14 अक्टूबर 2026
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दिल्ली: एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर पत्रकार रोजी समेत 6 के खिलाफ एफआईआर, जातिसूचक टिप्पणी और मानहानि के आरोप

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दिल्ली: एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर पत्रकार रोजी समेत 6 के खिलाफ एफआईआर, जातिसूचक टिप्पणी और मानहानि के आरोप

सारांश

दिल्ली पुलिस ने एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर पत्रकार रोजी समेत 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है — आरोप हैं जातिसूचक टिप्पणी, सरकारी कार्य में बाधा और सोशल मीडिया के जरिए मानहानि के। यह मामला 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान की कथित घटनाओं से जुड़ा है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर 2026 को संसद मार्ग थाने में एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की।
एफआईआर में नामित 6 लोग : पत्रकार रोजी, गजेंद्र सिंह, सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके , आशुतोष रांका , सौरव दास और रत्ना सिंह ।
आरोप: जातिसूचक टिप्पणी , सरकारी कार्य में बाधा , यौन उत्पीड़न के झूठे आरोप (कथित) और सोशल मीडिया पर मानहानिकारक सामग्री ।
एफआईआर में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और बीएनएस की धारा 221, 356(2), 3(5) लागू।
रोजी द्वारा एसीपी के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न शिकायत की जाँच दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच पहले से कर रही है।

नई दिल्ली में दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग थाने में 13 अक्टूबर 2026 को एसीपी विवेक भगत की शिकायत के आधार पर स्वतंत्र पत्रकार रोजी, गजेंद्र सिंह और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कुछ सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपियों पर जातिसूचक टिप्पणी, सार्वजनिक अपमान, सरकारी कार्य में बाधा और सोशल मीडिया के जरिए मानहानि के आरोप लगाए गए हैं। यह मामला 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान की कथित घटनाओं से जुड़ा है।

मुख्य घटनाक्रम

शिकायत के अनुसार, 3 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान एसीपी विवेक भगत कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी पर तैनात थे। शिकायत में कहा गया है कि बुटा सिंह गोलचक्कर के पास स्वतंत्र पत्रकार रोजी ने कथित तौर पर एसीपी की जाति (मेघ/मेघवाल) को लेकर अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं और उनकी एसीपी पद पर नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए।

एसीपी विवेक भगत का कहना है कि उन्होंने इन टिप्पणियों को नज़रअंदाज़ करते हुए अपनी ड्यूटी जारी रखी। इसके बाद दोपहर करीब तीन बजे प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और हिरासत में लेने की कार्रवाई के दौरान रोजी ने कथित तौर पर उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए।

शिकायत में नामित व्यक्ति

दर्ज एफआईआर में रोजी, गजेंद्र सिंह, सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह के नाम शामिल हैं। शिकायत के मुताबिक, इन लोगों ने बार-बार एसीपी का सामना किया, जिससे सरकारी कार्य के निर्वहन में बाधा उत्पन्न हुई।

सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री का आरोप

एसीपी विवेक भगत का आरोप है कि उसी शाम संसद मार्ग थाने के बाहर उनके खिलाफ नारेबाजी की गई। इसके अतिरिक्त, शिकायत में यह भी कहा गया है कि रोजी, गजेंद्र सिंह और सीजेपी से जुड़े कुछ लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' और इंस्टाग्राम पर उनके खिलाफ पोस्ट, वीडियो और रील साझा किए।

भगत का कहना है कि इन पोस्टों के कारण उन्हें मानसिक परेशानी हुई और उनकी सामाजिक तथा पेशेवर छवि को नुकसान पहुँचा।

लागू धाराएँ

शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 221, धारा 356(2) और धारा 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि एसीपी विवेक भगत ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि रोजी द्वारा उनके खिलाफ दर्ज कराई गई यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायत को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को पहले ही भेजा जा चुका है, जिसकी जाँच पहले से जारी है।

आगे क्या होगा

फिलहाल दिल्ली पुलिस मामले की आगे जाँच कर रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की पुष्टि जाँच के उपरांत ही हो सकेगी। उल्लेखनीय है कि एफआईआर में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होने मात्र से उसका दोष सिद्ध नहीं होता। यह मामला पत्रकारिता, पुलिस कार्रवाई और सोशल मीडिया के अंतरसंबंध को लेकर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पत्रकारिता और सार्वजनिक प्रदर्शन के बीच अक्सर उत्पन्न होता है। एससी/एसटी अधिनियम का प्रयोग यहाँ दोनों तरफ से विवाद का केंद्र बन सकता है — एक तरफ एसीपी का जाति-आधारित अपमान का दावा है, तो दूसरी तरफ पत्रकार के यौन उत्पीड़न के पुराने आरोप। मुख्यधारा की कवरेज प्रायः इस द्विपक्षीय जटिलता को नज़रअंदाज़ करती है। जाँच का परिणाम और अदालती प्रक्रिया ही तय करेगी कि किसका दावा तथ्यों पर टिका है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर किन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है?
दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र पत्रकार रोजी, गजेंद्र सिंह, सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर 13 अक्टूबर 2026 को संसद मार्ग थाने में दर्ज की गई।
एफआईआर में कौन-कौन से आरोप लगाए गए हैं?
आरोपियों पर जातिसूचक टिप्पणी, सार्वजनिक अपमान, सरकारी कार्य में बाधा और सोशल मीडिया के जरिए मानहानि के आरोप हैं। एफआईआर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धारा 221, 356(2) तथा 3(5) के तहत दर्ज की गई है।
यह मामला किस घटना से जुड़ा है?
यह मामला 3 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान की कथित घटनाओं से जुड़ा है। एसीपी विवेक भगत उस दिन ड्यूटी पर तैनात थे।
क्या रोजी ने भी एसीपी के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज कराई है?
हाँ, रोजी द्वारा एसीपी विवेक भगत के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न की शिकायत दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को भेजी जा चुकी है और उसकी जाँच पहले से जारी है। एसीपी ने इस शिकायत का उल्लेख अपनी एफआईआर में भी किया है।
एफआईआर दर्ज होने से क्या किसी का दोष सिद्ध हो जाता है?
नहीं, एफआईआर में नाम शामिल होने मात्र से किसी का दोष सिद्ध नहीं होता। शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की सत्यता की पुष्टि जाँच और न्यायिक प्रक्रिया के उपरांत ही होगी।
राष्ट्र प्रेस
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