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नवरात्र षष्ठी पर PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक, मां कात्यायनी को किया प्रणाम

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नवरात्र षष्ठी पर PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक, मां कात्यायनी को किया प्रणाम

सारांश

नवरात्र के छठे दिन PM मोदी ने एक्स पर 'देवीमयी' स्तुति का संस्कृत श्लोक साझा किया, जिसमें देवी के सर्वव्यापी स्वरूप का गुणगान है — यह उनकी नवरात्र के दौरान आध्यात्मिक संदेश साझा करने की परंपरा का हिस्सा है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 16 अक्टूबर 2026 को नवरात्र के छठे दिन एक्स पर संस्कृत सुभाषित पोस्ट किया।
साझा श्लोक मां दुर्गा की स्तुति 'देवीमयी' का अंश है, जिसमें देवी के सर्वशब्दमय स्वरूप का वर्णन है।
नवरात्र के छठे दिन देवी दुर्गा के छठे रूप मां कात्यायनी की पूजा होती है; उनका वाहन सिंह है।
मां कात्यायनी की उपासना विशेषतः शीघ्र विवाह एवं वैवाहिक बाधाओं के निवारण के लिए की जाती है।
महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 अक्टूबर 2026 को नवरात्र के छठे दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए मां कात्यायनी को नमन किया। उन्होंने मां दुर्गा की प्रसिद्ध स्तुति 'देवीमयी' का एक श्लोक पोस्ट कर देवी के सर्वव्यापी स्वरूप का गुणगान किया।

साझा किया गया श्लोक

मोदी द्वारा एक्स पर पोस्ट किया गया संस्कृत श्लोक इस प्रकार है — 'तव च का किल न स्तुतिरम्बिके! सकलशब्दमयी किल ते तनुः। निखिलमूर्तिषु मे भवदन्वयो मनसिजासु बहिःप्रसरासु च॥' — जिसका भावार्थ है: 'हे जगदम्बिके! इस संसार में भला ऐसा कौन-सा शब्द है जो आपकी स्तुति नहीं है? क्योंकि आपका स्वरूप तो समस्त शब्दों और अक्षरों से रचित है। हे देवी! मेरे मन में उठने वाले सभी विचारों और बाहर दिखाई देने वाली समस्त आकृतियों एवं मूर्तियों में मुझे आपका ही रूप दिखाई देता है।'

श्लोक का आध्यात्मिक महत्त्व

यह श्लोक मां दुर्गा की प्रसिद्ध स्तुति 'देवीमयी' का अंश है। इसमें साधक की उच्चतम आध्यात्मिक अवस्था का वर्णन किया गया है — जिसमें साधक को संपूर्ण सृष्टि, वाणी और मन के संकल्प-विकल्पों में केवल देवी के दर्शन होते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नवरात्र की उपासना अपने चरम पर है।

मां कात्यायनी: छठा रूप

नवरात्र के छठे दिन देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा का विधान है। मां की चार भुजाएं हैं — एक हाथ में तलवार, दूसरे में कमल पुष्प, और शेष दो हाथ क्रमशः वरदा मुद्रा एवं अभय मुद्रा में हैं। उनका वाहन सिंह है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया, जिससे उनका नाम कात्यायनी पड़ा।

उपासना का फल

मां कात्यायनी की उपासना विशेष रूप से शीघ्र विवाह, वैवाहिक जीवन की बाधाओं को दूर करने और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए की जाती है। आस्थावान भक्त इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और व्रत करते हैं। आने वाले दिनों में नवरात्र की समाप्ति के साथ विजयादशमी पर्व मनाया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुचिंतित सांस्कृतिक संवाद भी है जो उनके करोड़ों अनुयायियों तक पहुँचता है। 'देवीमयी' जैसे गूढ़ संस्कृत ग्रंथों के अंश को सरल भावार्थ के साथ प्रस्तुत करना, शास्त्रीय परंपरा को डिजिटल मंच पर लाने का एक अनूठा प्रयास है। यह उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें भारतीय राजनीतिक नेतृत्व सांस्कृतिक-धार्मिक अनुष्ठानों को जनसंपर्क के साथ जोड़ता है। इसका असर मतदाताओं पर क्या पड़ता है, यह अलग विमर्श है — पर संस्कृत को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास सराहनीय है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने नवरात्र के छठे दिन कौन-सा श्लोक साझा किया?
मोदी ने 'देवीमयी' स्तुति का संस्कृत श्लोक 'तव च का किल न स्तुतिरम्बिके!' साझा किया, जिसका भावार्थ है कि देवी का स्वरूप समस्त शब्दों से बना है और साधक को सृष्टि की हर आकृति में उन्हीं के दर्शन होते हैं। यह पोस्ट 16 अक्टूबर 2026 को एक्स पर की गई।
मां कात्यायनी कौन हैं और नवरात्र के किस दिन उनकी पूजा होती है?
मां कात्यायनी देवी दुर्गा का छठा स्वरूप हैं और नवरात्र के छठे दिन उनकी पूजा का विधान है। उनकी चार भुजाओं में तलवार, कमल पुष्प, वरदा मुद्रा और अभय मुद्रा हैं; सिंह उनका वाहन है।
मां कात्यायनी का नाम 'कात्यायनी' क्यों पड़ा?
पौराणिक मान्यता के अनुसार महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया, इसीलिए उन्हें कात्यायनी कहा जाता है।
मां कात्यायनी की उपासना किसलिए की जाती है?
मां कात्यायनी की उपासना विशेष रूप से शीघ्र विवाह, वैवाहिक जीवन की बाधाओं को दूर करने और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए की जाती है।
'देवीमयी' स्तुति क्या है?
'देवीमयी' मां दुर्गा की एक प्रसिद्ध संस्कृत स्तुति है जिसमें देवी के सर्वव्यापी और सर्वशब्दमय स्वरूप का वर्णन है। इसमें साधक की उस उच्च आध्यात्मिक अवस्था का चित्रण है जिसमें उसे ब्रह्मांड की हर वस्तु में देवी के ही दर्शन होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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