एनडीए के नेतृत्व में तय होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री: कृषि मंत्री रामकृपाल यादव
सारांश
Key Takeaways
- एनडीए की बैठक में सामूहिक निर्णय लिए जाएंगे।
- नीतीश कुमार की दूरदर्शिता और प्रतिबद्धता की सराहना।
- ईशान किशन ने बिहार का नाम रोशन किया है।
- एलपीजी की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन।
- टीएमसी के विवादास्पद बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया।
पटना, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार सरकार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने मंगलवार को बताया कि एनडीए की बैठकों में सभी निर्णय एकजुट होकर लिए जाते हैं। मुख्यमंत्री कौन बनेगा और वह किस पार्टी का होगा, यह सब तय किया जाएगा। इस पर अटकलें लगाना उचित नहीं है।
उन्होंने नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन पर कहा कि नीतीश कुमार दूरदर्शिता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हैं। राज्यसभा चुनाव में अभी कुछ समय है, लेकिन उनकी समृद्धि यात्रा बिहार में जारी है, जिसमें वे लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। उन्होंने बिहार न छोड़ने का दृढ़ संकल्प लिया है। वे यहाँ के लोगों को अपना प्राण मानते हैं और उनकी सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
एलपीजी की कालाबाजारी की खबरों पर उन्होंने कहा कि यदि गैस की कालाबाजारी होती है, तो सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। कहीं पर भी आपूर्ति में कमी नहीं है और यदि कोई कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश करता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
9 मार्च को टीम इंडिया की जीत पर बात करते हुए रामकृपाल यादव ने कहा कि करोड़ों लोगों को विश्वास था कि भारत जीतेगा और वह जीत गया। यह एक बड़ी सफलता है और यह जीत हमारी धरती पर हासिल हुई। मेरी कामना है कि इसी तरह भारतीय टीम आगे भी जीतती रहे।
उन्होंने ईशान किशन की शानदार बैटिंग के बारे में कहा कि वे न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं। उन्होंने बिहार को गौरवान्वित किया है और भारत का नाम रोशन किया है। मैं उन्हें भारत और पटनावासियों की ओर से बधाई देता हूँ। जिस तरह से ईशान खेल रहे हैं, उससे उम्मीद है कि वे सचिन तेंदुलकर और गावस्कर जैसे खिलाड़ियों में शामिल होंगे।
7 मार्च को राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कल्याण बनर्जी के विवादास्पद बयान पर रामकृपाल यादव ने कहा कि टीएमसी संविधान में विश्वास नहीं करती और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ ऐसी बातें करती है। उन्होंने कहा कि उंगलियां काट देंगे और गर्दन काट देंगे, क्या लोकतंत्र में इस तरह की भाषा का उपयोग किया जा सकता है? इस बार बंगाल की जनता टीएमसी को उसकी हैसियत बता देगी।