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जामिया विवाद पर अबू आजमी का पलटवार: बिना ट्रायल सालों जेल रखना न्याय नहीं

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जामिया विवाद पर अबू आजमी का पलटवार: बिना ट्रायल सालों जेल रखना न्याय नहीं

सारांश

जामिया मिलिया की दीवारों पर विवादित नारों को लेकर सियासत गरम है। सपा नेता अबू आजमी ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के आरोपों को खारिज करते हुए बिना ट्रायल वर्षों तक हिरासत को न्याय व्यवस्था की विफलता बताया और NCRB आँकड़ों से सत्ताधारी दल को घेरा।

मुख्य बातें

सपा नेता अबू आजमी ने 24 अक्टूबर 2026 को आजमगढ़ में जामिया मिलिया इस्लामिया विवाद पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के आरोपों का जवाब दिया।
आजमी ने कहा कि 5-6 साल तक बिना ट्रायल जेल में रखना न्याय नहीं; अधिकतम 2-3 साल में केस का फैसला होना चाहिए।
भीमराव आंबेडकर के संविधान का हवाला देते हुए प्रत्येक नागरिक के विरोध के अधिकार को रेखांकित किया।
NCRB के आँकड़ों का हवाला देते हुए आजमी ने कहा कि पोस्टर लगाने वाले दलों के अपने जनप्रतिनिधियों पर भी आपराधिक मामले दर्ज हैं।
परिवारवाद के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन्होंने सपा की राजनीतिक विरासत को संघर्ष की देन बताया।

समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अबू आजमी ने 24 अक्टूबर 2026 को आजमगढ़ में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की दीवारों पर लिखे विवादित नारों को लेकर उठे सियासी तूफ़ान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है।

बिना ट्रायल हिरासत पर आजमी का सवाल

आजमी ने कहा, 'अगर देश में कोई भी बड़े से बड़ा अपराधी जेल में बंद हो, तो लोग चाहेंगे कि उस पर जल्दी केस चलाया जाए और दोषी साबित होने पर उसे सजा मिले। लेकिन अगर आप केस ही नहीं चलाएंगे और लोगों को पाँच-पाँच, छह-छह साल तक बिना ट्रायल के जेल में रखेंगे, तो जनता आवाज उठाएगी ही।' उन्होंने यह भी कहा कि जमानत तो तत्काल अधिकार है और अधिकतम दो से तीन साल में केस का फैसला हो जाना चाहिए। उनके अनुसार, जब केस शुरू ही नहीं हो पा रहा हो, तो विरोध की आवाज़ उठाना अन्याय नहीं है।

संवैधानिक अधिकारों का हवाला

सपा नेता ने डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने हर नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार दिया है। उन्होंने विपक्ष की भूमिका को रेखांकित करते हुए पूछा कि विपक्ष के नेता को कैबिनेट का दर्जा और सुविधाएँ इसीलिए दी जाती हैं ताकि वे सरकार की गतिविधियों पर नज़र रखें और सवाल उठाएँ। उन्होंने कहा, 'क्या आप लोगों की आवाज़ को कुचल सकते हैं?'

मायावती और अखिलेश यादव की तुलना

आजमी ने लोकतांत्रिक परंपराओं की बात करते हुए एक तुलनात्मक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब मायावती मुख्यमंत्री थीं, तब उनके आवास के सामने से गुजरने वाली गाड़ियाँ रोक दी गई थीं और विधानसभा के सामने आंदोलन स्थल को भी बंद किया गया था। इसके विपरीत, जब अखिलेश यादव की सरकार बनी तो उन्होंने न केवल वे पाबंदियाँ हटाईं, बल्कि विधानसभा के सामने आंदोलन की जगह को और विस्तृत भी किया।

