लखनऊ में NCB की बड़ी सफलता: अल्प्राजोलम तस्करी में 3 दोषियों को 10 साल की कैद, ₹1-1 लाख जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की लखनऊ जोनल यूनिट को 16 अक्टूबर 2026 को एक बड़ी न्यायिक जीत मिली, जब लखनऊ के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 500 ग्राम अल्प्राजोलम की तस्करी के मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10 वर्ष की कठोर कारावास और ₹1-1 लाख के जुर्माने की सज़ा सुनाई। दोषी ठहराए गए तीनों व्यक्ति — मोहम्मद राज, मोहम्मद शफीक और जंगली उर्फ हसीन — उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के निवासी हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह प्रकरण 16 नवंबर 2022 का है, जब NCB लखनऊ को एक विशेष खुफिया सूचना प्राप्त हुई। इस जानकारी के आधार पर अधिकारियों ने लखनऊ के बैकुंठ धाम (भैंसा कुंड) के समीप तत्काल कार्रवाई करते हुए एक बस से उतरते ही मोहम्मद राज को हिरासत में लिया। उसकी तलाशी के दौरान उसके बैग से 500 ग्राम अल्प्राजोलम — जो NDPS अधिनियम के तहत एक निर्धारित नशीला पदार्थ है — बरामद हुआ।
गौरतलब है कि अल्प्राजोलम एक शामक औषधि है जिसका दुरुपयोग नशे के रूप में किया जाता है और इसे बिना वैध अनुज्ञा के रखना या बेचना कानूनी अपराध है। व्यावसायिक मात्रा में इसकी बरामदगी NDPS अधिनियम के तहत कड़ी सज़ा का प्रावधान करती है।
तस्करी नेटवर्क का खुलासा
आगे की जाँच में NCB ने पाया कि बरामद नशीला पदार्थ मथुरा से आया था और इसे लखनऊ होते हुए बाराबंकी पहुँचाया जाना था। जाँच में यह भी स्पष्ट हुआ कि मोहम्मद शफीक इस खेप को प्राप्त करने वाला मुख्य व्यक्ति था, जबकि जंगली उर्फ हसीन की भूमिका भी इस आपूर्ति श्रृंखला में थी। इस प्रकार तीन राज्यों — मथुरा से लखनऊ होते हुए बाराबंकी तक — फैले एक संगठित तस्करी नेटवर्क की परतें खुलीं।
अदालत में अभियोजन की दलीलें
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत किए जिनसे तीनों आरोपियों की संलिप्तता निर्विवाद रूप से सिद्ध हुई। अभियोजन ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि बरामद मात्रा NDPS अधिनियम के तहत 'व्यावसायिक मात्रा' की श्रेणी में आती है, जिसके लिए अधिकतम सज़ा का प्रावधान है। सभी साक्ष्यों की समग्र समीक्षा के बाद न्यायालय ने तीनों को दोषी पाया और उन्हें 10 वर्ष की कठोर कारावास तथा प्रत्येक पर ₹1 लाख के जुर्माने की सज़ा सुनाई।
NCB की नागरिकों से अपील
इस फैसले के साथ ही NCB ने आम नागरिकों से अनुरोध किया है कि यदि उन्हें नशीले पदार्थों की तस्करी से संबंधित कोई भी जानकारी मिले, तो वे तुरंत 'मानस' नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 (टोल-फ्री) पर सूचित करें। NCB ने स्पष्ट किया कि सूचना देने वाले की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है।
यह फैसला NCB की लखनऊ जोनल यूनिट की उस कार्यशैली को रेखांकित करता है, जिसमें सूचना-संग्रह से लेकर न्यायिक परिणाम तक एक सुनियोजित अभियोजन रणनीति अपनाई जाती है। आने वाले समय में इस मामले से जुड़े अन्य कड़ियों की जाँच जारी रहने की संभावना है।