क्या नवाब मलिक का कहना है कि 'हिंदू-मुस्लिम नैरेटिव' अधिक समय नहीं टिकेगा?
सारांश
Key Takeaways
- हिंदू-मुस्लिम नैरेटिव का टिकना मुश्किल है।
- चुनावों में सफलता के लिए जनता से जुड़ाव जरूरी है।
- एनसीपी 97 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
- हम सभी धर्मों के उम्मीदवारों को उतार रहे हैं।
- भाजपा और शिंदे गुट के खिलाफ सीधी लड़ाई है।
मुंबई, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की एनसीपी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की 'हिंदू मराठी मेयर' टिप्पणी पर तीखा प्रहार किया है। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम नैरेटिव को अधिक समय नहीं टिकने वाला है। जो उम्मीदवार जनता से जुड़े हैं, वही चुनाव में सफल होंगे।
नवाब मलिक ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि महाराष्ट्र भाषा के आधार पर बना है और मुंबई में जन्मे सभी लोग मुंबईवासी हैं। कुछ लोग धर्म के आधार पर बंटवारा करना चाहते हैं, और कुछ लोग भाषा के नाम पर। जो हिंदू-मुस्लिम नैरेटिव बनाया जा रहा है, वह दीर्घकालिक नहीं है।
उन्होंने कहा, "जब किसी पार्टी को हार का डर होता है, तो वह धर्म का सहारा लेती है। चुनाव हिंदू-मुस्लिम मुद्दे पर नहीं हो रहा है। मुंबई के वार्ड में भिन्न परिस्थितियां हैं और चुनावी मुद्दे अलग हैं। जो उम्मीदवार जनता से जुड़े हैं, वही चुनाव जीतेंगे। हम (एनसीपी) सभी को साथ लेकर चुनाव लड़ रहे हैं। हमने सभी धर्मों के उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है।"
नवाब मलिक ने एआईएमआईएम और समाजवादी पार्टी (सपा) के बारे में कहा कि इन दलों से कोई सीधा मुकाबला नहीं है। अधिकांश सीटों पर हमारी सीधी लड़ाई भाजपा और शिंदे गुट से है। एआईएमआईएम और समाजवादी पार्टी केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित हैं। जिस विधानसभा क्षेत्र से मैंने चुनाव लड़ा था, वहां करीब 9 सीटें हैं। हमें विश्वास है कि हमारी पार्टी इन 9 सीटों में से कम से कम 3 सीटें जीतने में सफल होगी।
एनसीपी नेता ने बताया कि पार्टी बीएमसी चुनावों में 94 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और 3 सीटों पर जहां हमारे कार्यकर्ता नॉमिनेशन फाइल नहीं कर पाए, वहां हमने अधिकृत उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। कुल मिलाकर, एनसीपी 97 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। हमारा प्रचार अभियान अब शुरू हो चुका है और हमें निश्चित रूप से सफलता मिलेगी।
नवाब मलिक ने भाजपा के साथ सरकार में गठबंधन के बारे में कहा, "हम अपने विचारों के साथ सरकार में हैं। मुद्दा सरकार में रहने का नहीं, बल्कि विचारधारा का है। हमने पहले ही तय कर लिया था कि हम चुनाव अलग-अलग लड़ेंगे। दादा (अजित पवार) ने भी कहा था कि हमें अलग-अलग चुनाव लड़ना चाहिए। भाजपा हमारा विरोध कर रही थी।"
उन्होंने कहा कि हम अपनी पूरी ताकत के साथ चुनाव में उतर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि भाजपा की कई सीटों पर एनसीपी की जीत होगी। एकनाथ शिंदे के क्षेत्र में भी हमारी पार्टी विजयी होगी। हमें विश्वास है कि मुंबई शहर में 30 से अधिक सीटों पर एनसीपी को सफलता मिलेगी।