अपराध रिकॉर्ड और राजनीतिक जवाबदेही

सपा नेता ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जो दल विवादित नारों पर पोस्टर लगा रहे हैं, उनके अपने सांसदों और विधायकों पर भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनके अनुसार, NCRB के आँकड़ों के अनुसार, विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि आपराधिक मामलों में शामिल पाए गए हैं — यह तथ्य सार्वजनिक जवाबदेही की माँग को और प्रासंगिक बनाता है।

परिवारवाद के आरोपों पर पलटवार

परिवारवाद के सवाल पर आजमी ने कहा कि सपा की ताकत इसलिए है क्योंकि जनता और कार्यकर्ता स्वयं अखिलेश यादव के परिवार के सदस्यों को चुनाव लड़ते देखना चाहते हैं। उन्होंने सपा के संस्थापक की विरासत का ज़िक्र करते हुए कहा कि एक किसान परिवार का व्यक्ति, जिसने साइकिल पर चलकर और जनता से चंदा लेकर राजनीति की, यदि उसका परिवार आज देश के बड़े राजनीतिक परिवारों में गिना जाता है, तो यह संघर्ष की उपज है, किसी विरासत या धन की नहीं। यह विवाद आने वाले दिनों में और गरमाने की संभावना है, क्योंकि विधानसभा सत्र के करीब आते-आते राजनीतिक बयानबाज़ी तीखी होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली धार न्यायिक विलंब और विचाराधीन कैदियों की समस्या पर है — जो भारत की जेलों में एक पुरानी और गंभीर खामी है। NCRB आँकड़ों के अनुसार भारत की जेलों में 75% से अधिक बंदी विचाराधीन हैं, यानी बिना सज़ा के बंद। इस तथ्य को राजनीतिक बयानबाज़ी में उठाना ज़रूरी है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इसे महज़ पक्ष-विपक्ष की जुबानी जंग तक सीमित कर देती है। असल सवाल यह है कि क्या कोई भी दल — सत्ता में हो या विपक्ष में — इस संरचनात्मक समस्या के लिए ठोस विधायी हल सामने रखने को तैयार है, या यह भी सियासी स्कोर के लिए उठाया गया मुद्दा है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अबू आजमी ने जामिया विवाद पर क्या कहा?
सपा नेता अबू आजमी ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को सरकार पर सवाल उठाने का अधिकार है और बिना ट्रायल 5-6 साल तक जेल में रखना न्याय नहीं है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के आरोपों को खारिज करते हुए यह बयान आजमगढ़ में 24 अक्टूबर 2026 को दिया।
जामिया मिलिया इस्लामिया विवाद क्या है?
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की दीवारों पर विवादित नारे लिखे जाने के बाद राजनीतिक बहस छिड़ गई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके जवाब में विपक्षी नेताओं ने पलटवार किया।
अबू आजमी ने विचाराधीन कैदियों के बारे में क्या तर्क दिया?
आजमी ने कहा कि जमानत तत्काल अधिकार है और अधिकतम दो से तीन साल में केस का फैसला होना चाहिए। उनके अनुसार, जब केस वर्षों तक शुरू ही नहीं होता तो जनता का आवाज उठाना स्वाभाविक और न्यायसंगत है।
अबू आजमी ने NCRB आँकड़ों का जिक्र क्यों किया?
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आँकड़ों का हवाला देते हुए आजमी ने कहा कि जो दल जामिया विवाद पर पोस्टर लगा रहे हैं, उनके अपने सांसदों और विधायकों पर भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह तर्क उन्होंने सत्ताधारी दल की नैतिक स्थिति पर सवाल उठाने के लिए दिया।
अबू आजमी ने परिवारवाद के आरोपों का जवाब कैसे दिया?
आजमी ने कहा कि सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाने वाले गलत हैं क्योंकि जनता और कार्यकर्ता स्वयं अखिलेश यादव के परिवार को चुनाव में देखना चाहते हैं। उन्होंने सपा की विरासत को एक किसान परिवार के संघर्ष की देन बताया, न कि राजनीतिक पैसे या वंशवाद की।
राष्ट्र प्रेस
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