नोएडा: आइवरी काउंटी सोसाइटी में टावर से गिरकर मजदूर जावेद की मौत, निर्माण सुरक्षा पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा के सेक्टर-115 स्थित ग्राम सोरखा में निर्माणाधीन आइवरी काउंटी सोसाइटी में काम के दौरान एक श्रमिक की टावर से गिरकर मौत हो गई। मृतक की पहचान जावेद (पुत्र अमीरू हक, आयु लगभग 25 वर्ष) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के मौलानी क्षेत्र के निवासी थे। यह घटना 22 और 23 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि के दौरान हुई, जिसने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटनाक्रम
22-23 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि को थाना सेक्टर-113 पर डायल-112 के माध्यम से सूचना मिली कि आइवरी काउंटी सोसाइटी में एक श्रमिक टावर से नीचे गिर गया है। गंभीर रूप से घायल जावेद को तत्काल चिकित्सा सहायता पहुँचाई गई, परंतु उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। जावेद उस सोसाइटी में फोरमैन और लेबर इंचार्ज के रूप में काम करते थे।
सूचना मिलते ही थाना सेक्टर-113 पुलिस की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुँची। पुलिस ने मौके का जायजा लिया और शव का पंचायतनामा भरने की कार्रवाई पूरी की। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, मौत के संबंध में चिकित्सकीय जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आएगी। फिलहाल थाना सेक्टर-113 की ओर से आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में जो भी आवश्यक कानूनी कदम उठाने होंगे, वे उठाए जाएंगे।
निर्माण स्थलों पर सुरक्षा का सवाल
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब गौतमबुद्ध नगर में तेज़ी से पनपते रियल एस्टेट क्षेत्र में श्रमिक सुरक्षा मानकों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ऊँचाई पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए हार्नेस, सेफ्टी नेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अनिवार्य माना जाता है, परंतु अनेक निर्माण स्थलों पर इनके अनुपालन की स्थिति कमज़ोर बताई जाती है।
गौरतलब है कि निर्माण उद्योग भारत में श्रमिक मृत्यु दर के मामले में सर्वाधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, निर्माण स्थलों पर नियमित सुरक्षा ऑडिट, श्रमिकों को प्रशिक्षण और ठेकेदारों की जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
आगे क्या
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु के सटीक कारणों की जानकारी मिलेगी। पुलिस यह भी जाँच करेगी कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का उचित पालन हो रहा था या नहीं। इस दुखद घटना ने स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग के सामने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी और बढ़ा दी है कि निर्माणाधीन परियोजनाओं में कार्यरत श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए।