नवरात्रि पंचमी पर PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक, स्कंदमाता को किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के पांचवें दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत श्लोक साझा कर स्कंदमाता की स्तुति की। यह पोस्ट दुर्गा सप्तशती से ली गई पंक्तियों पर आधारित थी, जिसमें देवी की सर्वव्यापी शक्ति को नमन किया गया।
साझा किया गया श्लोक और उसका भावार्थ
मोदी ने दुर्गा सप्तशती (देवी महात्म्य) के अध्याय पाँच से यह श्लोक साझा किया — 'या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः'। इसका हिंदी भावार्थ है: 'जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में विद्यमान हैं, उन्हें बारंबार नमस्कार है।'
पौराणिक संदर्भ के अनुसार, जब देवी ने विभिन्न रूपों में प्रकट होकर संसार की रक्षा की, तब समस्त देवताओं ने उनकी शक्ति को नमन करते हुए इस स्तोत्र का गान किया था। देवताओं ने कहा था — 'हे देवी! आप इस संपूर्ण सृष्टि के समस्त प्राणियों के भीतर ऊर्जा, सामर्थ्य और शक्ति के रूप में विराजमान हैं, आपको बार-बार प्रणाम है।'
स्कंदमाता: स्वरूप और महत्त्व
नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की आराधना की जाती है। देवी को भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण यह नाम मिला है। माँ का वाहन शेर है और वे कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
देवी की चार भुजाएँ हैं — दो हाथों में कमल के पुष्प, एक हाथ में वरमुद्रा या अभयमुद्रा, और गोद में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय विराजमान हैं। स्कंदमाता को पीला रंग अत्यंत प्रिय है; केले का प्रसाद और पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
पौराणिक पृष्ठभूमि
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव की पत्नी के रूप में देवी ने कार्तिकेय को जन्म दिया था। कार्तिकेय का एक अन्य नाम स्कंद है, जिससे देवी को स्कंदमाता की संज्ञा मिली। गौरतलब है कि नवरात्रि की नौ देवियों में पाँचवीं देवी का यह स्वरूप मोक्ष, संतान सुख और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है।
आध्यात्मिक महत्त्व
मान्यता है कि स्कंदमाता की उपासना से विशुद्ध चक्र जाग्रत होता है, जो व्यक्ति को सुख, शांति, संतान सुख और मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। यह दिन नवरात्रि के उत्सव में एक महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक पड़ाव माना जाता है। मोदी की यह पोस्ट हर वर्ष नवरात्रि पर देवी स्तुति साझा करने की उनकी परंपरा के अनुरूप है।