एनएचआरसी ने जंतर-मंतर यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस, 2 हफ्ते में रिपोर्ट तलब
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 3 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों पर तीन महिला पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
मामले का मूल घटनाक्रम
आरोपों के अनुसार, 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के समय तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर कथित यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। यह प्रदर्शन निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद आयोजित किया गया था।
प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। 5 अक्टूबर को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के बाद एनएचआरसी ने यह कदम उठाया।
एनएचआरसी की टिप्पणी और नोटिस
आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला है। दिल्ली पुलिस आयुक्त को जारी नोटिस में कहा गया है कि घटना की परिस्थितियों, दर्ज शिकायतों और की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत किया जाए।
पुलिस की प्रतिक्रिया और क्राइम ब्रांच जाँच
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में स्वीकार किया कि 3 अक्टूबर को नई दिल्ली इलाके में हुए प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। नई दिल्ली जिला पुलिस को प्राप्त शिकायतें निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जाँच के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दी गई हैं।
गौरतलब है कि सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत, जिनका नाम आरोपों के संदर्भ में सामने आया, ने स्वेच्छा से अनुरोध किया कि जब तक जाँच पूरी होकर संतोषजनक निष्कर्ष न आ जाए, उन्हें अस्थायी वर्तमान ड्यूटी प्रभार से हटाया जाए।
दिल्ली सरकार का संशोधित आदेश
दिल्ली सरकार ने 5 अक्टूबर को जारी उस आदेश में संशोधन किया, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। संशोधित आदेश में विवेक भगत का नाम हटा दिया गया, जबकि शेष 11 अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार में बरकरार रखा गया।
आगे क्या होगा
एनएचआरसी की समय-सीमा के अनुसार दिल्ली पुलिस को अगले दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करना होगा। क्राइम ब्रांच की स्वतंत्र जाँच का दायरा और उसके निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब प्रेस स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा पर राष्ट्रीय बहस तेज हो रही है।