क्या ओएनजीसी ने आंध्र प्रदेश के कुएं में रिसाव को नियंत्रित करने की योजना को अंतिम रूप दिया?
सारांश
Key Takeaways
- ओएनजीसी ने मोरी-5 कुएं में रिसाव को नियंत्रित करने के लिए योजना बनाई।
- मुख्यमंत्री ने स्थिति की समीक्षा की और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने का आदेश दिया।
- सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण मानकों का पालन किया जा रहा है।
- स्थानीय प्रशासन और ओएनजीसी के बीच समन्वय आवश्यक है।
- रिसाव के कारण पर्यावरणीय प्रभाव की निगरानी की जा रही है।
अमरावती, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तेल और प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी) ने मंगलवार को घोषणा की है कि आंध्र प्रदेश के डॉ. बीआर अंबेडकर कोनासीमा जिले में स्थित मोरी-5 कुएं में रिसाव को नियंत्रित करने के लिए एक विस्तृत योजना को अंतिम रूप दिया गया है।
दिल्ली से निदेशक (प्रौद्योगिकी एवं फील्ड सर्विसेज) विक्रम सक्सेना सहित ओएनजीसी के वरिष्ठ प्रबंधन और संकट प्रबंधन दल (सीएमटी) के विशेषज्ञों ने मलकीपुरम मंडल के इरुसुमंदा गांव में स्थित कुएं का संचालन नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है।
ओएनजीसी ने एक बयान में कहा, "उच्च क्षमता वाले अग्निशामक पंप की तैनाती को सुविधाजनक बनाने के लिए पास के सिंचाई स्रोत से एक अस्थायी नहर बनाने के लिए खुदाई का काम पूरा हो चुका है। अग्निशामक पंप कुएं पर पहुंच चुके हैं और उन्हें लगाने का कार्य जारी है। रिसाव को नियंत्रित करने की एक व्यापक योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है।"
सरकारी तेल और गैस कंपनी ने बताया कि आग की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आ रही है।
कंपनी ने कहा कि 600 मीटर के दायरे में पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए वायु गुणवत्ता, ध्वनि स्तर और आसपास के जल निकायों की लगातार निगरानी की जा रही है।
ओएनजीसी पारदर्शिता और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए जिला और पुलिस प्रशासन, स्थानीय अधिकारियों और मीडिया सहित सभी हितधारकों के साथ निरंतर संपर्क में है। कंपनी ने कहा कि सभी कार्य उच्चतम सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण मानकों के साथ किए जा रहे हैं।
इस बीच, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती में एक उच्च स्तरीय बैठक में स्थिति की समीक्षा की।
अधिकारियों ने उन्हें सोमवार की घटना के बाद की स्थिति से अवगत कराया। गृह मंत्री वी. अनीता, मुख्य सचिव के. विजयानंद और अन्य अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को रिसाव को रोकने और लोगों की सुरक्षा के लिए विभिन्न विभागों द्वारा उठाए जा रहे उपायों के बारे में बताया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसी घटनाओं से लोगों में दहशत फैलती है, इसलिए उन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी दी जानी चाहिए और आवश्यक सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि जिन लोगों ने अपने घर और गांव छोड़े हैं, उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। उन्होंने आग में अपने नारियल के पेड़ खोने वाले किसानों को मुआवजा देने का आदेश दिया।