पश्चिम एशिया संकट पर भारत की कूटनीति: आनंद शर्मा की समझदारी और संतुलन
सारांश
Key Takeaways
- भारत की कूटनीति संकट में संतुलन बनाए रखती है।
- खाड़ी देशों के साथ भारत के पुराने संबंध हैं।
- ऊर्जा संकट का सामना करना एक बड़ी चुनौती है।
- भारत को वैश्विक साउथ के साथ शांति बहाल करने का प्रयास करना चाहिए।
- सरकार ने सभी राजनीतिक दलों के साथ संवाद जरूरी बताया है।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान से असहमत होते हुए पश्चिम एशिया संकट में भारत की कूटनीति की सराहना की है।
आनंद शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट के माध्यम से पश्चिम एशिया संकट पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने बताया कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके जवाब में ईरान की कार्रवाई के परिणामस्वरूप पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। इससे विश्वभर में अस्थिरता और आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। भारत जैसे देश, जो कच्चे तेल, गैस और एलपीजी की आपूर्ति के लिए मध्य-पूर्व और खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आपूर्ति पर खतरा उत्पन्न हो गया है। हम एक ऐसे समय का सामना कर रहे हैं जो ऊर्जा संकटों में से सबसे बड़ा हो सकता है। यह कठिन समय हमारी नीतियों और कूटनीति दोनों के लिए एक परीक्षा है। भारत के खाड़ी देशों के साथ पुरानी मित्रता है और ईरान के साथ सांस्कृतिक संबंध भी हैं।
उन्होंने आगे उल्लेख किया कि तेल और गैस के अतिरिक्त, लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार, 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और विदेश से आने वाली लगभग 60 प्रतिशत कमाई (रेमिटेंस) को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। इस संकट में भारत की कूटनीति समझदारी और संतुलन से भरी रही है, जिससे बड़े खतरों से बचाव हुआ है। भारत की प्रतिक्रिया राष्ट्रीय एकता और सहमति के साथ होनी चाहिए। सरकार ने सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाकर उन्हें स्थिति और निर्णयों की जानकारी दी है। यह संवाद जारी रहना आवश्यक है। इस समय देशहित में एकजुटता और समझदारी भरा रवैया अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आनंद शर्मा ने आगे कहा कि इस युद्ध ने ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक सुरक्षा की समस्याओं को और अधिक बढ़ा दिया है। सप्लाई चेन में रुकावट, बाजारों में गिरावट और रुपये की कमजोरी जैसी चुनौतियाँ सामने आ रही हैं, जिनका तात्कालिक और दीर्घकालिक समाधान आवश्यक है। इस संकट की गंभीरता को समझना महत्वपूर्ण है। जब वैश्विक व्यवस्था और नियम टूट रहे हों, तब दुनिया को चुप नहीं रहना चाहिए। भारत हमेशा शांति और नैतिकता के लिए जाना जाता है। आज बहुत कुछ दांव पर है, विशेषकर युवाओं का भविष्य। भारत को प्रयास करना चाहिए कि वह ग्लोबल साउथ और अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर शांति और स्थिरता बहाल करने का कार्य करे।