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नवरात्र तृतीया: मां चंद्रघंटा से जुड़ा चन्द्रसूर (हलीम) पौधा, आयुर्वेद में बलवर्धक औषधि

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नवरात्र तृतीया: मां चंद्रघंटा से जुड़ा चन्द्रसूर (हलीम) पौधा, आयुर्वेद में बलवर्धक औषधि

सारांश

नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के साथ पारंपरिक मान्यताओं में चन्द्रसूर (हलीम) पौधे का विशेष महत्व है। आयुर्वेद में यह पौधा हड्डियों, ऊर्जा और रक्त के लिए गुणकारी माना जाता है — लेकिन किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ सलाह ज़रूरी है।

मुख्य बातें

नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है; पारंपरिक मान्यताओं में इन्हें चन्द्रसूर (हलीम) पौधे से जोड़ा जाता है।
चन्द्रसूर का वैज्ञानिक नाम लेपिडियम सैटिवम है; आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे बलवर्धक और पौष्टिक माना गया है।
इसमें कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होते हैं — हड्डियों, जोड़ों और एनीमिया में सहायक माना जाता है।
पाचन सुधार और शारीरिक ऊर्जा बढ़ाने में भी आयुर्वेद में इसका उल्लेख है।
गर्भवती महिलाओं और दवा ले रहे लोगों को सेवन से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य।

नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है — साहस, शांति और शक्ति की प्रतीक इस देवी से पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार चन्द्रसूर (जिसे हलीम भी कहते हैं) नामक औषधीय पौधे का संबंध जोड़ा जाता है। इस पौधे का वैज्ञानिक नाम लेपिडियम सैटिवम (Lepidium sativum) है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी इसके पोषण और बलवर्धक गुणों का विस्तृत उल्लेख मिलता है।

मां चंद्रघंटा और चन्द्रसूर का पारंपरिक संबंध

नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की परंपरा है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक देवी स्वरूप से एक विशेष औषधीय पौधे को जोड़ा गया है। मां चंद्रघंटा का यह संबंध चन्द्रसूर से बताया जाता है। आयुर्वेद में इस पौधे को पौष्टिक और शरीर को ऊर्जा देने वाला माना गया है। गौरतलब है कि यह वर्गीकरण पारंपरिक एवं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है; किसी भी स्वास्थ्य लाभ के दावे के लिए योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।

हड्डियों और जोड़ों के लिए लाभकारी

आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार चन्द्रसूर में कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। पारंपरिक रूप से इसे हड्डियों को मजबूती देने, जोड़ों के दर्द और वात विकारों में सहायक माना जाता है। वृद्धावस्था में हड्डियों की कमज़ोरी और गठिया जैसी समस्याओं में इसके प्रयोग को लाभदायक बताया जाता है।

शारीरिक शक्ति और ऊर्जा में वृद्धि

आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार यह औषधीय पौधा शरीर की कमज़ोरी दूर कर ऊर्जा का संचार करता है। बढ़ती उम्र के किशोरों में इसके सेवन से शारीरिक विकास में सहायता मिलती है — ऐसा पारंपरिक चिकित्सा में माना जाता है। शरीर में स्फूर्ति बनाए रखने के लिए भी इसे उपयोगी बताया गया है।

पाचन तंत्र और रक्तवर्धक गुण

चन्द्रसूर को पेट के कीड़े, अपच, गैस और कफ संबंधी समस्याओं में प्रभावी माना जाता है। यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। इसके अलावा, आयरन की भरपूर मात्रा के कारण यह शरीर में हीमोग्लोबिन स्तर सुधारने और एनीमिया (खून की कमी) दूर करने में सहायक माना जाता है। आयुर्वेदिक परंपरा में विशेष रूप से महिलाओं के लिए इसे उपयोगी औषधि बताया गया है।

सेवन से पहले विशेषज्ञ सलाह ज़रूरी

चन्द्रसूर या किसी भी औषधीय पौधे का सेवन औषधि के रूप में करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना अनिवार्य है। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और पहले से किसी बीमारी की दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेदिक उपचार हमेशा व्यक्तिगत शारीरिक प्रकृति और रोग की स्थिति को देखते हुए ही लेना उचित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर सावधानी ज़रूरी है। चन्द्रसूर के गुणों का उल्लेख आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है, परंतु आधुनिक क्लिनिकल शोध सीमित है। धर्म और चिकित्सा को जोड़ने वाली ऐसी सामग्री में पाठकों को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि पारंपरिक मान्यता और चिकित्सीय प्रमाण अलग-अलग हैं — इससे जन-स्वास्थ्य के प्रति जवाबदेही भी बनती है और सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रहती है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां चंद्रघंटा से जुड़ा चन्द्रसूर पौधा क्या है?
चन्द्रसूर, जिसे हलीम भी कहते हैं, एक औषधीय पौधा है जिसका वैज्ञानिक नाम लेपिडियम सैटिवम है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र की तीसरी देवी मां चंद्रघंटा का संबंध इसी पौधे से जोड़ा जाता है, और आयुर्वेद में इसे पौष्टिक व बलवर्धक माना गया है।
चन्द्रसूर (हलीम) के आयुर्वेदिक फायदे क्या हैं?
आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार चन्द्रसूर हड्डियों को मजबूत करने, जोड़ों के दर्द, एनीमिया, पाचन समस्याओं और शारीरिक कमज़ोरी में सहायक है। इसमें कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
क्या चन्द्रसूर का सेवन सभी के लिए सुरक्षित है?
नहीं — गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और पहले से कोई दवा ले रहे लोगों को इसका सेवन करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से अनिवार्य रूप से सलाह लेनी चाहिए। बिना परामर्श के किसी भी औषधीय पौधे का सेवन उचित नहीं है।
नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का क्या महत्व है?
नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है, जो साहस, शांति और शक्ति की प्रतीक मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इनकी आराधना से भक्तों को मानसिक शांति और आत्मबल मिलता है।
क्या चन्द्रसूर महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है?
आयुर्वेदिक परंपरा में चन्द्रसूर को महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना गया है, क्योंकि इसमें आयरन की अधिकता हीमोग्लोबिन स्तर सुधारने में सहायक मानी जाती है। हालाँकि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसका सेवन बिना चिकित्सीय परामर्श के नहीं करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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