गुजरात में ईंधन की मांग 80% उछली, घबराहट में खरीदारी से पेट्रोल पंपों पर स्टॉक संकट
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात में पेट्रोल पंपों पर घबराहट में खरीदारी (पैनिक बाइंग) के चलते सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों की मासिक ईंधन बिक्री में 80 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पंपों पर पहुँचने वाला ईंधन लगभग तुरंत बिक रहा है, जिससे उपलब्धता में लगातार कमी आ रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह स्थिति आपूर्ति में किसी संरचनात्मक कमी के कारण नहीं, बल्कि असामान्य रूप से तेज़ उपभोक्ता माँग के कारण है।
मुख्य घटनाक्रम
25 मई को विभाग ने बताया कि बिक्री में यह तीव्र उछाल ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य भर के पेट्रोल पंपों पर स्टॉक तेज़ी से खाली हो रहा है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) — तीनों प्रमुख तेल विपणन कंपनियों के साथ लगभग दैनिक आधार पर समन्वय बैठकें आयोजित की जा रही हैं। कम या शून्य स्टॉक वाले पेट्रोल पंपों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर टैंकर भेजे जा रहे हैं।
सरकार की निगरानी व्यवस्था
विभाग ने राज्य भर में वास्तविक समय की निगरानी और डेटा संग्रह की व्यवस्था लागू की है। अधिकारियों के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति के आँकड़ों के आधार पर दैनिक रिपोर्ट तैयार की जाती हैं, जिनका उपयोग जिला स्तरीय अधिकारियों और तेल कंपनियों को परिचालन निर्देश जारी करने के लिए किया जाता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए जिला आपूर्ति अधिकारियों को ईंधन की किसी भी अनधिकृत बिक्री या भंडारण पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
आम जनता पर असर
गुजरात के कई जिलों में उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान तनाव की पृष्ठभूमि में देश के कई हिस्सों में आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी की प्रवृत्ति देखी गई है। विभाग ने नागरिकों और डीलरों की शिकायतों के निवारण के लिए एक समर्पित शिकायत निवारण तंत्र भी संचालित किया है, जिसके तहत मीडिया रिपोर्टों का भी सत्यापन कर कार्रवाई की जाती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा कि आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा नहीं है और मौजूदा संकट केवल माँग-पक्ष की असामान्यता है। गौरतलब है कि इस तरह की घबराहट में खरीदारी की स्थिति भारत में पहले भी — विशेषकर राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी घटनाओं या अफवाहों के दौरान — देखी जा चुकी है, और हर बार आपूर्ति सामान्य रही है।
क्या होगा आगे
विभाग ने संकेत दिया है कि जब तक माँग सामान्य स्तर पर नहीं लौटती, तब तक निगरानी और लक्षित लॉजिस्टिक प्रतिक्रिया जारी रहेगी। अधिक माँग वाले क्षेत्रों का मानचित्रण कर टैंकरों की आवाजाही को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि वितरण व्यवस्था स्थिर बनी रहे।