30 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

चंडीगढ़ NCB को बड़ी जीत: 2019 के 500 किलो अफीम तस्करी केस में दो दोषियों को 11 साल की सजा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
चंडीगढ़ NCB को बड़ी जीत: 2019 के 500 किलो अफीम तस्करी केस में दो दोषियों को 11 साल की सजा

सारांश

NCB चंडीगढ़ को सात साल बाद न्याय मिला — 2019 में पकड़े गए 500 किलो अफीम पोस्ता भूसे के मामले में दो तस्करों को 11 साल की सजा। एक आरोपी अब भी फरार, 'घोषित अपराधी' घोषित। यह फैसला NCB की अंतर-राज्यीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बढ़ती कानूनी कार्रवाई का हिस्सा है।

मुख्य बातें

NCB चंडीगढ़ ने 2019 के अफीम पोस्ता भूसा तस्करी केस में होशियारपुर की स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट से सजा दिलाई।
मुजफ्फर अहमद मीर (जम्मू-कश्मीर) और चरणजीत सिंह चीमा (होशियारपुर) को 11 वर्ष की सख्त कैद और प्रत्येक पर ₹2 लाख जुर्माना।
26 जून 2019 को मुकेरियां के पास 500 किलोग्राम अफीम पोस्ता भूसा 20 बोरियों में कबाड़ के नीचे छिपाकर तस्करी की कोशिश नाकाम की गई थी।
तीसरा आरोपी शेख जमानत के बाद फरार; दिसंबर 2025 में 'घोषित अपराधी' करार, गिरफ्तारी के प्रयास जारी।
इससे पहले 26 सितंबर को फिरोजाबाद के 441 किलोग्राम गांजा केस में नौ तस्करों को 20 वर्ष तक की सजा मिली थी।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), चंडीगढ़ को 30 सितंबर 2026 को एक अहम कानूनी सफलता मिली, जब होशियारपुर की स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने 2019 के अंतर-राज्यीय अफीम पोस्ता भूसा तस्करी मामले में दो आरोपियों को दोषी करार दिया। जम्मू-कश्मीर के मुजफ्फर अहमद मीर और होशियारपुर के चरणजीत सिंह चीमा को 11 वर्ष की सख्त कैद और प्रत्येक पर ₹2 लाख का जुर्माना सुनाया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

26 जून 2019 को NCB चंडीगढ़ की एक टीम ने मुकेरियां के पास एक ट्रक को रोककर उसमें कबाड़ के नीचे 20 बोरियों में छिपाए 500 किलोग्राम अफीम पोस्ता भूसे को जब्त किया था। यह नशीला पदार्थ जम्मू-कश्मीर से पंजाब की ओर तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था।

जब्ती के तुरंत बाद मुजफ्फर अहमद मीर, चरणजीत सिंह चीमा और एक तीसरे आरोपी शेख को गिरफ्तार किया गया था। आधिकारिक बयान के अनुसार, शेख को बाद में जमानत मिल गई और वह फरार हो गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान दिसंबर 2025 में अदालत ने उसे 'घोषित अपराधी' करार दिया। NCB के अनुसार, उसे पकड़ने के हर संभव प्रयास जारी हैं।

अदालत का फैसला और सजा

पंजाब के होशियारपुर स्थित स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने दोनों दोषियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के तहत सजा सुनाई। ₹2 लाख के व्यक्तिगत जुर्माने के साथ 11 वर्ष की सख्त कैद की यह सजा इस श्रेणी के मामलों में अदालतों की कठोर रुख को दर्शाती है।

गौरतलब है कि यह मामला करीब सात वर्षों तक अदालत में चला, जो ऐसे जटिल अंतर-राज्यीय तस्करी मामलों की न्यायिक प्रक्रिया की लंबाई को रेखांकित करता है।

NCB की हालिया सफलताएँ

यह सफलता ऐसे समय में आई है जब NCB ने हाल के महीनों में कई बड़े मामलों में सजा दिलाई है। इससे पहले 26 सितंबर को एक स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में 2021 में 441 किलोग्राम गांजा जब्त होने के मामले में नौ ड्रग तस्करों को 20 वर्ष और 10 वर्ष तक की अलग-अलग सख्त सजाएँ सुनाई थीं।

