नौसेना कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2026: तकनीक और युद्धक तैयारी पर मंथन, CDS व थलसेना प्रमुख भी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस इस समय नई दिल्ली में जारी है, जिसमें नौसेना के शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि और थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ भी सम्मिलित हुए। यह सम्मेलन भारतीय नौसेना की परिचालन तैयारियों, तकनीकी उन्नयन और त्रि-सेवा एकीकरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। 30 सितंबर को आयोजित इस बैठक में समुद्री सुरक्षा के बदलते परिदृश्य और भारत की ऊर्जा सुरक्षा में नौसेना की भूमिका पर विशेष रूप से चर्चा की गई।
नौसेना प्रमुख की समीक्षा और प्राथमिकताएँ
नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने सम्मेलन में मौजूदा समुद्री सुरक्षा वातावरण और भारतीय नौसेना की परिचालन स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने समुद्री क्षेत्र में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए उच्च स्तर की युद्धक तैयारी बनाए रखने पर बल दिया।
एडमिरल स्वामीनाथन ने तेज़ी से बदलती परिस्थितियों के बीच त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करने और नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उनका ज़ोर इस बात पर रहा कि सैन्य क्षमताओं का विकास समय के साथ कदमताल मिलाकर चले।
रक्षा मंत्री का संबोधन और हिंद महासागर की भूमिका
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौसेना कमांडरों को संबोधित करते हुए हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में 'पहली प्रतिक्रिया देने वाली' और 'भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार' की भूमिका निभा रही है।
पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के तहत नौसेना के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। उनके अनुसार, भारत की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित रखने में नौसेना की भूमिका अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
CDS और थलसेना प्रमुख का संदेश
CDS जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने भारतीय नौसेना को देश की सामरिक क्षमता को सुदृढ़ करने वाली 'महत्वपूर्ण शक्ति' बताया। उन्होंने तकनीकी बदलाव को गति देने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और तीनों सेनाओं के बीच सूचनाओं के निर्बाध आदान-प्रदान की आवश्यकता पर जोर दिया।
जनरल सुब्रमणि ने स्पष्ट किया कि भविष्य की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तीनों सेनाओं के बीच बेहतर संयुक्तता और एकीकरण अपरिहार्य है। थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भी नौसेना कमांडरों के साथ मौजूदा सुरक्षा वातावरण और उभरती चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया, जिसमें संयुक्त अभियान क्षमता और एकीकृत प्रतिक्रिया को मज़बूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
आगामी सत्रों में क्या होगा
कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के शेष सत्रों में परिचालन, सैन्य सामग्री, रसद, मानव संसाधन, प्रशिक्षण और नई तकनीकों को सेना में शामिल करने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। इसके अलावा युद्धक तैयारी को और सुदृढ़ करने तथा नई क्षमताओं के विकास की गति बढ़ाने के उपायों की भी समीक्षा की जाएगी।
गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और भारत अपनी नौसैनिक क्षमताओं के विस्तार पर तेज़ी से काम कर रहा है। ऑपरेशनल अनुभवों के साझाकरण और संयुक्त तैयारी को और मज़बूत बनाने की दिशा में यह सम्मेलन एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।