परमिंदर झोटा मृत्यु मामला: अकाली दल ने CM भगवंत मान से माँगा इस्तीफा, पंजाब में कानून-व्यवस्था पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने 24 अक्टूबर 2026 को नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परमिंदर झोटा की कथित संदिग्ध मृत्यु और उनके परिवार पर कथित दबाव के मद्देनज़र मुख्यमंत्री भगवंत मान से नैतिक आधार पर इस्तीफे की माँग की। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर ने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह मामला पंजाब में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का प्रमाण है।
परमिंदर झोटा मामला — मुख्य आरोप
कलेर ने आरोप लगाया कि परमिंदर झोटा ने 2023 में एक व्यक्ति के खिलाफ नशे के कारोबार को लेकर आवाज उठाई थी, जिसके बाद उन पर कई मुकदमे दर्ज किए गए। उनके अनुसार, परमिंदर के पिता ने सार्वजनिक रूप से यह बयान दिया है कि उनके परिवार पर कथित तौर पर दबाव डाला जा रहा था।
कलेर ने सवाल उठाया कि जब आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार नशे के खिलाफ अभियान चलाने का दावा करती है, तब नशे के विरुद्ध आवाज उठाने वाले व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों को कथित तौर पर संरक्षण मिल रहा है।
कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल
अकाली दल प्रवक्ता ने कहा कि सरकार के दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच गहरा अंतर है। उन्होंने कहा कि अदालत की टिप्पणियाँ भी इस मामले में गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। कलेर ने कई अन्य मामलों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि नशे की समस्या उठाने वाले लोगों के साथ कथित तौर पर पुलिस दुर्व्यवहार हुआ है। गौरतलब है कि ये सभी आरोप विपक्ष की ओर से हैं और सरकार का आधिकारिक पक्ष अलग हो सकता है।
एसआईआर विवाद पर AAP को घेरा
विशेष पहचान रजिस्टर (एसआईआर) के मुद्दे पर कलेर ने आम आदमी पार्टी पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उनके अनुसार, एसआईआर से संबंधित बैठकों में AAP के प्रतिनिधि शामिल थे और उस समय किसी आपत्ति का उल्लेख नहीं किया गया था। कलेर ने पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की भूमिका की सराहना करते हुए दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी रही। उन्होंने आरोप लगाया कि परमिंदर झोटा की मृत्यु से जुड़े सवालों से ध्यान भटकाने के लिए एसआईआर का मुद्दा उछाला जा रहा है।
घोषणापत्र और 2027 चुनाव की रणनीति
इसी बीच अकाली दल ने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों को भी तेज कर दिया है। घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ नेता बलविंदर सिंह भूंदड़ के नेतृत्व में वकीलों, सरकारी कर्मचारियों और विभिन्न वर्गों के लोगों से बातचीत जारी है।
कलेर ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) भुगतान एक बड़ा मुद्दा है और कर्मचारियों को अपनी माँगों के लिए धरने देने पड़ रहे हैं। पंजाब में उद्योगों के राज्य से बाहर जाने की चिंता को भी घोषणापत्र में जगह दी जाएगी।
गठबंधन के सवाल पर कलेर ने स्पष्ट किया कि चुनाव अकेले लड़ना है या किसी के साथ, यह निर्णय पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और कोर कमेटी की चर्चा के आधार पर होगा। उन्होंने कहा कि सीटों के बंटवारे पर अभी चर्चा करना समय से पहले होगा।
परमिंदर झोटा मामले में न्यायिक जाँच की माँग और 2027 चुनाव की रणनीति — दोनों मोर्चों पर अकाली दल के अगले कदम पर सभी की नज़र बनी रहेगी।