30 सितंबर 2026
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ऑपरेशन दृष्टि: कश्मीर में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा ने 364 नेत्र सर्जरी कीं, 6,000 मरीजों की जांच

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ऑपरेशन दृष्टि: कश्मीर में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा ने 364 नेत्र सर्जरी कीं, 6,000 मरीजों की जांच

सारांश

सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा ने ऑपरेशन दृष्टि के तहत कश्मीर में 6,000 मरीजों की स्क्रीनिंग और 364 नेत्र सर्जरी कर एक नई मिसाल कायम की — एलओसी के पास भूमिगत ऑपरेशन थिएटर में पहली बार इतना बड़ा शिविर आयोजित हुआ। अगला पड़ाव ओडिशा है।

मुख्य बातें

सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा ने 30 सितंबर को ऑपरेशन दृष्टि का 11वाँ नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर श्रीनगर में संपन्न किया।
ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा के नेतृत्व में तंगधार और श्रीनगर में कुल 364 नेत्र सर्जरी पूरी की गईं।
शिविरों से पहले 18 स्क्रीनिंग शिविरों में करीब 6,000 लोगों की जांच की गई; लगभग 500 को सर्जरी की आवश्यकता पाई गई।
तंगधार में 24-25 सितंबर को एलओसी के पास भूमिगत ऑपरेशन थिएटर में 220 सर्जरी — अपनी तरह का पहला बड़ा शिविर।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह समापन समारोह में उपस्थित रहे।
ऑपरेशन दृष्टि का अगला चरण ओडिशा में आयोजित किया जाएगा।

सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा ने 30 सितंबर को श्रीनगर स्थित 92 बेस अस्पताल में ऑपरेशन दृष्टि का 11वाँ विशाल नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर सफलतापूर्वक संपन्न किया, जिससे इस पहल का कश्मीर चरण पूरा हो गया। तंगधार और श्रीनगर में आयोजित दो बड़े शिविरों में ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा के नेतृत्व में सैन्य अस्पताल (रिसर्च एंड रेफरल) की शल्य चिकित्सा टीम ने कुल 364 नेत्र सर्जरी पूरी कीं, जिनमें मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, टेरिजियम और रेटिना से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल थीं।

स्क्रीनिंग और चयन प्रक्रिया

शिविरों से कुछ सप्ताह पहले 92 बेस अस्पताल और 328 फील्ड अस्पताल की टीमों ने कश्मीर घाटी के दूर-दराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में 18 स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किए। इनमें तंगधार, दावर, माछिल, उरी, बारामूला, बांदीपोरा, खानाबल और कंगन जैसे इलाके शामिल रहे। इन शिविरों में करीब 6,000 लोगों की आंखों की जांच की गई, जिनमें से लगभग 500 नेत्र रोगियों को सर्जरी की आवश्यकता पाई गई। इन्हीं चिह्नित मरीजों का उपचार बाद में दो चरणों में किया गया।

पहला चरण: एलओसी के पास तंगधार में ऐतिहासिक शिविर

पहला चरण 24 और 25 सितंबर को नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकट संवेदनशील क्षेत्र तंगधार में आयोजित किया गया। यह एलओसी के पास भूमिगत ऑपरेशन थिएटर में आयोजित अपनी तरह का पहला बड़ा नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर था। सर्जिकल टीम ने मात्र दो दिनों में दृष्टि बहाल करने वाली 220 सफल नेत्र सर्जरी संपन्न कीं। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि परिचालन की दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण और दुर्गम क्षेत्रों में भी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाई जा सकती हैं।

दूसरा चरण: श्रीनगर में विशेष प्रक्रियाएं

दूसरा चरण 28 और 29 सितंबर को श्रीनगर स्थित 92 बेस अस्पताल में संपन्न हुआ, जहाँ 144 मरीजों की नेत्र शल्य चिकित्सा की गई। गंभीर दृष्टि दोष से ग्रस्त कई मरीजों में उपचार के बाद उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया — कुछ मरीजों को अगले ही दिन स्पष्ट दिखाई देने लगा। मोतियाबिंद सर्जरी के अतिरिक्त इस शिविर में ग्लूड आईओएल प्रत्यारोपण, ग्लूकोमा सर्जरी, टेरिजियम निष्कासन और डायबिटिक रेटिनोपैथी के उपचार हेतु रेटिना सर्जरी जैसी विशेष प्रक्रियाएं भी की गईं।

समापन समारोह और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा समापन समारोह में विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने नेत्र चिकित्सा दल की समर्पण भावना, पेशेवर विशेषज्ञता और सेवाभाव की सराहना की। इस अवसर पर 15 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह सहित अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

आगे का विस्तार: ओडिशा होगा अगला पड़ाव

गौरतलब है कि ऑपरेशन दृष्टि अब देश के उत्तरी, पश्चिमी, पूर्वी और मध्य क्षेत्रों तक अपनी पहुँच बना चुका है। कश्मीर में इस पहल की सफलता ने यह स्थापित किया है कि सुदूर और संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में भी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना संभव है। इस पहल का अगला चरण ओडिशा में आयोजित किया जाएगा, जिससे और अधिक वंचित समुदायों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ नागरिक स्वास्थ्य ढाँचा लगभग अनुपस्थित है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की पहुँच एक दीर्घकालिक चुनौती रही है। सवाल यह है कि क्या इस मॉडल को स्थायी नागरिक स्वास्थ्य अवसंरचना में तब्दील किया जाएगा, या यह केवल आवधिक सैन्य पहल बनकर रह जाएगा। ओडिशा तक विस्तार संकेत देता है कि इस पहल में राष्ट्रव्यापी ढाँचे की संभावना है — बशर्ते संस्थागत निरंतरता सुनिश्चित हो।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन दृष्टि क्या है?
ऑपरेशन दृष्टि सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा की एक पहल है, जिसके तहत देश के दूर-दराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में निःशुल्क नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाते हैं। इसका उद्देश्य उन लोगों तक विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना है जो भौगोलिक दुर्गमता के कारण उपचार से वंचित रह जाते हैं।
कश्मीर में ऑपरेशन दृष्टि के तहत कितनी सर्जरी की गईं?
तंगधार और श्रीनगर में आयोजित दो बड़े शिविरों में कुल 364 नेत्र सर्जरी की गईं — तंगधार में 220 और श्रीनगर के 92 बेस अस्पताल में 144। इनमें मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, टेरिजियम और रेटिना से जुड़ी सर्जरी शामिल थीं।
तंगधार शिविर क्यों खास था?
तंगधार शिविर नियंत्रण रेखा के निकट एक भूमिगत ऑपरेशन थिएटर में आयोजित अपनी तरह का पहला बड़ा नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर था। 24-25 सितंबर को आयोजित इस शिविर में दो दिनों में 220 सफल सर्जरी की गईं, जो परिचालन की दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा की मिसाल बनी।
इन शिविरों से कितने लोगों को लाभ मिला?
शिविरों से पहले 18 स्क्रीनिंग शिविरों में करीब 6,000 लोगों की आंखों की जांच की गई। इनमें से लगभग 500 मरीजों को सर्जरी की आवश्यकता पाई गई, जिन्हें ऑपरेशन दृष्टि के दो चरणों में उपचार प्रदान किया गया।
ऑपरेशन दृष्टि का अगला चरण कहाँ होगा?
कश्मीर चरण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद ऑपरेशन दृष्टि का अगला चरण ओडिशा में आयोजित किया जाएगा। यह पहल अब देश के उत्तरी, पश्चिमी, पूर्वी और मध्य क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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