दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण: एनएचएआई ने तैनात किए 60 स्प्रिंकलर, 14 एंटी-स्मॉग गन और 900 से अधिक कर्मी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 22 अक्टूबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों से पहले वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर बड़े पैमाने पर प्रदूषण-रोधी उपाय तैनात किए हैं। इस अभियान में 60 वाटर स्प्रिंकलर व टैंकर, 14 एंटी-स्मॉग गन, 23 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें और 900 से अधिक कर्मी शामिल हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर के दौरान दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर तक पहुँच जाता है।
तैनाती का विवरण
एनएचएआई के बयान के अनुसार, धूल प्रदूषण कम करने के लिए तैनात उपकरणों में 60 वाटर स्प्रिंकलर और टैंकर, 14 एंटी-स्मॉग गन, 23 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें और दो ट्रैक्टर-माउंटेड झाड़ू शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्गों के 157 किलोमीटर लंबे हिस्से पर 13 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। यह व्यापक तैनाती सड़क निर्माण और यातायात से उत्पन्न होने वाली महीन धूल के कणों (PM2.5 व PM10) को हवा में घुलने से रोकने के लिए की गई है।
एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी की समीक्षा
एनएचएआई के सदस्य (तकनीकी) आलोक दीपांकर ने प्रदूषण नियंत्रण उपायों की समीक्षा बैठक में फील्ड टीमों को सभी उपकरणों, कर्मचारियों और जल-छिड़काव की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने एंटी-स्मॉग गन के नियमित संचालन और सड़कों की दैनिक मशीन-सफाई पर विशेष ज़ोर दिया। दीपांकर ने यह भी कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन किया जाए — जिसमें निर्माण सामग्री को ढककर रखना, सड़कों को धूल मुक्त रखना और लागू ग्रेप (GRAP) चरणों के अनुसार अतिरिक्त कदम उठाना शामिल है।
जवाबदेही और निगरानी
एनएचएआई अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे गतिविधियों की रोज़ाना निगरानी करें और जियो-टैग्ड तस्वीरों के साथ प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। समीक्षा बैठक में अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-2), द्वारका एक्सप्रेसवे, डीएनडी-सोहना एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे जैसी प्रमुख परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। एनएचएआई के अनुसार, ये परियोजनाएँ दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक जाम और वाहन-जनित प्रदूषण को कम करने में सहायक हैं। ग्रीन दिल्ली ऐप और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त जन शिकायतों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया है।
हरित पहल और टिकाऊ प्रबंधन
पर्यावरण संरक्षण के अपने संकल्प के तहत एनएचएआई ने वित्त वर्ष 2025-26 में एनसीआर क्षेत्र में 9.52 लाख पौधे लगाने के लक्ष्य के सापेक्ष लगभग 9.80 लाख पौधे रोपे हैं। इन पौधों की जीवित रहने की दर 90 प्रतिशत से अधिक बताई गई है, जो सामान्यतः सरकारी वृक्षारोपण अभियानों से बेहतर है। इसके अलावा दिल्ली के लैंडफिल स्थलों से निकाली गई लगभग 13.58 लाख टन निष्क्रिय सामग्री का उपयोग UER-2 और डीएनडी-सोहना कॉरिडोर के तटबंध निर्माण में किया गया है, जिससे कचरे के टिकाऊ पुनर्उपयोग को बढ़ावा मिला है।
आगे क्या होगा
एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि वह सर्दियों के पूरे मौसम में दिल्ली-एनसीआर में धूल प्रदूषण कम करने, वायु गुणवत्ता बेहतर बनाने और यातायात को सुचारू रखने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर का वायु संकट अब केवल मौसमी नहीं रहा — सड़क निर्माण और राजमार्ग विस्तार की तेज़ रफ्तार के बीच इस तरह की स्थायी निगरानी प्रणाली की माँग बढ़ती जा रही है।