केरल सुप्रीम कोर्ट जाएगा राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण प्रतिबंध के खिलाफ, हजारों घर-व्यवसाय खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
केरल सरकार सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने की तैयारी में है जिसमें राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे आवासीय और वाणिज्यिक निर्माण पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। लोक निर्माण मंत्री पीके बशीर ने गुरुवार, 20 अगस्त को तिरुवनंतपुरम में यह जानकारी देते हुए कहा कि यह आदेश केरल जैसे घनी आबादी वाले और भूमि-सीमित राज्य में लागू करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मामले में अपना पक्ष सीधे सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखेगी।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या कहता है
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों की केंद्र रेखा के दोनों ओर 40 मीटर के भीतर आवासीय भवनों का निर्माण और 75 मीटर के भीतर वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, सेवा सड़कों और आसपास के क्षेत्रों के लिए भी अतिरिक्त भूमि खाली रखने की परिकल्पना की गई है।
यह आदेश उत्तर भारत में एक सड़क दुर्घटना में कई लोगों की मौत के बाद अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान लेने पर जारी किया गया था। अदालत का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों तक पहुँच को विनियमित कर सड़क सुरक्षा में सुधार लाना था।
केरल की आपत्ति और तर्क
मंत्री बशीर ने कहा, 'केरल की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए इतनी बड़ी भूमि को निर्माण के लिए खाली छोड़ना संभव नहीं है। यह व्यावहारिक नहीं है। केरल सीधे सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपनी चिंताएं रखेगा। राज्य सरकार इस मामले पर स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाएगी।'
राज्य सरकार की दलील है कि जिस दुर्घटना के संदर्भ में यह आदेश आया, उसमें वाहन सर्विस रोड के विभिन्न बिंदुओं से राष्ट्रीय राजमार्ग में प्रवेश कर सकते थे — जो जोखिम केरल में उसी रूप में मौजूद नहीं है। वर्तमान व्यवस्था के तहत, केरल में राजमार्ग पर प्रवेश और निकास पहले ही निर्दिष्ट बिंदुओं तक सीमित किए जा चुके हैं।
आम जनता और संपत्ति मालिकों पर असर
यदि आदेश में कोई बदलाव नहीं होता, तो कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक निजी मालिकों की सैकड़ों एकड़ जमीन और हजारों घर एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान प्रभावित हो सकते हैं। राज्य सरकार असामान्य रूप से उच्च जनसंख्या घनत्व और अन्य राज्यों की तुलना में भूमि की सीमित उपलब्धता को न्यायालय के समक्ष प्रमुखता से उठाने की योजना बना रही है।
गौरतलब है कि केरल भर में राष्ट्रीय राजमार्ग 66 को छह लेन का बनाने का निर्माण कार्य इस समय प्रगति पर है, जिससे यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो जाता है।
NHAI परियोजनाओं पर भी मंडराया खतरा
मंत्री ने चेतावनी दी कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा अनुशंसित कई नई परियोजनाएं भी इस आदेश से प्रभावित हो सकती हैं। केरल सर्वोच्च न्यायालय से यह तर्क देते हुए उचित राहत की माँग करेगा कि राजमार्ग सुरक्षा को एकसमान प्रतिबंध लागू किए बिना भी सुनिश्चित किया जा सकता है — बशर्ते राज्य की भौगोलिक और जनसांख्यिकीय विशेषताओं को ध्यान में रखा जाए।
यह मामला स्पष्ट करता है कि केंद्रीय स्तर पर बनाए गए एकरूप नियम हमेशा विविध भौगोलिक वास्तविकताओं वाले राज्यों पर समान रूप से लागू नहीं हो सकते — और केरल का यह कदम भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है।