क्या डॉक्टर एसोसिएशन ने नीट पीजी कटऑफ के फैसले के खिलाफ स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा?
सारांश
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नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री को एक पत्र भेजकर व्यक्त किया है कि वे राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड द्वारा हाल ही में घोषित नीट पीजी 2025 के लिए योग्यतम कटऑफ स्कोर में अचानक और अत्यधिक कटौती के निर्णय को लेकर चिंतित हैं।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि यह कदम मेरिट (योग्यता) आधारित चयन प्रक्रिया को कमजोर करता है। लाखों मेडिकल उम्मीदवारों की मेहनत और तैयारी को बेअसर करता है और आम जनता के बीच मेडिकल पेशे की विश्वसनीयता को खतरे में डालता है। नीट पीजी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल योग्य उम्मीदवार ही विशेषज्ञ प्रशिक्षण में प्रवेश करें।
फेडरेशन ने कहा है कि पिछले उच्च कटऑफ को प्राप्त करने के लिए उम्मीदवारों ने कई वर्षों तक मेहनत की थी, लेकिन एनबीई ने बिना किसी ठोस कारण या सलाह के इसे अचानक कम कर दिया। इससे मेरिट की भावना कमजोर होगी, टॉपर उम्मीदवारों का मनोबल गिरेगा और कम स्कोर वाले उम्मीदवारों के कारण मरीजों की देखभाल प्रभावित हो सकती है।
पत्र में आगे लिखा गया है कि यह निर्णय जनता में डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास को कम कर देगा। इसके साथ ही, यह निजी मेडिकल कॉलेजों को लाभ पहुंचाएगा क्योंकि कम स्कोर वाले उम्मीदवारों को उच्च फीस पर दाखिला दिया जाएगा। इससे संस्थानों के लाभ को छात्रों के हित पर प्राथमिकता मिलती है। पहले से ही कुछ विवादों के कारण विश्वास कमजोर है और कटऑफ में कमी से डॉक्टरों को उच्च कौशल वाले विशेषज्ञ के रूप में देखने की धारणा पर भी असर पड़ेगा। मरीजों को योग्य विशेषज्ञ मिलना चाहिए, न कि कमजोर मानकों वाले।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि सोशल मीडिया पर इस फैसले का विरोध बढ़ रहा है, जिससे इस पेशे के प्रति व्यापक संदेह और असंतोष फैल सकता है। फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन का मानना है कि पोस्टग्रेजुएट प्रशिक्षण प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता है, न कि कमजोर करने की। वे आपसे तत्काल हस्तक्षेप की अपील कर रहे हैं।
पत्र में यह मांग की गई है कि कटऑफ के फैसले को रद्द किया जाए और पूर्व निर्धारित योग्यता मानदंड को फिर से लागू किया जाए। एनएमसी, एनबीई और रेजिडेंट डॉक्टरों के प्रतिनिधियों की उच्च स्तरीय समिति बनाकर कटऑफ नीति की पारदर्शिता से समीक्षा की जाए। भविष्य में ऐसे एकतरफा निर्णयों को रोकने के लिए सभी हितधारकों की राय शामिल की जाए।