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उत्तरी सीमाओं के गांवों को जोड़ने के लिए स्वीकृत १,०८५ किमी लंबी रणनीतिक सड़कें

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उत्तरी सीमाओं के गांवों को जोड़ने के लिए स्वीकृत १,०८५ किमी लंबी रणनीतिक सड़कें

सारांश

राज्यसभा में उत्तरी सीमाओं के गांवों के लिए १,०८५ किमी लंबी रणनीतिक सड़कों की स्वीकृति दी गई। यह सड़कों का निर्माण कई दूरदराज क्षेत्रों को जोड़ेगा। जानें इस महत्वपूर्ण योजना के बारे में।

मुख्य बातें

१,०८५ किलोमीटर लंबी रणनीतिक सड़कें उत्तरी सीमाओं के गांवों को जोड़ेंगी।
इससे १३६ दूरदराज बस्तियों को सड़क संपर्क मिलेगा।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ८,४९,३२० किलोमीटर सड़कों की स्वीकृति।
अब तक ९३ प्रतिशत सड़कें पूरी हो चुकी हैं।
सड़क निर्माण में हरित तकनीक का उपयोग।

नई दिल्ली, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा में बुधवार को सत्तारूढ़ पक्ष ने जानकारी दी कि देश की उत्तरी सीमाओं के गांवों को जोड़ने हेतु रणनीतिक सड़कों के निर्माण को मंजूरी प्रदान की गई है। इस योजना के तहत १,०८५ किलोमीटर लंबी सड़कों से कई दूरदराज क्षेत्रों को जोड़ा गया है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से ८,४९,३२० किलोमीटर सड़कों के निर्माण की स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें से ९३ प्रतिशत, अर्थात् लगभग ७,९१,२७० किलोमीटर सड़कें पूरी हो चुकी हैं। साथ ही, १०,४५२ पुलों का भी निर्माण किया गया है।

भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल सुखदेवराव बोंडे ने ग्रामीण विकास मंत्रालय की गतिविधियों पर चर्चा के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि २०१४ के बाद ग्राम विकास में किस प्रकार का व्यापक परिवर्तन आया है।

डॉ. बोंडे ने कहा कि यदि हम २०१४ से पहले की स्थिति पर नज़र डालें, तो गांवों में अनेक मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। पक्के रास्ते, पीने के लिए शुद्ध पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।

उन्होंने कहा कि पहले किसानों को पर्याप्त सहायता नहीं मिलती थी। २०१४ के बाद ग्रामीण विकास में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है।

डॉ. बोंडे ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। अब तक ८,४९,३२० किलोमीटर सड़कों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जिसमें से लगभग ९३ प्रतिशत सड़कें पूरी हो चुकी हैं।

गांवों में सबसे बड़ी समस्या आवागमन की थी। कई बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते थे क्योंकि दूसरे गांव में स्कूल होते थे और रास्ते बंद हो जाते थे।

बरसात के दिनों में गांव इतने अलग-थलग पड़ जाते थे कि अगर किसी को इलाज के लिए जाना हो तो भी बाहर निकलना संभव नहीं होता था। इसी समस्या को देखते हुए नदियों और दुर्गम क्षेत्रों में पुलों का निर्माण आवश्यक था।

१०,४५२ पुलों का निर्माण किया जा चुका है। इसके साथ ही पीएम जनमन योजना के अंतर्गत विशेष रूप से पीवीटीजी (अत्यंत कमजोर जनजातीय समूह) के बस्तियों को जोड़ा गया है। इस योजना के अंतर्गत ७,३२४ किलोमीटर सड़कों को मंजूरी दी गई और २,९१० बस्तियों को जोड़ा गया।

इसी प्रकार वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत सीमावर्ती क्षेत्रों के गांवों के विकास पर ध्यान दिया गया है। इसी सोच के साथ उत्तरी सीमाओं के गांवों को जोड़ने के लिए १,०८५ किलोमीटर लंबी रणनीतिक सड़कों को स्वीकृति दी गई है, जिससे १३६ दूरदराज बस्तियों को सड़क संपर्क से जोड़ा गया है। सड़क निर्माण में हरित तकनीक का भी उपयोग किया गया है, जिसके माध्यम से लगभग १.३१ लाख किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करेगा। यह योजना न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगी, बल्कि वहां की बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार लाएगी।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तरी सीमाओं के गांवों के लिए सड़कों का निर्माण कब शुरू होगा?
सड़कों का निर्माण जल्द ही शुरू किया जाएगा, जिसकी योजना राज्यसभा में स्वीकृत हो चुकी है।
इस योजना से कितने गांवों को लाभ होगा?
इस योजना के तहत १३६ दूरदराज गांवों को सड़क संपर्क से जोड़ा जाएगा।
क्या यह सड़कें हरित तकनीक का उपयोग करेंगी?
हाँ, सड़क निर्माण में हरित तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का क्या महत्व है?
यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण है।
कितने पुलों का निर्माण किया गया है?
अब तक १०,४५२ पुलों का निर्माण किया जा चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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