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महाराष्ट्र में पेट्रोल-डीजल की मांग में 49% तक उछाल, तेल कंपनियों ने कहा — आपूर्ति सामान्य, घबराहट में न खरीदें

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महाराष्ट्र में पेट्रोल-डीजल की मांग में 49% तक उछाल, तेल कंपनियों ने कहा — आपूर्ति सामान्य, घबराहट में न खरीदें

सारांश

महाराष्ट्र में डीजल की मांग एक ही दिन में 49% तक उछली — लेकिन तेल कंपनियों का कहना है कि यह संकट नहीं, मौसमी कृषि माँग और सस्ते सरकारी पंपों की ओर रुझान का नतीजा है। IOC, BPCL और HPCL ने आपूर्ति सामान्य बताई और घबराहट में खरीदारी न करने की अपील की।

मुख्य बातें

मई 2026 के पहले पखवाड़े में महाराष्ट्र में डीजल की बिक्री 19.66% और पेट्रोल की बिक्री 20.39% बढ़ी।
18 मई को डीजल की मांग में 49% की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई।
राज्य में पहले पखवाड़े में 2,67,000 किलोलीटर पेट्रोल और 5,02,000 किलोलीटर डीजल की आपूर्ति हुई।
मांग वृद्धि के कारण: मौसमी कृषि गतिविधियाँ और सार्वजनिक पंपों पर कम कीमतें ।
IOC, BPCL और HPCL ने बढ़ी माँग पूरी की; आपूर्ति श्रृंखला सामान्य बताई गई।
उपभोक्ताओं से अपील — घबराहट में अनावश्यक खरीदारी न करें ।

महाराष्ट्र में पेट्रोल और डीजल की मांग में अचानक तेज उछाल के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने शुक्रवार, 22 मई 2026 को स्पष्ट किया कि ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। कंपनियों ने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे घबराहट में अनावश्यक खरीदारी से बचें, क्योंकि यह स्थिति आपूर्ति की कमी नहीं, बल्कि असाधारण मांग वृद्धि का परिणाम है।

मांग में कितनी वृद्धि दर्ज की गई

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 के पहले पखवाड़े में महाराष्ट्र में डीजल की बिक्री में 19.66 प्रतिशत और पेट्रोल की बिक्री में 20.39 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दौरान राज्य में कुल 2,67,000 किलोलीटर पेट्रोल और 5,02,000 किलोलीटर डीजल की आपूर्ति की गई।

मई के तीसरे सप्ताह में मांग और भी तेज हो गई। 18 मई को पेट्रोल की मांग में 34 प्रतिशत, 19 मई को 21 प्रतिशत और 20 मई को 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। डीजल की मांग में यह उछाल और भी तीखा रहा — 18 मई को 49 प्रतिशत, 19 मई को 42 प्रतिशत और 20 मई को 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

मांग बढ़ने के पीछे क्या कारण

महाराष्ट्र के स्टेट लेवल कॉर्डिनेटर (ऑयल इंडस्ट्री) मिहिर गणेश जोशी ने बताया कि विभिन्न जिलों में मौसमी कृषि गतिविधियों के चलते ईंधन की खपत में असामान्य वृद्धि हुई है। इसके अलावा, निजी आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र के आउटलेट्स पर कम कीमतें होने के कारण खुदरा ग्राहकों के साथ-साथ संस्थागत और वाणिज्यिक उपभोक्ता भी सरकारी पंपों की ओर रुख कर रहे हैं।

जोशी के अनुसार, इन दोनों कारकों के मिलने से तीनों सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (PSU) के खुदरा आउटलेट्स पर एक साथ असाधारण दबाव पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तीनों कंपनियों ने बढ़ी हुई मांग को पूरी तरह पूरा किया है।

तेल कंपनियों की प्रतिक्रिया और आश्वासन

मंत्रालय ने बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) — तीनों कंपनियाँ देशभर में परिचालन और लॉजिस्टिक्स समन्वय जारी रखे हुए हैं। कंपनियों का लक्ष्य है कि कई क्षेत्रों में मांग के अचानक उछाल के बावजूद पेट्रोल (MS), डीजल (HSD) और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता बनी रहे।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद कुछ राज्यों में ईंधन की जमाखोरी की खबरें सामने आई थीं। गौरतलब है कि घबराहट में की गई खरीदारी आपूर्ति श्रृंखला पर अनावश्यक दबाव डालती है और वास्तविक कमी की स्थिति पैदा कर सकती है।

आम उपभोक्ताओं पर असर

तेल कंपनियों की अपील के बावजूद, कई जिलों में पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं। अधिकारियों के अनुसार, यह स्थिति मुख्यतः मांग में एकाएक वृद्धि के कारण उत्पन्न हुई, न कि भंडारण या आपूर्ति की किसी वास्तविक कमी से। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अपनी सामान्य आवश्यकता से अधिक ईंधन न खरीदें।

आने वाले दिनों में यदि कृषि गतिविधियों का मौसम सामान्य रहा और घबराहट में खरीदारी थमी, तो खुदरा आउटलेट्स पर दबाव स्वतः कम होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह संकेत है कि मूल्य नीति में असमानता को दीर्घकालिक रूप से संबोधित करने की ज़रूरत है। इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद जमाखोरी की मनोवृत्ति ने आग में घी का काम किया — और सरकार की त्वरित सार्वजनिक सफाई इस बात का संकेत है कि अफवाहें आपूर्ति से ज़्यादा तेज़ चलती हैं। असली चुनौती अब यह है कि क्या तेल कंपनियाँ इस तरह की अचानक माँग वृद्धि के लिए लॉजिस्टिक्स बफर बनाती हैं, या हर बार संकट के बाद सफाई देने पर निर्भर रहती हैं।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में पेट्रोल-डीजल की मांग अचानक क्यों बढ़ी?
मांग वृद्धि के दो मुख्य कारण हैं — मौसमी कृषि गतिविधियाँ और सार्वजनिक क्षेत्र के पंपों पर निजी आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में कम कीमतें। इससे खुदरा के साथ-साथ संस्थागत और वाणिज्यिक उपभोक्ता भी PSU आउटलेट्स पर उमड़ पड़े, जिससे असाधारण दबाव बना।
क्या महाराष्ट्र में पेट्रोल-डीजल की कमी है?
नहीं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और तीनों PSU — IOC, BPCL और HPCL — ने स्पष्ट किया है कि आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। बढ़ी हुई माँग को पूरी तरह पूरा किया गया है और आपूर्ति श्रृंखला में कोई व्यवधान नहीं है।
मई 2026 में महाराष्ट्र में ईंधन की बिक्री कितनी बढ़ी?
मई 2026 के पहले पखवाड़े में डीजल की बिक्री 19.66% और पेट्रोल की बिक्री 20.39% बढ़ी। तीसरे सप्ताह में 18 मई को डीजल की मांग 49% तक पहुँच गई, जो इस अवधि की सर्वाधिक वृद्धि रही।
क्या उपभोक्ताओं को अभी ज़्यादा ईंधन खरीद कर रखना चाहिए?
तेल कंपनियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि घबराहट में अनावश्यक खरीदारी न करें। आपूर्ति सामान्य है और घबराहट में की गई जमाखोरी वास्तविक कमी की स्थिति पैदा कर सकती है।
IOC, BPCL और HPCL ने स्थिति से कैसे निपटा?
तीनों कंपनियों ने देशभर में परिचालन और लॉजिस्टिक्स समन्वय बनाए रखा ताकि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। कंपनियों ने बढ़ी हुई माँग को पूरी तरह पूरा किया है।
राष्ट्र प्रेस
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