उस मामले में जब्त गांजा ओडिशा के गजपति से लाया गया था और उसे उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ पहुँचाया जाना था। ट्रक के ड्राइवर केबिन में खास तौर पर बनाई गई छिपी जगह में यह नशीला पदार्थ रखा गया था। NCB ने जाँच अपने हाथ में लेकर सात और आरोपियों को गिरफ्तार किया और सजा दिलाई।

आम जनता पर असर

अफीम पोस्ता भूसे की इस मात्रा का अवैध बाज़ार में पहुँचना पंजाब और आसपास के राज्यों में नशे की गंभीर समस्या को और गहरा कर सकता था। पंजाब पहले से ही नशे की लत की समस्या से जूझ रहा है, और इस तरह की बड़ी खेपों की जब्ती और तस्करों को मिली कड़ी सजा एक निवारक संदेश देती है।

क्या होगा आगे

NCB ने स्पष्ट किया है कि फरार आरोपी शेख को पकड़ने के प्रयास जारी हैं। ब्यूरो के अनुसार, नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पेशेवर जाँच और प्रभावी अभियोजन का यह सिलसिला जारी रहेगा। NCB का कहना है कि वह नशा-मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में अपने मिशन पर अडिग है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस संदेश में है जो यह अंतर-राज्यीय तस्करी नेटवर्क को देता है — कि सात साल बाद भी कानून का शिकंजा कसता है। लेकिन एक आरोपी का जमानत पर फरार होना और फिर 'घोषित अपराधी' बनना निगरानी तंत्र की खामी उजागर करता है। पंजाब में नशे की समस्या की जड़ें आपूर्ति श्रृंखला में हैं, और NCB की बढ़ती सफलताएँ उस दिशा में सकारात्मक कदम हैं — पर असली परीक्षा यह है कि क्या फरार आरोपियों को समय रहते पकड़ा जा सकता है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NCB चंडीगढ़ के 2019 के ड्रग्स केस में क्या हुआ?
होशियारपुर की स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने 2019 में 500 किलोग्राम अफीम पोस्ता भूसे की तस्करी के मामले में दो आरोपियों — मुजफ्फर अहमद मीर और चरणजीत सिंह चीमा — को दोषी करार देते हुए 11 वर्ष की सख्त कैद और ₹2 लाख का जुर्माना सुनाया। यह जब्ती 26 जून 2019 को मुकेरियां के पास की गई थी।
इस मामले में कितना और कौन सा नशीला पदार्थ जब्त हुआ था?
NCB चंडीगढ़ की टीम ने 500 किलोग्राम अफीम पोस्ता भूसा जब्त किया था, जो एक ट्रक में कबाड़ के नीचे 20 बोरियों में छिपाकर जम्मू-कश्मीर से पंजाब ले जाया जा रहा था।
तीसरा आरोपी शेख कहाँ है और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
शेख को 2019 में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया। दिसंबर 2025 में अदालत ने उसे 'घोषित अपराधी' करार दिया है और NCB के अनुसार उसे पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
NCB ने हाल ही में और किन ड्रग मामलों में सफलता पाई है?
26 सितंबर को एक स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में 2021 में 441 किलोग्राम गांजा जब्ती के मामले में नौ तस्करों को 20 वर्ष और 10 वर्ष तक की अलग-अलग सजाएँ सुनाई थीं। वह गांजा ओडिशा के गजपति से अलीगढ़ ले जाया जा रहा था।
NDPS अधिनियम के तहत इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ की तस्करी पर क्या सजा होती है?
NDPS अधिनियम के तहत 'व्यावसायिक मात्रा' में नशीले पदार्थ की तस्करी पर न्यूनतम 10 वर्ष से अधिकतम 20 वर्ष तक की सख्त कैद और जुर्माने का प्रावधान है। इस मामले में कोर्ट ने 11 वर्ष की सजा और ₹2 लाख जुर्माना सुनाया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले