नवरात्रि के पाँचवें दिन PM मोदी ने स्कंदमाता की स्तुति साझा की, 'विजया दुर्गा' भजन का यूट्यूब लिंक पोस्ट किया
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के पाँचवें दिन सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर स्कंदमाता को नमन करते हुए भजन का एक यूट्यूब लिंक साझा किया और देशवासियों को मंगलकामनाएँ दीं। यह पोस्ट नवरात्रि के दौरान उनके नियमित धार्मिक-सांस्कृतिक संदेशों की श्रृंखला का हिस्सा है।
PM मोदी का संदेश
अपनी एक्स पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, 'नवरात्रि का पाँचवाँ दिन माँ स्कंदमाता के पूजन-अर्चन को समर्पित है। ममता और वात्सल्य की देवी माँ के आशीर्वाद से हर परिवार में सदैव स्नेह और सौहार्द बना रहे, यही कामना है।' इस पोस्ट के साथ उन्होंने गायक बालचंद्र प्रभु द्वारा प्रस्तुत भजन 'विजया दुर्गा' का यूट्यूब लिंक भी संलग्न किया।
भजन और संस्कृत श्लोक
गायक बालचंद्र प्रभु के इस भजन में देवी दुर्गा की महिमा और दुष्टों के संहार का गुणगान किया गया है। इससे पूर्व मोदी ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया था — 'या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः' — जिसका भावार्थ है कि जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में विद्यमान हैं, उन्हें बारंबार नमस्कार है।
स्कंदमाता: पौराणिक महत्व
नवरात्रि के पाँचवें दिन स्कंदमाता की विशेष आराधना होती है। देवी को भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण स्कंदमाता कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। उनका वाहन शेर है और उनकी चार भुजाएँ हैं — दो में कमल पुष्प, एक में वरमुद्रा या अभयमुद्रा, और गोद में बाल रूप कार्तिकेय विराजमान होते हैं।
पूजन विधि और फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीला रंग देवी स्कंदमाता को अत्यंत प्रिय है। भोग में केला और पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। स्कंदमाता की उपासना से विशुद्ध चक्र जाग्रत होता है। मान्यता है कि इनकी आराधना से सुख, शांति, संतान सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
नवरात्रि में PM मोदी की परंपरा
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी हर नवरात्रि के नौ दिनों में नवदुर्गा के प्रत्येक स्वरूप पर एक्स के माध्यम से श्रद्धापूर्वक संदेश और भजन साझा करते हैं। यह सांस्कृतिक आस्था और डिजिटल संवाद का उनका एक सतत प्रयास माना जाता है। आने वाले दिनों में नवरात्रि के शेष स्वरूपों पर भी इसी प्रकार के संदेश अपेक्षित हैं।