24 अक्टूबर 2026
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ग्रेटर नोएडा: वायु प्रदूषण से निपटने को 21 जोन में बँटा शहर, 224 एंटी स्मॉग गन और 107 वाटर टैंकर तैनात

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ग्रेटर नोएडा: वायु प्रदूषण से निपटने को 21 जोन में बँटा शहर, 224 एंटी स्मॉग गन और 107 वाटर टैंकर तैनात

सारांश

सर्दियों की दस्तक के साथ दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का खतरा गहराने से पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बड़ा कदम उठाया है — शहर को 21 जोन में बाँटकर 224 एंटी स्मॉग गन, 107 वाटर टैंकर और 11 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें मैदान में उतारी हैं। GRAP के तहत यह अभियान नागरिकों की भागीदारी के बिना अधूरा है।

मुख्य बातें

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 24 अक्टूबर 2026 को शहर को 21 जोन में विभाजित कर व्यापक प्रदूषण-नियंत्रण अभियान शुरू किया।
निर्माण स्थलों पर 216 और सार्वजनिक स्थलों पर 8 — कुल 224 एंटी स्मॉग गन तैनात की गई हैं।
सड़कों पर धूल नियंत्रण के लिए 107 वाटर टैंकर और सफाई के लिए 11 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें लगाई गई हैं।
अभियान GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के दिशानिर्देशों के तहत संचालित; STP से शोधित पानी का उपयोग।
शिकायत के लिए कॉल सेंटर नंबर 0120-2336046 से 0120-2336049 और मित्रा ऐप उपलब्ध।
सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर परियोजना, स्वास्थ्य और उद्यान विभाग समन्वित रूप से कार्यरत।

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की बढ़ती चुनौती के बीच ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 24 अक्टूबर 2026 को शहर को 21 जोन में विभाजित कर एक व्यापक प्रदूषण-नियंत्रण अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत 224 एंटी स्मॉग गन, 107 वाटर टैंकर और 11 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें तैनात की गई हैं। धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों की निगरानी, सड़क-सफाई और खुले में कूड़ा जलाने पर रोक इस मुहिम के मुख्य स्तंभ हैं।

जोनल व्यवस्था और अधिकारियों की जिम्मेदारी

प्राधिकरण ने समूचे शहर को 21 जोन में बाँटकर प्रत्येक जोन में एक वरिष्ठ प्रबंधक स्तर के अधिकारी को जोनल अधिकारी और एक प्रबंधक स्तर के अधिकारी को सहायक जोनल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी है। सभी वर्क सर्किल को भी जोनवार कार्य-जिम्मेदारियाँ आवंटित की गई हैं, जिससे शहर के हर हिस्से में नियमित निगरानी सुनिश्चित हो सके।

तैनात टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में धूल, गंदगी और कूड़े के ढेर की स्थिति पर नज़र रखेंगी। जहाँ भी सफाई में लापरवाही मिलेगी, वहाँ संबंधित वेंडर को तत्काल सूचना देकर कूड़ा उठवाने और सफाई कराने की कार्रवाई की जाएगी।

एंटी स्मॉग गन और वाटर टैंकरों की तैनाती

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के उप महाप्रबंधक परियोजना विजय रावल के अनुसार, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए 216 एंटी स्मॉग गन लगाई गई हैं, जबकि प्राधिकरण की अपनी 8 एंटी स्मॉग गन सार्वजनिक स्थलों पर तैनात हैं — इस प्रकार कुल 224 एंटी स्मॉग गन धूल को हवा में फैलने से रोक रही हैं।

इन व्यवस्थाओं में STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) से शोधित पानी का उपयोग किया जा रहा है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ जल-प्रबंधन भी बेहतर हो सके। सड़कों पर धूल को नियंत्रित करने के लिए 107 वाटर टैंकरों से नियमित छिड़काव हो रहा है, और पेड़ों पर जमी धूल साफ करने में भी इनका इस्तेमाल हो रहा है।

मैकेनिकल स्वीपिंग और ग्रैप दिशानिर्देश

शहर की प्रमुख सड़कों पर 11 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों के ज़रिये नियमित सफाई की जा रही है। यह अभियान ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए संचालित किया जा रहा है। प्राधिकरण का परियोजना विभाग, स्वास्थ्य विभाग और उद्यान विभाग समन्वित रूप से काम कर रहे हैं।

प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एनजी रवि कुमार ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जाएँ। महाप्रबंधक परियोजना एके सिंह और उप महाप्रबंधक विजय रावल शहर के विभिन्न क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं।

नागरिकों से अपील और शिकायत तंत्र

महाप्रबंधक एके सिंह ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं कूड़ा जलता दिखे तो तत्काल प्राधिकरण के कॉल सेंटर नंबर 0120-2336046, 0120-2336047, 0120-2336048 या 0120-2336049 पर सूचित करें। इसके अतिरिक्त मित्रा ऐप के ज़रिये भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

अधिकारियों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण में प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी अनिवार्य है। यह अभियान आने वाले दिनों में और तेज़ किए जाने की संभावना है, खासकर तब जब सर्दियों में धुंध और प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी एनसीआर में AQI नवंबर-दिसंबर में खतरनाक स्तर तक पहुँचता है। जब तक निर्माण स्थलों पर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती और जोनल अधिकारियों की जवाबदेही सार्वजनिक नहीं की जाती, तब तक संसाधनों की तैनाती महज़ एक वार्षिक रस्म बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए हैं?
प्राधिकरण ने शहर को 21 जोन में बाँटकर 224 एंटी स्मॉग गन, 107 वाटर टैंकर और 11 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें तैनात की हैं। यह अभियान GRAP दिशानिर्देशों के तहत धूल नियंत्रण, निर्माण-स्थल निगरानी और खुले में कूड़ा जलाने पर रोक के लिए चलाया जा रहा है।
ग्रेटर नोएडा में एंटी स्मॉग गन कहाँ-कहाँ लगाई गई हैं?
निर्माण स्थलों पर 216 एंटी स्मॉग गन और सार्वजनिक स्थलों पर प्राधिकरण की 8 एंटी स्मॉग गन तैनात हैं — कुल 224। इनमें STP से शोधित पानी का उपयोग किया जा रहा है।
नागरिक प्रदूषण संबंधी शिकायत कैसे दर्ज करा सकते हैं?
नागरिक प्राधिकरण के कॉल सेंटर नंबर 0120-2336046, 0120-2336047, 0120-2336048 या 0120-2336049 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा मित्रा ऐप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
21 जोन वाली व्यवस्था कैसे काम करेगी?
प्रत्येक जोन में एक वरिष्ठ प्रबंधक स्तर के अधिकारी को जोनल अधिकारी और एक प्रबंधक को सहायक जोनल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। टीमें धूल, गंदगी और कूड़े पर नज़र रखेंगी और लापरवाही मिलने पर वेंडरों को तत्काल सूचित करेंगी।
GRAP क्या है और इसका ग्रेटर नोएडा अभियान से क्या संबंध है?
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान, दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के स्तर के अनुसार क्रमबद्ध प्रतिबंधात्मक उपाय लागू करने का सरकारी ढाँचा है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का यह पूरा अभियान GRAP के नियमों के अनुपालन में चलाया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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