केरल में NH-66 की खामियों की जांच होगी, केंद्र को भेजी जाएगी रिपोर्ट: मंत्री पीके बशीर
सारांश
मुख्य बातें
केरल के लोक निर्माण मंत्री पीके बशीर ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को राज्य विधानसभा में घोषणा की कि केरल सरकार राष्ट्रीय राजमार्ग 66 (NH-66) के निर्माण में कथित खामियों की जांच कराएगी और उसकी रिपोर्ट केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को भेजेगी। यह बयान राजमार्ग के डिजाइन और निर्माण — विशेषतः ऊँचे तटबंधों और अंडरपास के उपयोग — को लेकर केरल के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में उठ रही आलोचनाओं के बीच आया है।
मुख्य घटनाक्रम
विधायक जी. सुधाकरन द्वारा प्रस्तुत एक प्रस्ताव के जवाब में मंत्री बशीर ने यह आश्वासन दिया। सुधाकरन ने माँग की थी कि अलाप्पुझा जिले में कलारकोड से थोट्टापल्ली स्पिलवे के उत्तरी किनारे तक के 16 किलोमीटर के खंड को एक सतत एलिवेटेड राजमार्ग में बदला जाए। साथ ही उन्होंने मौजूदा निर्माण की खामियों की समीक्षा की भी माँग की।
मंत्री बशीर ने स्पष्ट किया कि इस खंड को निरंतर एलिवेटेड राजमार्ग में बदलना इस स्तर पर व्यावहारिक रूप से कठिन होगा, क्योंकि अधिकांश निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। उनके अनुसार ऐसे किसी बदलाव के लिए स्वीकृत डिजाइन में बड़े संशोधन, व्यापक पुनर्निर्माण और अतिरिक्त व्यय आवश्यक होंगे।
केंद्र बनाम राज्य की जिम्मेदारी
बशीर ने सदन को याद दिलाया कि राष्ट्रीय राजमार्गों का स्वामित्व, नियंत्रण और विकास केंद्र सरकार के अधीन है। केरल में NH-66 की योजना, डिजाइन, निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य और केंद्र के बीच राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखने को लेकर संवाद की ज़रूरत महसूस की जा रही है। केरल जैसे उच्च जनसंख्या घनत्व वाले राज्य में मानक इंजीनियरिंग डिजाइन की सीमाएँ अधिक उजागर होती हैं।
तकनीकी एवं वित्तीय पक्ष
मंत्री ने बताया कि एलिवेटेड हाईवे, फ्लाईओवर, अंडरपास, तटबंध या रिटेनिंग स्ट्रक्चर में से किसी एक का चुनाव इंजीनियरिंग आवश्यकताओं, यातायात की स्थिति तथा तकनीकी एवं वित्तीय व्यवहार्यता पर निर्भर करता है। एलिवेटेड हाईवे में पाइल्स, पिलर और सुपरस्ट्रक्चर की आवश्यकता के कारण निर्माण लागत भी अपेक्षाकृत अधिक होती है।
स्थानीय निवासियों की चिंताएँ
विधायक सुधाकरन ने तर्क दिया कि NH-66 के डिजाइन में केरल की उच्च जनसंख्या घनत्व और मार्ग पर स्थित बड़ी संख्या में कस्बों को पर्याप्त ध्यान में नहीं रखा गया। उनके अनुसार, कुछ स्थानों पर 'दीवार' जैसी दिखने वाली ऊँची सड़कें और 'सुरंग' जैसे अंडरपास निवासियों में चिंता और असुविधा का कारण बने हैं।
आगे क्या होगा
मंत्री बशीर ने मौजूदा संरचनाओं के तत्काल पुनर्निर्माण का कोई आश्वासन नहीं दिया। प्रस्तावित जांच के निष्कर्षों को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को भेजा जाएगा, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। विश्लेषकों के अनुसार, इस रिपोर्ट का महत्व इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र NHAI को डिजाइन मानकों की समीक्षा के लिए कितनी तत्परता से प्रेरित करता है।