23 अक्टूबर 2026
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झोटा हत्याकांड: अकाली दल ने राज्यपाल से माँगी भगवंत मान की बर्खास्तगी, ₹2 करोड़ मुआवज़े की भी माँग

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झोटा हत्याकांड: अकाली दल ने राज्यपाल से माँगी भगवंत मान की बर्खास्तगी, ₹2 करोड़ मुआवज़े की भी माँग

सारांश

झोटा हत्याकांड ने पंजाब की राजनीति को एक बार फिर झकझोर दिया। शिरोमणि अकाली दल ने राज्यपाल से मुख्यमंत्री मान की बर्खास्तगी माँगी, CBI जाँच का दायरा बढ़ाने की अपील की और ₹2 करोड़ मुआवज़े की माँग रखी — नशा राजनीति गठजोड़ के आरोपों के बीच।

मुख्य बातें

शिरोमणि अकाली दल ने 23 अक्टूबर 2026 को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर CM भगवंत मान की बर्खास्तगी की माँग की।
मृतक परविंदर सिंह झोटा के परिवार को ₹2 करोड़ मुआवज़ा और उनकी विधवा को राजपत्रित प्रथम श्रेणी की नौकरी देने की अपील की गई।
CBI से माँग की गई कि वह गुलजार सिंह (तूर बंजारा, दिरबा) और बिक्रमजीत सिंह (हरगोबिंदपुर साहिब) के मामले भी अपनी जाँच में शामिल करे।
बादल ने झोटा के पिता भीम सिंह के बयान का हवाला देते हुए DGP गौरव यादव और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा पर आरोप लगाए।
अकाली दल ने आरोप लगाया कि नशीले पदार्थों के कारोबार की कथित राजनेता पुलिस सांठगांठ को शीर्ष स्तर से संरक्षण प्राप्त है।

शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने 23 अक्टूबर 2026 को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर मुख्यमंत्री भगवंत मान को तत्काल बर्खास्त करने की माँग की। यह माँग नशा विरोधी मुहिम चलाने वाले दिवंगत परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर बढ़ते राजनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में आई है। पार्टी ने मृतक के परिवार को ₹2 करोड़ का मुआवज़ा और उनकी विधवा को राजपत्रित प्रथम श्रेणी (गजटेड क्लास वन) की सरकारी नौकरी देने का भी आग्रह किया।

प्रतिनिधिमंडल की मुख्य माँगें

पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में राज्यपाल से मिले प्रतिनिधिमंडल ने उन सभी मंत्रियों, विधायकों तथा प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की, जिन पर नशीले पदार्थों के कारोबार को संरक्षण देने और तस्करों को हथियारों के लाइसेंस जारी करने के आरोप हैं। प्रतिनिधिमंडल ने एक लिखित ज्ञापन भी सौंपा।

सीबीआई जाँच का दायरा बढ़ाने की अपील

अकाली दल ने माँग की कि केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI), जो वर्तमान में झोटा हत्याकांड की जाँच कर रही है, अपने दायरे का विस्तार करे। पार्टी ने विशेष रूप से दो मामलों को इसमें जोड़ने की अपील की — पहला, दिरबा के तूर बंजारा निवासी गुलजार सिंह का प्रकरण, जिन्होंने अपने अंतिम बयान में कथित तौर पर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का नाम लिया था; और दूसरा, हरगोबिंदपुर साहिब के बिक्रमजीत सिंह का मामला, जिनकी कथित तौर पर नशा माफिया का विरोध करने पर हत्या की गई।

मुख्यमंत्री मान पर सीधा आरोप

बादल ने सीधे आरोप लगाया कि झोटा की हत्या के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने झोटा के पिता भीम सिंह के पुलिस को दिए बयान का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर पंजाब में नशा कारोबार से जुड़ी राजनेता पुलिस सांठगांठ का ज़िक्र है। बादल ने यह भी कहा कि भीम सिंह ने दावा किया है कि इस कथित सांठगांठ को शीर्ष स्तर से संरक्षण मिल रहा है। इसके साथ ही, झोटा के पिता ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उनके बेटे के विरुद्ध दर्ज झूठे मामलों के पीछे राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव का हाथ है।

