महाराष्ट्र में पेट्रोल-डीजल की मांग में 49% तक उछाल, तेल कंपनियों ने कहा — आपूर्ति सामान्य, घबराहट में न खरीदें
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में पेट्रोल और डीजल की मांग में अचानक तेज उछाल के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने शुक्रवार, 22 मई 2026 को स्पष्ट किया कि ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। कंपनियों ने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे घबराहट में अनावश्यक खरीदारी से बचें, क्योंकि यह स्थिति आपूर्ति की कमी नहीं, बल्कि असाधारण मांग वृद्धि का परिणाम है।
मांग में कितनी वृद्धि दर्ज की गई
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 के पहले पखवाड़े में महाराष्ट्र में डीजल की बिक्री में 19.66 प्रतिशत और पेट्रोल की बिक्री में 20.39 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दौरान राज्य में कुल 2,67,000 किलोलीटर पेट्रोल और 5,02,000 किलोलीटर डीजल की आपूर्ति की गई।
मई के तीसरे सप्ताह में मांग और भी तेज हो गई। 18 मई को पेट्रोल की मांग में 34 प्रतिशत, 19 मई को 21 प्रतिशत और 20 मई को 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। डीजल की मांग में यह उछाल और भी तीखा रहा — 18 मई को 49 प्रतिशत, 19 मई को 42 प्रतिशत और 20 मई को 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
मांग बढ़ने के पीछे क्या कारण
महाराष्ट्र के स्टेट लेवल कॉर्डिनेटर (ऑयल इंडस्ट्री) मिहिर गणेश जोशी ने बताया कि विभिन्न जिलों में मौसमी कृषि गतिविधियों के चलते ईंधन की खपत में असामान्य वृद्धि हुई है। इसके अलावा, निजी आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र के आउटलेट्स पर कम कीमतें होने के कारण खुदरा ग्राहकों के साथ-साथ संस्थागत और वाणिज्यिक उपभोक्ता भी सरकारी पंपों की ओर रुख कर रहे हैं।
जोशी के अनुसार, इन दोनों कारकों के मिलने से तीनों सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (PSU) के खुदरा आउटलेट्स पर एक साथ असाधारण दबाव पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तीनों कंपनियों ने बढ़ी हुई मांग को पूरी तरह पूरा किया है।
तेल कंपनियों की प्रतिक्रिया और आश्वासन
मंत्रालय ने बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) — तीनों कंपनियाँ देशभर में परिचालन और लॉजिस्टिक्स समन्वय जारी रखे हुए हैं। कंपनियों का लक्ष्य है कि कई क्षेत्रों में मांग के अचानक उछाल के बावजूद पेट्रोल (MS), डीजल (HSD) और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता बनी रहे।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद कुछ राज्यों में ईंधन की जमाखोरी की खबरें सामने आई थीं। गौरतलब है कि घबराहट में की गई खरीदारी आपूर्ति श्रृंखला पर अनावश्यक दबाव डालती है और वास्तविक कमी की स्थिति पैदा कर सकती है।
आम उपभोक्ताओं पर असर
तेल कंपनियों की अपील के बावजूद, कई जिलों में पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं। अधिकारियों के अनुसार, यह स्थिति मुख्यतः मांग में एकाएक वृद्धि के कारण उत्पन्न हुई, न कि भंडारण या आपूर्ति की किसी वास्तविक कमी से। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अपनी सामान्य आवश्यकता से अधिक ईंधन न खरीदें।
आने वाले दिनों में यदि कृषि गतिविधियों का मौसम सामान्य रहा और घबराहट में खरीदारी थमी, तो खुदरा आउटलेट्स पर दबाव स्वतः कम होने की उम्मीद है।