30 सितंबर 2026
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'ऑपरेशन दृष्टि' में 446 सर्जरी, LG मनोज सिन्हा बोले — सेना के साहस और संकल्प का प्रतीक

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'ऑपरेशन दृष्टि' में 446 सर्जरी, LG मनोज सिन्हा बोले — सेना के साहस और संकल्प का प्रतीक

सारांश

'ऑपरेशन दृष्टि' सिर्फ नेत्र शिविर नहीं — यह उन इलाकों तक पहुँचने की जिद है जहाँ गोलाबारी के बीच भी डॉक्टरों ने भूमिगत ऑपरेशन थिएटर में 446 सर्जरियाँ कीं और 1.5 लाख लोगों की जाँच हुई। LG सिन्हा का संदेश साफ है — सेना का काम बंदूक तक सीमित नहीं।

मुख्य बातें

LG मनोज सिन्हा ने 30 सितंबर 2026 को बादामी बाग छावनी, श्रीनगर में 'ऑपरेशन दृष्टि' के 11वें मेगा मोतियाबिंद शिविर के समापन समारोह को संबोधित किया।
इस पहल के तहत कुल 446 मोतियाबिंद सर्जरियाँ की गईं, जिनमें सीमावर्ती तंगधार, कुपवाड़ा में की गई सर्जरियाँ भी शामिल हैं।
1.5 लाख से अधिक लोगों की आँखों की जाँच की गई; दुर्गम इलाकों में उपकरण हवाई मार्ग से पहुँचाए गए।
ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा की अगुवाई में मेडिकल टीम ने भूमिगत ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी करने की चुनौती स्वीकार की।
एलजी ने PM मोदी , रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख का आभार जताया।

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को श्रीनगर के बादामी बाग छावनी स्थित चिनार ऑडिटोरियम में कहा कि 'ऑपरेशन दृष्टि' महज एक चिकित्सा शिविर नहीं, बल्कि दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए भारतीय सेना की सेवा, साहस और अटल प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है। यह अवसर था 'आप दृष्टि' के अंतर्गत आयोजित 11वें मेगा मोतियाबिंद सर्जरी शिविर के दूसरे चरण के समापन समारोह का।

मुख्य घटनाक्रम

इस पहल के तहत कुल 446 मोतियाबिंद सर्जरी की गईं, जिनमें कुपवाड़ा जिले के तंगधार में संचालित शिविर की सर्जरियाँ भी शामिल हैं। तंगधार एक संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है जहाँ गोलाबारी का खतरा बना रहता है और सड़क संपर्क अत्यंत कठिन है।

एलजी सिन्हा ने बताया कि इस पूरी पहल के तहत 1.5 लाख से अधिक लोगों की आँखों की जाँच की गई और दुर्गम इलाकों तक नेत्र परीक्षण सुविधाएँ पहुँचाई गईं।

तंगधार में भूमिगत ऑपरेशन थिएटर की चुनौती

ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा और उनकी टीम ने तंगधार में जमीन के नीचे बने ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी करने की असाधारण चुनौती स्वीकार की। एलजी ने बताया कि यह 10वाँ कैंप था और अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण सबसे अनूठा — वहाँ उपकरण और सामग्री हवाई मार्ग से पहुँचाई गई, और आसपास के गाँवों के लोग सेना की सहायता से शिविर तक पहुँचकर इलाज करा सके।

उन्होंने कहा, "जिन लोगों ने पहाड़ी इलाकों को देखा है, वे जानते हैं कि वहाँ हालात कितने मुश्किल होते हैं — सड़कों की चुनौतियाँ हैं और गोलाबारी का भी खतरा रहता है।"

सरकार की प्रतिक्रिया और आभार

एलजी सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सेना प्रमुख तथा शिविर से जुड़ी समस्त मेडिकल टीमों का भी धन्यवाद किया।

सिन्हा ने कहा, "सेना ने न सिर्फ इलाज मुहैया कराया, बल्कि मुश्किल इलाकों में रहने वाले लोगों को अपनापन और सहयोग भी दिया। सेना अपना काम पूरा करके वापस नहीं लौटी है; उसने लोगों के साथ खड़े रहने का संदेश दिया है।"