परिवार की देखभाल की ज़िम्मेदारी राज्य की

बादल ने ज़ोर देकर कहा कि भले ही झोटा के पिता ने किसी निजी लाभ की माँग नहीं की, फिर भी राज्य सरकार का यह नैतिक दायित्व है कि वह इस परिवार की देखभाल करे। उन्होंने कहा कि चूँकि झोटा की पत्नी पहले से एक शिक्षिका हैं, इसलिए उन्हें पदोन्नति के रूप में राजपत्रित प्रथम श्रेणी की नौकरी दी जानी चाहिए।

राजनीतिक संदेश और आगे की राह

बादल ने कहा, "पंजाब और पंजाब के लोगों को यह समझ आ गया है कि नशीले पदार्थों की समस्या और इसे बढ़ावा देने वाले व संरक्षण देने वाले लोग राज्य के सबसे बड़े दुश्मन हैं और उनसे बहुत सख्ती से निपटा जाना चाहिए।" ज्ञापन में यह भी कहा गया कि इन कदमों से पंजाब की जनता को स्पष्ट संदेश जाएगा कि अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब राज्य में नशे की समस्या पहले से ही एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है और झोटा हत्याकांड को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी व्यावहारिक सीमाएँ स्पष्ट हैं — राज्यपाल का संवैधानिक अधिकार मुख्यमंत्री को हटाने का तब ही बनता है जब सदन में बहुमत न हो। असली सवाल यह है कि झोटा हत्याकांड में CBI जाँच का दायरा क्यों अब तक सीमित है, जबकि पिता का बयान पहले से दर्ज है। गुलजार सिंह के अंतिम बयान में वित्त मंत्री का नाम आने के बावजूद मामला आगे न बढ़ना मुख्यधारा की कवरेज में अनदेखा रहा है। पंजाब में नशा राजनीति गठजोड़ के आरोप नए नहीं हैं, लेकिन जब विपक्ष इन्हें राज्यपाल तक ले जाता है, तो यह संकेत देता है कि विधानसभा में जवाबदेही के रास्ते बंद महसूस किए जा रहे हैं।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परविंदर सिंह झोटा कौन थे और उनकी हत्या क्यों हुई?
परविंदर सिंह झोटा पंजाब में नशा विरोधी मुहिम चलाने वाले एक कार्यकर्ता थे। उनके पिता भीम सिंह के अनुसार, उन्हें कथित तौर पर नशा कारोबार से जुड़ी राजनेता पुलिस सांठगांठ का विरोध करने की वजह से निशाना बनाया गया।
शिरोमणि अकाली दल ने राज्यपाल से क्या क्या माँगें की हैं?
अकाली दल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की बर्खास्तगी, झोटा परिवार को ₹2 करोड़ मुआवज़ा, विधवा को राजपत्रित प्रथम श्रेणी की नौकरी, CBI जाँच का विस्तार तथा नशा कारोबार को संरक्षण देने वाले मंत्रियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की है।
CBI जाँच का दायरा बढ़ाने की माँग क्यों की जा रही है?
अकाली दल चाहता है कि CBI गुलजार सिंह के मामले को भी जाँच में शामिल करे, जिन्होंने अपने अंतिम बयान में कथित तौर पर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का नाम लिया था। इसके अलावा बिक्रमजीत सिंह की हत्या का मामला भी जोड़ने की माँग की गई है।
DGP गौरव यादव पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
झोटा के पिता भीम सिंह ने पुलिस को दिए बयान में कथित तौर पर कहा कि उनके बेटे के विरुद्ध दर्ज झूठे मामलों के पीछे राज्य के DGP गौरव यादव का हाथ है। यह आरोप अकाली दल द्वारा राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में शामिल किए गए हैं।
क्या राज्यपाल मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर सकते हैं?
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्यपाल किसी मुख्यमंत्री को तभी हटा सकते हैं जब वह विधानसभा में बहुमत खो दे। अकाली दल की यह माँग राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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