पटना में गैराज मालिक अंजनी नंदन की हत्या पर श्याम रजक बोले — 'दीप बुझने से पहले भभकता है'
सारांश
मुख्य बातें
पटना के रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र में भूपतिपुर के गैराज मालिक अंजनी नंदन की 27 सितंबर 2026 को गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूर्व मंत्री एवं विधायक श्याम रजक ने गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का दावा किया और कहा कि बिहार में अपराध का साम्राज्य अब समाप्ति की ओर है।
घटनाक्रम
विधायक श्याम रजक ने बताया कि अंजनी नंदन उनके विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रामकृष्ण नगर थाना के भूपतिपुर में गैराज चलाते थे। उन्हें गोली मारे जाने के बाद इलाज के लिए मेदांता अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी मृत्यु हो गई। रजक ने कहा कि यह घटना उन्हें और क्षेत्र के निवासियों को गहरे दुःख और चिंता में डाल गई है।
श्याम रजक का 'दीपक' वाला तर्क
अपराधियों के बढ़ते हौसले से जुड़े सवाल पर श्याम रजक ने एक रूपक का सहारा लिया। उन्होंने कहा कि जब दीपक का तेल समाप्त होने को होता है, तब उसकी लौ सबसे तेज़ भभकती है — लेकिन यह उसकी ताकत नहीं, बल्कि उसके बुझने का संकेत होता है। उनके अनुसार बिहार में अपराध की वर्तमान घटनाएँ इसी अंतिम भड़क की तरह हैं और अपराध का तंत्र जल्द ही खत्म होगा।
सरकार की प्रतिक्रिया और दावे
रजक ने कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपराध पर लगाम कसने का पूरा संकल्प ले लिया है। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई और पुलिस की रणनीतिक कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराधियों को अब या तो जेल जाना होगा या बिहार छोड़कर जाना होगा। एनकाउंटर नीति अपनाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका निर्णय लेने का अधिकार उनके पास नहीं है, और पुलिस व प्रशासन की रणनीति को सार्वजनिक करना आवश्यक नहीं है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि पटना में इस तरह की घटनाएँ आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना को गहरा करती हैं। रामकृष्ण नगर जैसे आवासीय इलाकों में दिनदहाड़े गोलीबारी से व्यापारियों और दुकानदारों में भय का माहौल है। रजक ने स्वीकार किया कि चलते-फिरते लोगों को गोली मार देना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और सरकार इस मामले में कोई कोताही नहीं बरतेगी।
क्या होगा आगे
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। रजक का कहना है कि आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो जाएगा कि अपराधियों पर अंकुश लगाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति वास्तव में कितनी मज़बूत है। पटना में कानून-व्यवस्था की स्थिति विधानसभा में भी एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।