चुनाव आयोग पर सवाल लोकतंत्र को कमज़ोर करना: एनडीए नेताओं ने इंडिया ब्लॉक को घेरा, 42 पूर्व जजों के पत्र पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026 — चुनाव आयोग के बचाव में उतरते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई वरिष्ठ नेताओं ने इंडिया ब्लॉक पर कड़ा प्रहार किया है। यह प्रतिक्रिया उन 42 पूर्व न्यायाधीशों के खुले पत्र के बाद आई है, जिसमें कथित तौर पर चुनाव आयोग का समर्थन किया गया था। एनडीए नेताओं ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना सीधे तौर पर भारतीय लोकतंत्र की नींव को कमज़ोर करने का प्रयास है।
मुख्य घटनाक्रम
बिहार सरकार में मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि 42 पूर्व न्यायाधीशों का यह खुला पत्र एक बड़े षड्यंत्र की ओर संकेत करता है। उन्होंने दावा किया कि 'इंडिया ब्लॉक विदेशी इशारे पर काम कर रहा है।' कुमार ने यह भी सवाल उठाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी विदेश यात्राओं में किनसे मिलते हैं और क्या कहते हैं — जानकारी जो उन्होंने देश के लोगों से छिपी बताई।
बिहार सरकार के ही मंत्री श्रवण कुमार ने संयमित लहजे में कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर 'अमर्यादित टिप्पणी' नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग देश की बागडोर संभालने के इच्छुक हैं, उन्हें मर्यादाओं का पालन करना होगा।
भाजपा नेताओं के तर्क
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता प्रतुल शाहदेव ने चुनाव आयोग की कार्रवाई को पूरी तरह संविधानसम्मत बताया। उन्होंने कहा कि 2 करोड़ 80 लाख मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं और यह कदम पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के लिए ज़रूरी था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश के बाहर के नागरिकों को मताधिकार देना संभव नहीं है।
भाजपा नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि इंडिया ब्लॉक द्वारा चुनाव आयोग जैसी संस्था पर सवाल उठाना 'सीधे तौर पर लोकतंत्र को कमज़ोर करने जैसा' है। उन्होंने राहुल गांधी पर 'सत्ता के लिए सड़कों पर नौटंकी' का आरोप लगाया।
भाजपा नेता गुरु प्रकाश ने इसे 'सुनियोजित षड्यंत्र' करार दिया और कहा कि जैसे-जैसे भारत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, देशविरोधी ताकतें सक्रिय हो जाती हैं। उनके अनुसार विपक्ष के पास 'कोई तथ्य और तर्क नहीं' है और 'जानबूझकर अराजकता का वातावरण बनाया जा रहा है।'
भाजपा नेता संतोष पांडेय ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी अवैध नागरिकों द्वारा मतदान की संभावना का मुद्दा उठाया और कहा कि मृत मतदाताओं के नाम पर वोट डाले जाने की आशंका को समाप्त करना आवश्यक है।
42 पूर्व न्यायाधीशों का पत्र: पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब 42 पूर्व न्यायाधीशों ने कथित तौर पर एक खुला पत्र जारी किया, जिसमें चुनाव आयोग की कार्यशैली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व का समर्थन किया गया। इंडिया ब्लॉक द्वारा चुनाव आयोग पर उठाए गए सवालों के जवाब में यह पत्र एक सीधा संवैधानिक समर्थन माना जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और सत्तापक्ष के बीच मतदाता सूची की शुद्धता, चुनाव आयोग की स्वायत्तता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर तनातनी चल रही है।
आम जनता पर असर
मतदाता सूची से 2 करोड़ 80 लाख मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया और उस पर राजनीतिक विवाद का सीधा असर आगामी चुनावों में मतदाताओं के विश्वास पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बार-बार उठते सवाल चुनावी प्रक्रिया में जनसाधारण की भागीदारी को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या होगा आगे
इस राजनीतिक हलचल के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इंडिया ब्लॉक इन आरोपों का किस तरह जवाब देता है और क्या चुनाव आयोग इस विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करता है। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज़ होने की संभावना है।