15 अक्टूबर 2026
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नवरात्रि पंचमी पर PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक, स्कंदमाता को किया नमन

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नवरात्रि पंचमी पर PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक, स्कंदमाता को किया नमन

सारांश

नवरात्रि के पांचवें दिन प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर दुर्गा सप्तशती का प्रसिद्ध श्लोक साझा कर स्कंदमाता को नमन किया — जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में विराजमान हैं। यह पोस्ट उनकी नवरात्रि पर देवी स्तुति साझा करने की वार्षिक परंपरा का हिस्सा है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 15 अक्टूबर 2026 को एक्स पर दुर्गा सप्तशती के अध्याय पाँच का संस्कृत श्लोक साझा किया।
श्लोक का भावार्थ: 'जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में विद्यमान हैं, उन्हें बारंबार नमस्कार है।' नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की आराधना की जाती है; ये भगवान कार्तिकेय की माता हैं।
स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजती हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
मान्यता है कि स्कंदमाता की उपासना से विशुद्ध चक्र जाग्रत होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के पांचवें दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत श्लोक साझा कर स्कंदमाता की स्तुति की। यह पोस्ट दुर्गा सप्तशती से ली गई पंक्तियों पर आधारित थी, जिसमें देवी की सर्वव्यापी शक्ति को नमन किया गया।

साझा किया गया श्लोक और उसका भावार्थ

मोदी ने दुर्गा सप्तशती (देवी महात्म्य) के अध्याय पाँच से यह श्लोक साझा किया — 'या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः'। इसका हिंदी भावार्थ है: 'जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में विद्यमान हैं, उन्हें बारंबार नमस्कार है।'

पौराणिक संदर्भ के अनुसार, जब देवी ने विभिन्न रूपों में प्रकट होकर संसार की रक्षा की, तब समस्त देवताओं ने उनकी शक्ति को नमन करते हुए इस स्तोत्र का गान किया था। देवताओं ने कहा था — 'हे देवी! आप इस संपूर्ण सृष्टि के समस्त प्राणियों के भीतर ऊर्जा, सामर्थ्य और शक्ति के रूप में विराजमान हैं, आपको बार-बार प्रणाम है।'

स्कंदमाता: स्वरूप और महत्त्व

नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की आराधना की जाती है। देवी को भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण यह नाम मिला है। माँ का वाहन शेर है और वे कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।

देवी की चार भुजाएँ हैं — दो हाथों में कमल के पुष्प, एक हाथ में वरमुद्रा या अभयमुद्रा, और गोद में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय विराजमान हैं। स्कंदमाता को पीला रंग अत्यंत प्रिय है; केले का प्रसाद और पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

पौराणिक पृष्ठभूमि

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव की पत्नी के रूप में देवी ने कार्तिकेय को जन्म दिया था। कार्तिकेय का एक अन्य नाम स्कंद है, जिससे देवी को स्कंदमाता की संज्ञा मिली। गौरतलब है कि नवरात्रि की नौ देवियों में पाँचवीं देवी का यह स्वरूप मोक्ष, संतान सुख और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है।

आध्यात्मिक महत्त्व

मान्यता है कि स्कंदमाता की उपासना से विशुद्ध चक्र जाग्रत होता है, जो व्यक्ति को सुख, शांति, संतान सुख और मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। यह दिन नवरात्रि के उत्सव में एक महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक पड़ाव माना जाता है। मोदी की यह पोस्ट हर वर्ष नवरात्रि पर देवी स्तुति साझा करने की उनकी परंपरा के अनुरूप है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो करोड़ों श्रद्धालुओं से सीधा जुड़ाव स्थापित करती है। यह पोस्ट महज शुभकामना संदेश नहीं, बल्कि पौराणिक-आध्यात्मिक सामग्री को डिजिटल मंच पर संस्थागत रूप देने का प्रयास है। आलोचक इसे सत्ता और धर्म के सम्मिलन के नज़रिए से देखते हैं, जबकि समर्थक इसे सांस्कृतिक गर्व की अभिव्यक्ति मानते हैं। यह प्रवृत्ति बताती है कि भारतीय राजनीति में त्योहारों का सोशल मीडिया-उपयोग अब एक स्थायी संचार औज़ार बन चुका है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने नवरात्रि पंचमी पर कौन-सा श्लोक साझा किया?
मोदी ने दुर्गा सप्तशती के अध्याय पाँच से 'या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः' श्लोक साझा किया। इसका भावार्थ है कि जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में विद्यमान हैं, उन्हें बारंबार नमस्कार है।
नवरात्रि के पांचवें दिन किस देवी की पूजा होती है?
नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की आराधना की जाती है। ये भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
स्कंदमाता की पूजा का क्या महत्त्व है?
स्कंदमाता की उपासना से विशुद्ध चक्र जाग्रत होता है और सुख, शांति, संतान सुख तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। माँ को पीला रंग प्रिय है और केले का प्रसाद व पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
दुर्गा सप्तशती क्या है और यह श्लोक उसमें कहाँ से है?
दुर्गा सप्तशती (देवी महात्म्य) एक प्रमुख हिंदू धर्मग्रंथ है जिसमें देवी की महिमा का वर्णन है। यह श्लोक उसके अध्याय पाँच से लिया गया है, जब देवताओं ने संसार की रक्षा करने वाली देवी के विभिन्न रूपों को नमन करते हुए इस स्तोत्र का गान किया था।
स्कंदमाता का नाम कैसे पड़ा?
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव की पत्नी के रूप में देवी ने कार्तिकेय को जन्म दिया, जिनका दूसरा नाम स्कंद है। इसी कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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