सीएमआरएल-एक्सालॉजिक स्कैम: पिनाराई विजयन और रियास दो अलग मामलों में पहले आरोपी, वीएसीबी आज दर्ज करेगी एफआईआर
सारांश
मुख्य बातें
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] के विधायक व पूर्व मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास को सीएमआरएल-एक्सालॉजिक भ्रष्टाचार प्रकरण से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में क्रमशः पहला आरोपी बनाया गया है। विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) सोमवार, 13 अक्टूबर 2026 को विजिलेंस कोर्ट में दोनों एफआईआर दर्ज करने वाली है, जो केरल उच्च न्यायालय की एकल पीठ के निर्देश पर आधारित हैं।
मामलों की संरचना: कौन किस केस में आरोपी
पहला मामला कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) द्वारा एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को किए गए कथित मासिक भुगतान (मंथली पेमेंट) से जुड़ा है। इस केस में पिनाराई विजयन पहले और उनकी बेटी टी. वीना दूसरी आरोपी होंगी। एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस वीना की कंपनी है।
दूसरा मामला रियास को कथित तौर पर मिले भ्रष्टाचार के धन से संबंधित है। रियास दूसरे एलडीएफ मंत्रिमंडल में पर्यटन मंत्री रहे थे और विजयन की बेटी वीना के पति हैं। इस केस में रियास पहले और वीना दूसरी आरोपी होंगी।
न्यायालय का हस्तक्षेप और पृष्ठभूमि
केरल उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने वीएसीबी को निर्देश दिया था कि वह शुरुआती जाँच की प्रतीक्षा किए बिना प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रिपोर्ट के आधार पर सीधे मामले दर्ज करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की पूर्वानुमति के बिना पुलिस महानिदेशक द्वारा गठित विशेष जाँच दल (एसआईटी) का आदेश अमान्य है।
गौरतलब है कि अदालत की इस टिप्पणी के बाद अब सरकार से अपेक्षा है कि वह विजिलेंस निदेशक की सिफारिश पर एक नया एसआईटी गठन आदेश जारी करे, जो न्यायालय द्वारा निर्धारित अधिकार-सीमाओं के अनुरूप हो।
दस्तावेज़ हस्तांतरण और अभियोजन की स्थिति
क्राइम ब्रांच के पास मौजूद इस मामले से संबंधित सभी दस्तावेज़ वीएसीबी को सौंप दिए गए हैं। वीएसीबी का कहना है कि उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के मद्देनज़र जाँच आगे बढ़ाने के लिए किसी अलग पूर्वानुमति की आवश्यकता नहीं है।
दोनों एफआईआर में प्रत्येक आरोपी के विरुद्ध अलग-अलग आरोपों, भुगतान स्वरूप और कथित सरकारी लाभ से जुड़े परिस्थितियों की स्वतंत्र जाँच की जाएगी।
विजयन की चुनौती: डिवीजन बेंच में अपील
सूत्रों के अनुसार, पिनाराई विजयन सोमवार को ही केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) के समक्ष एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका दायर करने की तैयारी में हैं। यह कदम संकेत देता है कि यह कानूनी लड़ाई अभी लंबी खिंच सकती है।
आगे क्या होगा
यह मामला केरल की राजनीति में एक असाधारण मोड़ है — एक पूर्व मुख्यमंत्री और उनके दामाद एक साथ, लेकिन अलग-अलग मामलों में पहले आरोपी के रूप में विजिलेंस कोर्ट के समक्ष खड़े होंगे। डिवीजन बेंच का रुख और एसआईटी के पुनर्गठन पर सरकार का निर्णय इस प्रकरण की अगली दिशा तय करेगा।