राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 21 राज्यों को लू से बचाव के निर्देश दिए, 2019-2023 में 3,712 मौतें दर्ज
सारांश
Key Takeaways
- NHRC ने 28 अप्रैल 2026 को 21 राज्यों और दिल्ली के मुख्य सचिवों को लू से बचाव के निर्देश जारी किए।
- NCRB के आंकड़ों के अनुसार 2019 से 2023 के बीच भारत में लू से 3,712 मौतें दर्ज की गईं।
- बाहरी कामगार, बेघर, बुजुर्ग, बच्चे और नवजात शिशु सर्वाधिक संवेदनशील वर्गों में शामिल हैं।
- राज्यों को NDMA दिशानिर्देशों या अपनी मौजूदा SOP के तहत राहत उपाय तत्काल लागू करने को कहा गया है।
- NHRC ने जिला अधिकारियों से समेकित कार्रवाई रिपोर्ट भी माँगी है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 28 अप्रैल 2026 को दिल्ली सहित 21 राज्य सरकारों को लू के बढ़ते खतरे से संवेदनशील आबादी की सुरक्षा के लिए तत्काल सक्रिय उपाय करने और राहत प्रयासों को लागू करने का निर्देश दिया है। आयोग ने मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्रों में भीषण गर्मी से जानमाल के नुकसान को रोकने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया है।
किन राज्यों को निर्देश जारी हुए
NHRC ने आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की सरकारों को पत्र भेजे हैं। संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों से कहा गया है कि वे अपनी मौजूदा मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) या राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार राहत उपायों का कार्यान्वयन तत्काल सुनिश्चित करें।
कमजोर वर्गों पर असमान असर
NHRC ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया कि लू की बढ़ती आवृत्ति, अवधि और तीव्रता से हाशिए पर रहने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग — विशेष रूप से बाहरी कामगार और बेघर लोग — असमान रूप से प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनके पास अक्सर पर्याप्त आश्रय और संसाधन नहीं होते। इसके अलावा बुजुर्ग, बच्चे, शिशु और नवजात शिशु भी अत्यधिक तापमान के लंबे समय तक संपर्क में रहने से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम का सामना करते हैं।
NCRB के आंकड़े और आजीविका का खतरा
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए NHRC ने बताया कि 2019 से 2023 के बीच पूरे भारत में लू या लू लगने से 3,712 मौतें दर्ज की गईं। आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि लू के कारण आजीविका का नुकसान हो सकता है और आग से संबंधित घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से कहीं अधिक दर्ज किया जा रहा है।
स्वतः संज्ञान और कार्रवाई रिपोर्ट
गौरतलब है कि NHRC को मानवाधिकार उल्लंघन की औपचारिक शिकायत प्राप्त किए बिना भी मीडिया रिपोर्टों, सार्वजनिक जानकारी या अन्य स्रोतों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार है। इसी अधिकार का उपयोग करते हुए आयोग ने संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों के माध्यम से जिला अधिकारियों से समेकित कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकारों से अपेक्षा है कि वे NDMA दिशानिर्देशों के तहत हीट एक्शन प्लान को सक्रिय करें, शीतल पेयजल केंद्र, छायादार आश्रय और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करें। जिला-स्तरीय कार्रवाई रिपोर्ट NHRC को सौंपी जानी है, जिससे आयोग अनुपालन की निगरानी कर सके।