क्या हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में कवि दरबार ने श्रद्धालुओं के दिलों को छू लिया?

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क्या हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में कवि दरबार ने श्रद्धालुओं के दिलों को छू लिया?

सारांश

पांवटा साहिब में आयोजित कवि दरबार ने न केवल श्रद्धालुओं के दिलों को छू लिया, बल्कि यह सिख धर्म की समृद्ध परंपरा का भी प्रतीक है। इस आयोजन ने विभिन्न समुदायों के कवियों को एक मंच पर लाकर सभी को प्रेरित किया। जानिए इस अद्भुत कार्यक्रम के बारे में!

Key Takeaways

  • पांवटा साहिब में विशेष कवि दरबार का आयोजन हुआ।
  • 339 वर्ष पुरानी परंपरा का पुनर्स्थापन।
  • विभिन्न धर्मों के कवियों ने भाग लिया।
  • गुरु गोबिन्द सिंह महाराज की परंपरा को सम्मानित करने का प्रयास।
  • सांस्कृतिक और साहित्यिक एकता का प्रतीक।

पांवटा साहिब, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में नववर्ष की पहली पूर्णिमा के अवसर पर एक विशेष कवि दरबार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

कवि दरबार की परंपरा का आरंभ सिख धर्म के दसवें और अंतिम गुरु गुरु गोबिन्द सिंह महाराज ने 339 वर्ष पूर्व पांवटा साहिब में किया था, जो आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ जारी है। शनिवार को सुबह से ही विशेष कीर्तन का आयोजन हुआ और शाम को कवि दरबार शुरू हुआ।

वरिष्ठ कवि कुलवंत सिंह चौधरी ने बताया कि यह परंपरा गुरु गोबिन्द सिंह महाराज के समय से चली आ रही है और इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक उत्सव मनाना ही नहीं, बल्कि समाज को कविता के माध्यम से प्रेरित करना भी था। इस आयोजन में विभिन्न धर्मों और समुदायों के कवियों ने अपनी रचनाओं से उपस्थित श्रद्धालुओं का दिल जीता।

गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधक जगीर सिंह ने भी मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि पांवटा साहिब में गुरु गोबिन्द सिंह महाराज जी ने ही कवि दरबार की परंपरा की शुरुआत की। यह एकमात्र स्थान है जहां कवि दरबार स्थापित किया गया था और यहीं गुरु साहब ने अपनी पहली जंग भी लड़ी थी। इसके अलावा, उनके बड़े पुत्र बाबा अजीत सिंह जी का जन्म भी पांवटा साहिब में हुआ।

जगीर सिंह ने कहा कि यह आयोजन न केवल गुरु गोबिन्द सिंह महाराज को श्रद्धांजलि देने के लिए है, बल्कि यह संस्कृति और साहित्य के प्रति उनकी असीम श्रद्धा को भी दर्शाता है। कार्यक्रम में सुबह से ही भीड़ थी, लेकिन रात होते-होते यह बढ़ गई। किसी को कोई परेशानी न हो, इसके लिए विशेष प्रबंध किए गए थे।

जगीर सिंह ने बताया कि विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं, जिसे देखकर सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए।

Point of View

बल्कि यह सिख धर्म की गहरी जड़ों और परंपराओं को भी उजागर करता है। पांवटा साहिब में गुरु गोबिन्द सिंह महाराज द्वारा स्थापित कवि दरबार ने साहित्य और संस्कृति के प्रति श्रद्धा को बढ़ावा देने का कार्य किया है। यह आयोजन विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच एकता को भी दर्शाता है।
NationPress
05/01/2026

Frequently Asked Questions

कवि दरबार का आयोजन किस अवसर पर किया गया था?
कवि दरबार का आयोजन नववर्ष की पहली पूर्णिमा के अवसर पर किया गया था।
कवि दरबार की परंपरा की शुरुआत कब हुई थी?
कवि दरबार की परंपरा की शुरुआत 339 वर्ष पहले गुरु गोबिन्द सिंह महाराज ने की थी।
इस कार्यक्रम में किन-किन राज्यों के कवियों ने भाग लिया?
इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने भाग लिया।
पांवटा साहिब का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
यहाँ गुरु गोबिन्द सिंह महाराज ने अपनी पहली जंग लड़ी थी और यहाँ कवि दरबार की परंपरा की शुरुआत हुई थी।
इस आयोजन का उद्देश्य क्या है?
इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक उत्सव मनाना और समाज को कविता के माध्यम से प्रेरित करना है।
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