट कराया।

गृह मंत्री ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'मोदी सरकार ने तुर्किए से कुख्यात ड्रग तस्कर नवप्रीत सिंह को डिपोर्ट करवाकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।' उन्होंने आगे कहा, 'हमारी एजेंसियों ने उसका पता लगाया, उसकी असली पहचान का खुलासा किया और उसे डिपोर्ट करवाया।'

सरकार का 2029 तक का लक्ष्य

शाह ने इस मौके पर यह भी घोषणा की कि मोदी सरकार दिसंबर 2029 से पहले हर ड्रग-कार्टेल को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस सफलता के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को बधाई दी।

पिछले प्रत्यर्पणों की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने हाल के महीनों में तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े कई भगोड़ों को विदेशों से वापस लाने में सफलता पाई है। गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2026 में कथित तौर पर दाऊद इब्राहिम के करीबी सहयोगी और ड्रग तस्करी के संदिग्ध मोहम्मद सलीम डोला को भी तुर्किए से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। उस समय नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की यह कार्रवाई बड़ी उपलब्धि मानी गई थी।

मई 2026 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के साथ मिलकर अज़रबैजान से भगोड़े प्रभदीप सिंह को प्रत्यर्पित कराया था। यह मामला 358 किलोग्राम हेरोइन की बरामदगी से जुड़े एक बड़े ड्रग केस से संबंधित था। 2023 से फरार प्रभदीप को स्पेशल सेल की तीन सदस्यीय टीम बाकू से भारत वापस लाई थी।

भारत-तुर्किए प्रत्यर्पण संधि की भूमिका

भारत और तुर्किए के बीच 2001 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, जो जून 2002 में लागू हुई। यह समझौता दोनों देशों को आतंकवाद और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित भगोड़ों के हस्तांतरण की माँग करने का अधिकार देता है। पिछले मामलों में तुर्किए ने चरमपंथी नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों — जिनमें कथित इस्लामिक स्टेट ऑपरेटिव भी शामिल हैं — को निर्वासित करने में भारत की सहायता की है। ऐसे मामलों में अक्सर इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस और स्थापित द्विपक्षीय प्रक्रियाओं का उपयोग होता है।

आगे क्या होगा

नवप्रीत सिंह को अब भारतीय अदालतों में ड्रग तस्करी और संबंधित अपराधों के मामलों का सामना करना होगा। सरकार के बयानों के अनुसार, एजेंसियाँ अन्य फरार ड्रग तस्करों और अपराध सिंडिकेट के सदस्यों को भी कानून के दायरे में लाने के प्रयास जारी रखेंगी। यह घटनाक्रम भारत की बहु-देशीय प्रत्यर्पण रणनीति की बढ़ती धार को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या केवल व्यक्तिगत कड़ियाँ हटाई जा रही हैं जिनकी जगह नई कड़ियाँ ले लेती हैं। सरकार का 2029 का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, पर उसे मापने के लिए कोई सार्वजनिक मानक नहीं है। बिना सत्यापन-योग्य ढाँचे के, यह घोषणाएँ उपलब्धियों के बजाय राजनीतिक आख्यान बनने का जोखिम उठाती हैं।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवप्रीत सिंह कौन है और उस पर क्या आरोप हैं?
नवप्रीत सिंह कथित नार्को-ट्रैफिकिंग सरगना है जिस पर अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथामफेटामाइन की तस्करी करने के आरोप हैं। उसने 'नवाब विर्क' की फर्जी पहचान का उपयोग करके तुर्किए की नागरिकता ली थी और इसी आड़ में वह फरार रहा।
नवप्रीत सिंह को तुर्किए से कैसे वापस लाया गया?
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने नवप्रीत की असली पहचान उजागर की और भारत-तुर्किए प्रत्यर्पण संधि (2001, लागू जून 2002) के तहत तुर्किए सरकार से समन्वय कर उसे डिपोर्ट कराया। इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस और स्थापित प्रक्रियाओं का भी उपयोग किया गया।
अमित शाह ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि क्यों कहा?
गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, फर्जी पहचान से विदेशी नागरिकता लेकर छिपे एक कुख्यात तस्कर को वापस लाना एजेंसियों की उन्नत क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने इसे मोदी सरकार के 2029 तक सभी ड्रग कार्टेल खत्म करने के संकल्प की दिशा में एक अहम कदम बताया।
इससे पहले तुर्किए से और किसे प्रत्यर्पित किया गया था?
अप्रैल 2026 में कथित तौर पर दाऊद इब्राहिम के करीबी मोहम्मद सलीम डोला को तुर्किए से वापस लाया गया था। यह भी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की बड़ी सफलता मानी गई थी।
भारत-तुर्किए प्रत्यर्पण संधि क्या है?
भारत और तुर्किए के बीच 2001 में हस्ताक्षरित यह संधि जून 2002 में लागू हुई। यह दोनों देशों को आतंकवाद और गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित भगोड़ों के हस्तांतरण की माँग करने का अधिकार देती है।
राष्ट्र प्रेस
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