आम जनता पर असर

एलजी ने रेखांकित किया कि सीमावर्ती इलाकों के कई निवासियों के लिए यह पहली बार था जब उन्हें इस स्तर की विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिली। उन्होंने कहा, "यह पहल इस बात का उदाहरण है कि कैसे स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों की जिंदगी बदल सकती हैं।"

गौरतलब है कि यह अभियान मरीजों, सैन्य अधिकारियों और विशेषज्ञ डॉक्टरों को एकमंच पर लाकर उन नागरिकों को आधुनिक इलाज सुलभ कराता है जिनके लिए साधारण परिस्थितियों में शहरी अस्पतालों तक पहुँचना कठिन होता है।

सेना समाज संबंध को नई मजबूती

एलजी ने जोर देकर कहा कि इस अभियान ने भारतीय सेना और जम्मू कश्मीर के स्थानीय समुदायों के बीच विश्वास और रिश्ते को और मजबूत किया है। उनके अनुसार, "भारतीय सेना जरूरत के समय हमेशा देश और जम्मू कश्मीर के नागरिकों के साथ खड़ी रही है।" यह पहल उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत सुरक्षा बलों को आम नागरिकों के करीब लाने की कोशिश की जा रही है, खासकर उन इलाकों में जो दशकों तक संघर्ष की छाया में रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सेवा के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है — और यह दृष्टिकोण राजनीतिक रूप से भी महत्त्वपूर्ण है। तंगधार जैसे सक्रिय सीमावर्ती क्षेत्र में भूमिगत ओटी में सर्जरी करना निस्संदेह उल्लेखनीय है, परंतु यह सवाल भी उठता है कि स्थायी नागरिक स्वास्थ्य ढाँचा इन क्षेत्रों तक क्यों नहीं पहुँच पाया। जब तक सीमावर्ती इलाकों में नियमित अस्पताल और सड़क संपर्क नहीं बनता, तब तक ये शिविर ज़रूरी राहत तो देते हैं, पर दीर्घकालिक समाधान नहीं।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑपरेशन दृष्टि' क्या है?
'ऑपरेशन दृष्टि' भारतीय सेना की एक नेत्र चिकित्सा पहल है जो जम्मू कश्मीर के दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में मोतियाबिंद सर्जरी तथा नेत्र जाँच की सुविधा उपलब्ध कराती है। इसके 11वें मेगा शिविर में 446 सर्जरियाँ की गईं और 1.5 लाख से अधिक लोगों की आँखें जाँची गईं।
तंगधार में मेडिकल कैंप क्यों खास था?
तंगधार कुपवाड़ा जिले का एक संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है जहाँ सड़क संपर्क कठिन है और गोलाबारी का खतरा रहता है। यहाँ ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा की टीम ने जमीन के नीचे बने ऑपरेशन थिएटर में सर्जरियाँ कीं और उपकरण हवाई मार्ग से पहुँचाए गए।
इस पहल से कितने लोगों को लाभ मिला?
इस पहल के तहत 1.5 लाख से अधिक लोगों की आँखों की जाँच की गई और 446 मोतियाबिंद सर्जरियाँ की गईं। सीमावर्ती इलाकों के कई निवासियों के लिए यह पहली बार था जब उन्हें इस स्तर की विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिली।
LG मनोज सिन्हा ने किसे धन्यवाद दिया?
एलजी सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख का आभार व्यक्त किया। उन्होंने ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा सहित समस्त मेडिकल और सपोर्ट टीमों की सराहना की।
'आप दृष्टि' और 'ऑपरेशन दृष्टि' में क्या संबंध है?
'ऑपरेशन दृष्टि' (ऑप दृष्टि) 'आप दृष्टि' पहल के अंतर्गत संचालित मेगा मोतियाबिंद सर्जरी शिविरों की श्रृंखला है। 30 सितंबर 2026 को समाप्त हुआ शिविर इस श्रृंखला का 11वाँ और दूसरे चरण का समापन शिविर था।
राष्ट्र प्रेस
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