NCERT कक्षा 9 इतिहास विवाद: अधीर रंजन चौधरी बोले — मुगल-सिख इतिहास से छेड़छाड़ अस्वीकार्य
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 30 सितंबर को मुर्शिदाबाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान NCERT की कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में मुगल शासन और सिख गुरुओं के संघर्ष से जुड़े ऐतिहासिक उल्लेखों को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि पाठ्यपुस्तकों में इतिहास को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ी को भ्रामक जानकारी मिलने का खतरा है।
चौधरी का मुख्य आरोप
चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'इतिहास तो इतिहास है। हो सकता है आपको वह पसंद आए या न आए, लेकिन इतिहास अपनी जगह रहता है। अगर जानबूझकर बच्चों के दिमाग में इतिहास को अपनी जरूरत या विचारधारा के मुताबिक बैठाने की कोशिश की जाती है, तो यह इतिहास का अपमान होगा।' उनका यह बयान NCERT पाठ्यक्रम में हाल के बदलावों को लेकर जारी राष्ट्रीय बहस के बीच आया है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इतिहास किसी भी देश और समाज की पहचान का अभिन्न अंग होता है और प्रत्येक नागरिक को यह जानने का अधिकार है कि देश का अतीत वास्तव में क्या रहा है।
पाठ्यपुस्तक बदलाव पर चिंता
चौधरी ने कहा कि NCERT की किताबों में संशोधन करते समय ऐतिहासिक तथ्यों और प्रामाणिक स्रोतों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, इन्हीं पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से नई पीढ़ी देश के इतिहास को आत्मसात करती है, इसलिए इनमें किसी भी प्रकार की वैचारिक मिलावट अत्यंत हानिकारक हो सकती है।
गौरतलब है कि NCERT के पाठ्यक्रम में मुगलकालीन इतिहास और मध्यकालीन भारत से जुड़े अध्यायों में बदलाव का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से विवाद का केंद्र रहा है। आलोचकों का कहना है कि कुछ ऐतिहासिक प्रसंगों को या तो संक्षिप्त किया गया है या उन्हें पाठ्यक्रम से बाहर किया गया है।
इंडी गठबंधन और चुनावी मुद्दे
इतिहास विवाद के अलावा, चौधरी ने इंडी गठबंधन की बैठक के संदर्भ में भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों और कथित 'वोट चोरी' के आरोपों को संसद, सड़कों और अदालतों तक उठाते रहे हैं।
चौधरी ने विपक्षी दलों से एकजुट होकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवालों पर व्यापक आंदोलन खड़ा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का साझा उद्देश्य मतदान के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है।
आम जनता और शिक्षा जगत पर असर
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देशभर में स्कूली पाठ्यक्रम की समीक्षा और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर बहस तेज है। शिक्षाविदों का एक वर्ग भी मानता है कि पाठ्यपुस्तकों में ऐतिहासिक तथ्यों की निष्पक्ष प्रस्तुति छात्रों के बौद्धिक विकास के लिए अनिवार्य है।
आगे देखें तो यह मामला संसद के अगले सत्र में भी गूँज सकता है, क्योंकि विपक्षी दल NCERT पाठ्यक्रम संशोधन प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग को और तेज करने की तैयारी में हैं।