8 अक्टूबर 2026
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एनएचआरसी ने जंतर-मंतर यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस, 2 हफ्ते में रिपोर्ट तलब

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एनएचआरसी ने जंतर-मंतर यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस, 2 हफ्ते में रिपोर्ट तलब

सारांश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस थमाया है। शिकायतें क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित हो चुकी हैं और आरोपित एसीपी ने खुद ड्यूटी से हटाने की माँग की — यह मामला प्रेस स्वतंत्रता और पुलिस जवाबदेही दोनों को एक साथ कठघरे में खड़ा करता है।

मुख्य बातें

एनएचआरसी ने 3 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर हुई घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया।
आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
मामले की जाँच दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित की गई है।
एसीपी विवेक भगत ने जाँच पूरी होने तक स्वेच्छा से ड्यूटी प्रभार से हटाने का अनुरोध किया।
दिल्ली सरकार ने 5 अक्टूबर के आदेश में संशोधन कर विवेक भगत का नाम अतिरिक्त प्रभार सूची से हटाया।
प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर निषेधाज्ञा के बावजूद जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 3 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों पर तीन महिला पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

मामले का मूल घटनाक्रम

आरोपों के अनुसार, 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के समय तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर कथित यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। यह प्रदर्शन निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद आयोजित किया गया था।

प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। 5 अक्टूबर को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के बाद एनएचआरसी ने यह कदम उठाया।

एनएचआरसी की टिप्पणी और नोटिस

आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला है। दिल्ली पुलिस आयुक्त को जारी नोटिस में कहा गया है कि घटना की परिस्थितियों, दर्ज शिकायतों और की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत किया जाए।

पुलिस की प्रतिक्रिया और क्राइम ब्रांच जाँच

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में स्वीकार किया कि 3 अक्टूबर को नई दिल्ली इलाके में हुए प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। नई दिल्ली जिला पुलिस को प्राप्त शिकायतें निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जाँच के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दी गई हैं।

गौरतलब है कि सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत, जिनका नाम आरोपों के संदर्भ में सामने आया, ने स्वेच्छा से अनुरोध किया कि जब तक जाँच पूरी होकर संतोषजनक निष्कर्ष न आ जाए, उन्हें अस्थायी वर्तमान ड्यूटी प्रभार से हटाया जाए।

दिल्ली सरकार का संशोधित आदेश

दिल्ली सरकार ने 5 अक्टूबर को जारी उस आदेश में संशोधन किया, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। संशोधित आदेश में विवेक भगत का नाम हटा दिया गया, जबकि शेष 11 अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार में बरकरार रखा गया।

आगे क्या होगा

एनएचआरसी की समय-सीमा के अनुसार दिल्ली पुलिस को अगले दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करना होगा। क्राइम ब्रांच की स्वतंत्र जाँच का दायरा और उसके निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब प्रेस स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा पर राष्ट्रीय बहस तेज हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विशेषकर महिलाओं, को निशाना बनाए जाने के आरोप बार-बार सामने आते हैं। एनएचआरसी का स्वत: संज्ञान इस बात का संकेत है कि संस्थागत स्तर पर भी इसे सामान्य नहीं माना जा रहा, फिर भी असली परीक्षण क्राइम ब्रांच की जाँच की निष्पक्षता और समयबद्धता होगी। आरोपित एसीपी का स्वयं ड्यूटी से हटने का अनुरोध एक असामान्य कदम है जो पारदर्शिता का संकेत देता है, लेकिन जब तक जाँच स्वतंत्र रूप से आगे बढ़कर किसी नतीजे पर नहीं पहुँचती, यह केवल प्रक्रियागत कदम ही रहेगा।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएचआरसी ने इस मामले में क्या कदम उठाया है?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 5 अक्टूबर को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों का स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट माँगी है और कहा है कि आरोप सच साबित होने पर यह मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर मामला होगा।
जंतर-मंतर पर क्या हुआ था और महिला पत्रकारों पर आरोप क्या हैं?
3 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर निषेधाज्ञा के बावजूद एक प्रदर्शन हुआ था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग की जा रही थी। हिरासत में लिए जाने के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के जवानों पर कथित यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए।
इस मामले की जाँच कौन कर रहा है?
नई दिल्ली जिला पुलिस को मिली शिकायतें निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जाँच के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित की जा चुकी हैं। इसके समानांतर एनएचआरसी ने भी दिल्ली पुलिस आयुक्त से रिपोर्ट तलब की है।
एसीपी विवेक भगत ने क्या कदम उठाया और दिल्ली सरकार ने क्या किया?
एसीपी विवेक भगत ने स्वेच्छा से अनुरोध किया कि जाँच पूरी होने और संतोषजनक निष्कर्ष आने तक उन्हें अस्थायी ड्यूटी प्रभार पर न रखा जाए। इसके बाद दिल्ली सरकार ने 5 अक्टूबर के आदेश में संशोधन कर उनका नाम अतिरिक्त प्रभार की सूची से हटा दिया, जबकि 11 अन्य अधिकारी सूची में बने रहे।
जंतर-मंतर प्रदर्शन किस माँग को लेकर था?
प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। यह प्रदर्शन निषेधाज्ञा लागू रहने के बावजूद आयोजित किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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