सौगत रॉय: NCERT में मुगल-सिख संघर्ष का उल्लेख सराहनीय, दोनों इतिहास के अभिन्न हिस्से
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने 30 सितंबर 2026 को कोलकाता में कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में मुगल शासन और सिख गुरुओं के बीच संघर्ष के विस्तृत उल्लेख का स्वागत करते हुए कहा कि यह एक सराहनीय कदम है। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति, इंडिया ब्लॉक की बैठक और चुनाव आयोग पर भी बेबाक टिप्पणी की।
NCERT पाठ्यक्रम पर रॉय की प्रतिक्रिया
NCERT की नई कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में एक अध्याय में मुगल शासकों और सिख गुरुओं के मध्य ऐतिहासिक संघर्ष का विस्तार से वर्णन किए जाने पर सौगत रॉय ने कहा, 'सिख गुरुओं ने मुगल शासकों के विरुद्ध साहस के साथ संघर्ष किया था और इस इतिहास को पाठ्यपुस्तकों में उचित स्थान मिलना चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि मुगल साम्राज्य भी भारत के इतिहास का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय है और सिख गुरुओं का बलिदान तथा प्रतिरोध भी उतना ही ऐतिहासिक महत्त्व रखता है। रॉय के अनुसार, इतिहास के दोनों पहलुओं को पाठ्यक्रम में समान रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) को 'सांपनाथ', बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को 'नागनाथ' और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) को 'कालिया नाग' कहे जाने पर रॉय ने इसे 'फर्जी और राजनीतिक चर्चा के लिए पौराणिक उदाहरणों का दुरुपयोग' करार दिया। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में सवाल किया कि राजनीतिक विमर्श में साँपों के रूपक का क्या औचित्य है। मौर्य के इस दावे पर कि तीनों विपक्षी दल एकजुट होकर भी चुनाव लड़ें तो हारेंगे, रॉय ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि विपक्षी गठबंधन उत्तर प्रदेश में एकजुट हुआ तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) को वहाँ नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इंडिया ब्लॉक बैठक और अखिलेश की अनुपस्थिति
इंडिया ब्लॉक की हालिया बैठक में अखिलेश यादव के शामिल न होने के बारे में रॉय ने स्पष्टीकरण दिया कि अखिलेश ने पहले ही बता दिया था कि लखनऊ में रामगोपाल यादव के नामांकन की प्रक्रिया के कारण वे उपस्थित नहीं हो पाएंगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उद्धव ठाकरे ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े। रॉय ने कहा कि कम समय में बैठक आयोजित कर आगे की रणनीति पर चर्चा करना गठबंधन की तैयारी का सकारात्मक संकेत है।
मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR विवाद
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आलोचना और उनके इस्तीफे की माँग पर रॉय ने कहा कि वह खड़गे के बयान का पूर्णतः समर्थन करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया अपनाई और इसे भाजपा का समर्थन हासिल रहा। रॉय ने आह्वान किया कि देश की लोकतांत्रिक शक्तियों को इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। गौरतलब है कि SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों में व्यापक असंतोष देखा जा रहा है।
पौराणिक कथाओं के राजनीतिक उपयोग पर सवाल
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बजरंगबली और कालनेमि की पौराणिक कथा को राजनीतिक संदर्भ में इस्तेमाल किए जाने पर रॉय ने कहा कि वे इस कथा से भलीभाँति परिचित हैं, किंतु प्राचीन पौराणिक कथाओं को आधुनिक राजनीति से जोड़ना भाजपा की एक पुरानी प्रवृत्ति है। उनके अनुसार, इन कथाओं का आज की राजनीति से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी गतिविधियाँ तेज हो रही हैं और राजनीतिक दल एक-दूसरे पर बयानबाजी की तीव्रता बढ़ा रहे हैं।