बहराइच अफीम तस्करी मामला: NCB की कार्रवाई, नेपाली महिला को 12 साल की कठोर सजा और ₹1 लाख जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की अभियोजन कार्रवाई के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश के बहराइच की तीसरी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 2017 के बहराइच अफीम जब्ती मामले में 31 वर्षीय सुनीता पुन को 12 वर्ष की कठोर सजा और ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई है। सुनीता पुन सर्लाही, नेपाल की निवासी हैं और उन्हें नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंसेस (NDPS) अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत दोषी पाया गया।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई गिरफ्तारी
3 मई 2017 को NCB लखनऊ की टीम को गोपनीय सूचना मिली कि एक संदिग्ध महिला सीमा पार कर नशीला पदार्थ तस्करी करने वाली है। इस सूचना पर टीम ने सशस्त्र सीमा बल (SSB) के साथ मिलकर बहराइच के रूपईडीहा SSB चेक पोस्ट पर निगरानी तैनात की।
तलाशी के दौरान पैदल सीमा पार कर रही सुनीता पुन को रोका गया। जाँच में पता चला कि उसने 2 किलो 502 ग्राम अफीम अपनी जाँघ में छिपाकर रखी थी। यह नशीला पदार्थ बांके, नेपाल से लाया गया था और इसे उत्तर प्रदेश के बहराइच में पहुँचाया जाना था।
अदालत में अभियोजन पक्ष की दलीलें
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने अपराध की गंभीरता, बरामद अफीम की कमर्शियल मात्रा और इसके समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को विस्तार से रखा। साथ ही अधिकतम सजा की माँग की गई।
सबूतों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की समीक्षा के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुँची कि आरोपी ने बेचने के इरादे से यह नशीला पदार्थ अपने पास रखा था और बरामद मात्रा NDPS अधिनियम के तहत 'कमर्शियल क्वांटिटी' की श्रेणी में आती है — जो इस कानून के अंतर्गत सबसे कड़ी सजा का आधार है।
सीमा पार तस्करी का व्यापक संदर्भ
यह मामला भारत-नेपाल की खुली सीमा के रास्ते होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी की गंभीरता को उजागर करता है। गौरतलब है कि यह Nवीं ऐसी घटना है जिसमें नेपाल की ओर से भारत में अफीम या उससे जुड़े पदार्थ लाने की कोशिश की गई। खुली सीमा का फायदा उठाकर तस्कर अक्सर नशीले पदार्थ शरीर पर छिपाकर लाते हैं, जिससे सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बढ़ जाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार की 'नशा-मुक्त भारत' मुहिम के तहत NCB पूरे देश में तस्करी नेटवर्क के खिलाफ सक्रियता बढ़ा रही है।
NCB का जीरो-टॉलरेंस रुख
NCB ने इस सजा को अपने जीरो-टॉलरेंस रवैये की पुष्टि बताया और स्पष्ट किया कि एजेंसी नशीले पदार्थों की तस्करी में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शने के पक्ष में नहीं है। एजेंसी ने आम नागरिकों से आग्रह किया है कि वे तस्करी से जुड़ी किसी भी जानकारी को मानस — नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1933 पर साझा करें। सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
यह फैसला इस बात का संकेत है कि सीमा पार तस्करी के मामलों में अदालतें भी कड़ा रुख अपना रही हैं — और भविष्य में ऐसे नेटवर्क को तोड़ने के लिए NCB की कार्रवाइयाँ और तेज़ होने की संभावना है।