ऑपरेशन दृष्टि: रांची के मिलिटरी हॉस्पिटल में 200+ मरीजों के लिए निशुल्क उन्नत नेत्र शल्य शिविर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की संयुक्त विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सा टीम ने 15 जून 2025 को मिलिटरी हॉस्पिटल नामकुम, रांची में ऑपरेशन दृष्टि के अंतर्गत एक मेगा उन्नत सर्जिकल नेत्र शिविर का शुभारंभ किया। 15 से 19 जून तक चलने वाले इस शिविर का लक्ष्य 200 से अधिक लाभार्थियों की दृष्टि निशुल्क उन्नत शल्य प्रक्रियाओं के माध्यम से बहाल करना है।
शिविर में की जाने वाली प्रमुख प्रक्रियाएँ
आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), नई दिल्ली के नेत्र विभाग के प्रमुख ब्रिगेडियर डॉ. संजय कुमार मिश्रा की अगुवाई में विशेषज्ञ सर्जिकल टीम तीन प्रकार की जटिल प्रक्रियाएँ संपन्न कर रही है। इनमें फेकोएमल्सिफिकेशन विधि से मोतियाबिंद सर्जरी, मिनिमली इनवेसिव ग्लॉकोमा सर्जरी (MIGS) तथा विट्रियो-रेटिनल रोगों के लिए एंटी-वीईजीएफ इंट्राविट्रियल इंजेक्शन शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि इन विश्वस्तरीय चिकित्सा उपकरणों को भारतीय वायुसेना के सेवा विमानों द्वारा रांची तक एयरलिफ्ट किया गया, जिससे यह सुनिश्चित हो सका कि दूरस्थ क्षेत्र में भी अत्याधुनिक शल्य सुविधाएँ उपलब्ध हों।
लाभार्थी कौन हैं
इस शिविर में पूर्व सैनिकों, सेवारत सैनिकों के आश्रितों और वंचित नागरिकों की व्यापक स्क्रीनिंग जारी है। अधिकारियों के अनुसार, शिविर के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के लाभान्वित होने की उम्मीद है।
वरिष्ठ अधिकारी का संदेश
डायरेक्टर जनरल आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज वाइस एडमिरल आरती सरीन ने इस मानवीय अभियान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह मिशन सेना की दोहरी पहचान को प्रमाणित करता है — देश की सीमाओं के निष्ठावान रक्षक और सामाजिक लचीलेपन के दयालु निर्माता।
ऑपरेशन दृष्टि की व्यापक पहुँच
रांची से पहले, ऑपरेशन दृष्टि के तहत देशभर में आठ उन्नत सर्जिकल नेत्र शिविर सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें लेह-लद्दाख, लक्षद्वीप, भुज, कच्छ और बागडोगरा जैसे दूरस्थ और कम-सेवित क्षेत्र शामिल हैं। यह पहल उन्नत नेत्र विशेषज्ञता को मानवीय सेवा से जोड़ने का एक सुनियोजित प्रयास है, जो सशस्त्र बलों की सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आगे की राह
शिविर 19 जून तक जारी रहेगा। इस अभियान की सफलता यह संकेत देती है कि भविष्य में भी ऐसे शिविर अन्य वंचित क्षेत्रों में आयोजित किए जा सकते हैं, जहाँ विशेषज्ञ नेत्र सेवाएँ अभी तक सुलभ नहीं हैं।