24 अक्टूबर 2026
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पंजाब ड्रग्स मामलों में CBI जांच का दायरा बढ़े: भाजपा के सुनील जाखड़ की माँग, ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका पर उठाए सवाल

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पंजाब ड्रग्स मामलों में CBI जांच का दायरा बढ़े: भाजपा के सुनील जाखड़ की माँग, ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका पर उठाए सवाल

सारांश

पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मनसा में दिवंगत नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा को श्रद्धांजलि देते हुए CBI से ड्रग मामलों की जांच का दायरा बढ़ाने और मनसा के ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका जांचने की माँग की। उन्होंने भगवंत मान सरकार पर पंजाब की जनता की पीड़ा के प्रति उदासीनता का आरोप भी लगाया।

मुख्य बातें

सुनील जाखड़ ने 24 अक्टूबर 2026 को मनसा में परविंदर सिंह झोटा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
जाखड़ ने CBI से पंजाब के ड्रग मामलों की जांच का दायरा बढ़ाने की माँग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि मनसा का ड्रग इंस्पेक्टर मुख्यालय में तैनात था — CBI जांच से 'रहस्य' उजागर होंगे।
जाखड़ ने भगवंत मान सरकार पर जनता की समस्याओं के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया।
नशा-विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और गैंगस्टर हिंसा को भी गंभीर चिंता बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पंजाब के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने 24 अक्टूबर 2026 को मनसा में दिवंगत नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से पंजाब में नशीली दवाओं से जुड़े मामलों की जांच का दायरा विस्तृत करने की माँग की। जाखड़ ने यह भी आग्रह किया कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मनसा में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका की विशेष रूप से पड़ताल की जाए।

ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका पर सवाल

जाखड़ ने आरोप लगाया कि मनसा में नशीली दवाओं के नियमन के लिए जिम्मेदार ड्रग इंस्पेक्टर अपने मुख्यालय में तैनात था, जबकि जिले में नशे की स्थिति बिगड़ती रही। उन्होंने कहा कि इस इंस्पेक्टर की भूमिका की CBI जांच से कई 'रहस्य' उजागर हो सकते हैं।

उनके अनुसार, यह महज प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि व्यापक नशा तंत्र के संभावित संरक्षण की ओर इशारा करता है।

झोटा परिवार को सलाम, संघर्ष जारी रखने का संकल्प

जाखड़ ने परविंदर सिंह झोटा के पिता और पत्नी की असहनीय पीड़ा के बावजूद नशामुक्ति के संघर्ष को जारी रखने की हिम्मत की सराहना की। उन्होंने कहा कि वे परिवार के साथ मज़बूती से खड़े हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रद्धांजलि का वास्तविक उद्देश्य पंजाब को नशामुक्त बनाने के संकल्प को और मज़बूत करना है। जाखड़ ने कहा कि झोटा का अभियान किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि प्रदेश को नशे के प्रकोप से बचाना था।

पंजाब में नशे की भयावह स्थिति

जाखड़ ने कहा कि पंजाब के हर गाँव में स्थिति गंभीर है — कुछ लोग नशे के कारण जान गंवा रहे हैं, कुछ नशे के खिलाफ आवाज़ उठाने के कारण मारे जा रहे हैं, और गैंगस्टर अलग-अलग स्थानों पर लोगों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशा-विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा एक 'गंभीर चिंता का विषय' बन गई है।

उन्होंने जोड़ा कि पंजाब भर के नागरिक अपने स्तर पर इस लड़ाई में जुटे हैं, लेकिन उन्हें राज्य सरकार का पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा।

भगवंत मान सरकार पर निशाना

जाखड़ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वे विधानसभा में झोटा प्रकरण उठाने के बजाय हवाई अड्डे पर जांच के लिए रोके जाने पर अफसोस जता रहे हैं। उनके अनुसार, इससे स्पष्ट होता है कि मान पंजाब की जनता की पीड़ा के प्रति उदासीन हैं।

जाखड़ ने कहा कि अगर सरकारी मंत्री लोगों की शिकायतें सुनने के लिए आगे नहीं आते, तो यह लोकतांत्रिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।

आगे क्या होगा

CBI से जांच विस्तार की माँग के साथ यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक गरमाने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशा तस्करी और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन रहे हैं। अब देखना यह होगा कि CBI इस माँग पर कोई कदम उठाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ड्रग इंस्पेक्टर की तैनाती जैसी प्रशासनिक खामियाँ केंद्र और राज्य दोनों की निगरानी विफलता को उजागर करती हैं। झोटा जैसे कार्यकर्ताओं की जान जाना बताता है कि नशा-विरोधी लड़ाई केवल जांच एजेंसियों के दायरे से नहीं, बल्कि जमीनी सुरक्षा तंत्र की भारी कमी से भी जूझ रही है। मान सरकार पर लगाए गए आरोपों की विश्वसनीयता तब तक सीमित रहेगी जब तक CBI माँग पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आती। पंजाब का नशा संकट किसी एक पार्टी की विफलता नहीं — यह दशकों की संस्थागत उदासीनता का परिणाम है, जिसे विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों को स्वीकार करना होगा।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुनील जाखड़ ने CBI से क्या माँग की है?
जाखड़ ने CBI से पंजाब में नशीली दवाओं से जुड़े मामलों की जांच का दायरा बढ़ाने और मनसा में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका की विशेष जांच करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि इस जांच से कई अहम 'रहस्य' सामने आ सकते हैं।
परविंदर सिंह झोटा कौन थे?
परविंदर सिंह झोटा पंजाब के मनसा जिले के एक नशा-विरोधी कार्यकर्ता थे, जिन्होंने नशे के खिलाफ अभियान चलाया था। इस संघर्ष के दौरान उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी।
जाखड़ ने भगवंत मान सरकार पर क्या आरोप लगाए?
जाखड़ ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान विधानसभा में झोटा प्रकरण उठाने के बजाय हवाई अड्डे पर रोके जाने का मुद्दा उठा रहे हैं, जो जनता की पीड़ा के प्रति उदासीनता दर्शाता है। उन्होंने सरकारी मंत्रियों पर जनशिकायतों से दूरी बनाने का भी आरोप लगाया।
पंजाब में नशा संकट की स्थिति कितनी गंभीर है?
जाखड़ के अनुसार, पंजाब के हर गाँव में भयावह हालात हैं — नशे से मौतें, कार्यकर्ताओं की हत्याएँ और गैंगस्टर हिंसा एक साथ चल रही हैं। नशा-विरोधी आवाज़ें उठाने वालों की सुरक्षा अब एक अलग और गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं?
जाखड़ ने आरोप लगाया कि मनसा में नशीली दवाओं के नियमन की जिम्मेदारी रखने वाला ड्रग इंस्पेक्टर मुख्यालय में तैनात था, जबकि जिले में नशे की समस्या बढ़ती रही। उनका कहना है कि इस अनियमितता की CBI जांच से नशा तंत्र के गहरे संबंध उजागर हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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