23 जुलाई 2026
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खान ग्लोबल स्टडीज सेंटर पटना में फायर सेफ्टी जांच: दूसरी बार भी मिलीं गंभीर खामियाँ, 7-10 दिन में सुधार का अल्टीमेटम

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खान ग्लोबल स्टडीज सेंटर पटना में फायर सेफ्टी जांच: दूसरी बार भी मिलीं गंभीर खामियाँ, 7-10 दिन में सुधार का अल्टीमेटम

सारांश

पटना के खान ग्लोबल स्टडीज सेंटर में यह दूसरा फायर ऑडिट था — और फिर खामियाँ मिलीं। मुजफ्फरपुर में सात मौतों के बाद बिहार सरकार के सख्त अभियान के बीच संस्थान को 7-10 दिन का अल्टीमेटम मिला है। इमारत में सिर्फ एक सीढ़ी होना सबसे बड़ी चिंता है।

मुख्य बातें

पटना के खान ग्लोबल स्टडीज सेंटर की 7 जून 2026 को हुई फायर सेफ्टी जांच में अग्निशमन अधिनियम के तहत कई अनिवार्य सुरक्षा प्रावधान अनुपस्थित पाए गए।
इमारत में केवल एक सीढ़ी है, जो निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है।
यह संस्थान का दूसरा फायर ऑडिट था; मई 2026 के पहले निरीक्षण के बाद भी संतोषजनक सुधार नहीं हुआ था।
बिहार फायर सर्विस ने 7 से 10 दिनों के भीतर सभी खामियाँ दूर करने का निर्देश दिया; अनुपालन न होने पर आगे की कार्रवाई संभव।
मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में आग से सात लोगों की मौत के बाद राज्यभर में कोचिंग संस्थानों और अस्पतालों की जांच शुरू की गई है।

पटना स्थित खान ग्लोबल स्टडीज सेंटर की 7 जून 2026 को हुई फायर सेफ्टी जांच में एक बार फिर कई गंभीर सुरक्षा खामियाँ उजागर हुई हैं। बिहार फायर सर्विस ने संस्थान को नोटिस जारी करते हुए 7 से 10 दिनों के भीतर सभी आवश्यक सुधार पूरे करने का कड़ा निर्देश दिया है। यह इस कोचिंग संस्थान का दूसरा फायर ऑडिट था।

क्या-क्या खामियाँ मिलीं

बिहार फायर सर्विस के कमांडेंट रितेश कुमार पांडेय ने बताया कि जांच के दौरान अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत अनिवार्य कई सुरक्षा प्रावधान संस्थान में मौजूद नहीं पाए गए। सबसे बड़ी चिंता यह है कि पूरी इमारत में केवल एक ही सीढ़ी है, जो निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र इस संस्थान में पढ़ने आते हैं, जिससे किसी आपात स्थिति में जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

पहले निरीक्षण के बाद भी नहीं हुआ सुधार

मई 2026 में भी इस कोचिंग संस्थान का पहला निरीक्षण किया गया था, जिसमें भी खामियाँ सामने आई थीं। अधिकारियों के अनुसार, उन कमियों पर संतोषजनक प्रगति नहीं मिलने के कारण विभाग ने अब सख्त रुख अपनाया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, तो विभाग आगे की कार्रवाई करने पर विचार कर सकता है।

मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद राज्यव्यापी अभियान

यह जांच उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जो मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से सात लोगों की मौत के बाद शुरू किया गया। इस दुखद घटना के बाद बिहार सरकार ने राज्यभर में कोचिंग संस्थानों और निजी अस्पतालों की फायर सेफ्टी जांच का आदेश दिया। गौरतलब है कि पटना के कई निजी अस्पतालों की जांच में भी गंभीर सुरक्षा खामियाँ पाई गई हैं, जहाँ आपात स्थिति में मरीजों की जान को बड़ा खतरा हो सकता था।

छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

फायर सर्विस ने स्पष्ट किया है कि चूँकि इस संस्थान में रोज़ाना बड़ी संख्या में छात्र आते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभाग का कहना है कि बिना पर्याप्त आपातकालीन निकास और अग्निशमन उपकरणों के किसी भी संस्थान को संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। आने वाले दिनों में अनुपालन की स्थिति की समीक्षा की जाएगी और उसी के आधार पर अगले कदम तय होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरा फायर ऑडिट है — और खामियाँ फिर भी वही हैं। यह सवाल उठाता है कि पहले निरीक्षण के बाद विभाग ने अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए क्या तंत्र अपनाया था। मुजफ्फरपुर त्रासदी के बाद सरकार की सक्रियता स्वागतयोग्य है, लेकिन 'नोटिस जारी करो और प्रतीक्षा करो' की यही रणनीति पहले भी विफल रही है। असली परीक्षा यह होगी कि 10 दिन बाद विभाग वास्तव में कार्रवाई करता है या फिर एक और नोटिस से काम चलाया जाता है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खान ग्लोबल स्टडीज सेंटर में फायर सेफ्टी जांच में क्या खामियाँ मिलीं?
जांच में पाया गया कि संस्थान में अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत अनिवार्य कई सुरक्षा प्रावधान मौजूद नहीं हैं। सबसे बड़ी कमी यह है कि पूरी इमारत में केवल एक सीढ़ी है, जो सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है।
बिहार फायर सर्विस ने खान ग्लोबल स्टडीज सेंटर को क्या निर्देश दिया है?
बिहार फायर सर्विस ने संस्थान को 7 से 10 दिनों के भीतर सभी आवश्यक सुरक्षा सुधार पूरे करने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय सीमा में अनुपालन न होने पर विभाग आगे की कार्रवाई कर सकता है।
क्या पहले भी इस संस्थान की फायर सेफ्टी जांच हुई थी?
हाँ, मई 2026 में भी इस संस्थान का पहला फायर निरीक्षण किया गया था और उसमें भी खामियाँ सामने आई थीं। पहले निरीक्षण के बाद संतोषजनक सुधार न होने के कारण विभाग ने अब सख्त रुख अपनाया है।
पटना में यह जांच अभियान क्यों शुरू हुआ?
मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से सात लोगों की मौत के बाद बिहार सरकार ने राज्यभर में कोचिंग संस्थानों और निजी अस्पतालों की फायर सेफ्टी जांच का आदेश दिया। पटना के कई निजी अस्पतालों में भी इस जांच के दौरान गंभीर खामियाँ पाई गई हैं।
खान ग्लोबल स्टडीज सेंटर के छात्रों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल संस्थान को बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। विभाग ने 7-10 दिनों में सुधार का अल्टीमेटम दिया है और अनुपालन की समीक्षा के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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