26 जून 2026
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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिला सुरक्षा मंजूरी, उड़ानों की शुरुआत की ओर एक कदम और आगे

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिला सुरक्षा मंजूरी, उड़ानों की शुरुआत की ओर एक कदम और आगे

सारांश

उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिली सिक्योरिटी वेटिंग क्लीयरेंस से उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया में नया मोड़ आया है। यह एयरपोर्ट अब डीजीसीए से एयरोड्रम लाइसेंस के लिए रास्ता खोलता है, जिससे प्रदेश में आर्थिक प्रगति को बल मिलेगा।

मुख्य बातें

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को सिक्योरिटी वेटिंग क्लीयरेंस मिला है।
उड़ानों की शुरुआत के लिए डीजीसीए से एयरोड्रम लाइसेंस आवश्यक है।
इस एयरपोर्ट का विकास उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति में सहायक होगा।
यह एयरपोर्ट एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में से एक बनने की दिशा में अग्रसर है।
यह क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।

लखनऊ, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) प्रोजेक्ट को एक बड़ी सफलता मिली है। एयरपोर्ट को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी द्वारा सिक्योरिटी वेटिंग क्लीयरेंस प्रदान किया गया है। यह प्रक्रिया सुरक्षा व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा के बाद संपन्न होती है।

इस मंजूरी के साथ, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) से एयरोड्रम लाइसेंस प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिसके बाद यहाँ से उड़ान संचालन आरंभ किया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य जेवर एयरपोर्ट को देश के सबसे आधुनिक और विशाल एयरपोर्ट्स में शामिल करना है, जो उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यीडा) के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन आरंभ करने से पूर्व सुरक्षा मानकों की जांच आवश्यक होती है। इसके लिए बीसीएएस की टीम एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली, पहुँच नियंत्रण, यात्रियों और कार्गो की जांच व्यवस्था सहित कई महत्वपूर्ण पहलुओं का निरीक्षण करती है। सभी मानकों के अनुरूप होने पर ही सिक्योरिटी वेटिंग क्लीयरेंस प्रदान किया जाता है।

सिक्योरिटी वेटिंग अप्रूवल का अर्थ है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था उड़ान संचालन के लिए सुरक्षित मानी गई है। इसके पश्चात ही उड़ानों की शुरूआत की अंतिम प्रक्रिया आगे बढ़ती है। सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद अगला चरण डीजीसीए द्वारा एयरोड्रम लाइसेंस जारी करना होता है। यह लाइसेंस मिलने पर ही किसी भी एयरपोर्ट से व्यावसायिक उड़ानों का संचालन संभव हो पाता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने जेवर एयरपोर्ट को राज्य के सबसे महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया है। यह एयरपोर्ट न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए एक महत्वपूर्ण एविएशन हब के रूप में उभर रहा है। सरकार का मानना है कि इसके आरंभ होने से प्रदेश में निवेश, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य जल्द से जल्द नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन कर उसे कार्यात्मक बनाना है। इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कई चरणों में विकसित किया जा रहा है। पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद यह न केवल देश में बल्कि एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट में शामिल हो जाएगा। इसकी क्षमता प्रतिवर्ष करोड़ों यात्रियों को संभालने की होगी और यह उत्तर प्रदेश को वैश्विक एविएशन नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का स्थान कहाँ है?
यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के जेवर में स्थित है।
सिक्योरिटी वेटिंग क्लीयरेंस का क्या अर्थ है?
यह एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्थाओं को उड़ान संचालन के लिए सुरक्षित मानने का प्रमाण है।
उड़ान संचालन शुरू होने के लिए क्या आवश्यक है?
उड़ान संचालन शुरू करने के लिए डीजीसीए द्वारा एयरोड्रम लाइसेंस की आवश्यकता होती है।
इस एयरपोर्ट का विकास कब पूरा होगा?
यह एयरपोर्ट कई चरणों में विकसित किया जा रहा है और पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद यह एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट में शामिल होगा।
यह एयरपोर्ट किस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है?
यह एयरपोर्ट न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए एक महत्वपूर्ण हब के रूप में उभरेगा।
राष्ट्र प्रेस
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