क्या पीएफआरडीए ने एनपीएस को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सुधारों को मंजूरी दी?

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क्या पीएफआरडीए ने एनपीएस को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सुधारों को मंजूरी दी?

सारांश

पीएफआरडीए ने हाल ही में एक नया ढांचा मंजूर किया है, जिससे शेड्यूल कमर्शियल बैंकों को एनपीएस का प्रबंधन करने के लिए पेंशन फंड स्थापित करने की अनुमति दी गई है। इससे निवेश के विकल्पों में वृद्धि और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। जानें इसके बारे में और क्या बदलाव होंगे।

Key Takeaways

  • पीएफआरडीए ने नए ढांचे को मंजूरी दी है।
  • शेड्यूल कमर्शियल बैंकों को पेंशन फंड स्थापित करने की अनुमति दी गई है।
  • बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
  • बैंकों के लिए पात्रता मानदंड होंगे।
  • निवेश प्रबंधन शुल्क में संशोधन होगा।

नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) बोर्ड ने गुरुवार को एक नया ढांचा मंजूर किया है। इसके तहत शेड्यूल कमर्शियल बैंक (एससीबी) को एनपीएस का प्रबंधन करने के लिए पेंशन फंड स्थापित करने की अनुमति दी गई है।

इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और एनपीएस में निवेश के लिए नागरिकों के पास अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह नया ढांचा उन मौजूदा नियामक बाधाओं को दूर करने का प्रयास है जिन्होंने बैंकों की भागीदारी को सीमित किया है।

आरबीआई के मानदंडों के अनुसार, नेट वर्थ, बाजार पूंजीकरण और विवेकपूर्ण सुदृढ़ता के आधार पर स्पष्ट पात्रता मानदंड लागू किए जाएंगे, ताकि केवल मजबूत और पूंजीकृत बैंकों को ही पेंशन फंड प्रायोजित करने की अनुमति मिले।

बयान में यह भी कहा गया, "विस्तृत मानदंड अलग से अधिसूचित किए जाएंगे और ये सभी नए और मौजूदा पेंशन फंडों पर लागू होंगे।"

पीएफआरडीए द्वारा शुरू की गई चयन प्रक्रिया के तहत एनपीएस ट्रस्ट के बोर्ड में तीन नए ट्रस्टी नियुक्त किए गए हैं, जिनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार खारा, यूटीआई एएमसी की पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष स्वाति अनिल कुलकर्णी और डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के सह-संस्थापक डॉ. अरविंद गुप्ता शामिल हैं।

खारा को एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी नामित किया गया है।

बदलती परिस्थितियों, जनता की आकांक्षाओं, अंतरराष्ट्रीय मानकों और कॉरपोरेट, रिटेल और गिग-इकोनॉमी क्षेत्रों में कवरेज बढ़ाने के उद्देश्य से, पीएफआरडीए ने 1 अप्रैल, 2026 से ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए पेंशन फंडों के निवेश प्रबंधन शुल्क (आईएमएफ) ढांचे में संशोधन किया है।

आईएमएफ द्वारा संशोधित स्लैब-आधारित नीति में सरकारी और गैर-सरकारी ग्राहक के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं, जो मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (एमएसएफ) के अंतर्गत आने वाली योजनाओं पर भी लागू होंगी, हालाँकि एमएसएफ कोष की गणना अलग से की जाएगी।

पीएफआरडीए को उम्मीद है कि इन नीतिगत सुधारों से ग्राहकों और हितधारकों को एक प्रतिस्पर्धी, सुशासित और सुदृढ़ एनपीएस प्रणाली तक पहुंच प्राप्त होगी, जिससे दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति परिणामों में सुधार होगा और वृद्धावस्था में आय सुरक्षा बढ़ेगी।

Point of View

जिससे एनपीएस में वृद्धि की संभावना है। यह परिवर्तन सभी हितधारकों के लिए फायदेमंद होगा।
NationPress
01/01/2026

Frequently Asked Questions

पीएफआरडीए क्या है?
पीएफआरडीए का अर्थ है पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण, जो भारत में पेंशन प्रणाली का नियामक है।
एनपीएस क्या है?
एनपीएस, या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली, एक सेवानिवृत्ति बचत योजना है जो स्थायी आय सुनिश्चित करती है।
इन नीतियों का लाभ कौन उठाएगा?
इन नीतियों का लाभ सभी निवेशकों और नागरिकों को होगा जो एनपीएस में निवेश करना चाहते हैं।
क्या बदलाव होंगे?
बदलावों में बैंकों को पेंशन फंड स्थापित करने की अनुमति और निवेश प्रबंधन शुल्क में संशोधन शामिल हैं।
यह कब लागू होगा?
यह नया ढांचा 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा।
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