12 अक्टूबर 2026
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पीयूष गोयल का आह्वान: 2030 तक भारत-ब्रिटेन व्यापार दोगुना करें, सीईटीए को बनाएं विकास का आधार

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पीयूष गोयल का आह्वान: 2030 तक भारत-ब्रिटेन व्यापार दोगुना करें, सीईटीए को बनाएं विकास का आधार

सारांश

सीईटीए लागू होने के 100 दिन बाद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जेटको के 16वें सत्र में स्पष्ट संदेश दिया — 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करो। पाँच प्राथमिकता क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा से लेकर एआई तक का रोडमैप तैयार है; अब असली परीक्षा क्रियान्वयन की है।

मुख्य बातें

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 12 अक्टूबर 2026 को जेटको के 16वें सत्र में भारत-ब्रिटेन व्यापार को 2030 तक दोगुना करने का आह्वान किया।
सीईटीए के तहत ब्रिटेन के बाजार में अधिकांश भारतीय निर्यात को शून्य शुल्क पर पहुँच मिलेगी।
सहयोग के पाँच प्राथमिकता क्षेत्र : स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, प्रौद्योगिकी-नवाचार, वित्तीय सेवाएँ और स्वास्थ्य सेवा।
गिफ्ट सिटी (गांधीनगर) और लंदन वित्तीय केंद्र के बीच गहरे वित्तीय सहयोग पर जोर।
ब्रिटिश मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने कहा कि सीईटीए को लागू हुए लगभग 100 दिन हुए हैं और कारोबारी नए अवसर तलाश रहे हैं।
भारत-ब्रिटेन विजन 2035 को अधिक आर्थिक महत्वाकांक्षा का आधार बनाने का प्रस्ताव।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में भारत और ब्रिटेन के कारोबारियों से अपील की कि वे भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) से उभरे अवसरों को व्यापार विस्तार, निवेश, रणनीतिक साझेदारी और रोजगार सृजन में परिवर्तित करें। भारत-ब्रिटेन संयुक्त आर्थिक एवं व्यापार समिति (जेटको) के 16वें सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों को 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए।

सीईटीए: एक ऐतिहासिक उपलब्धि

गोयल ने सीईटीए को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक निर्णायक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत ब्रिटेन के बाजार में अधिकांश भारतीय निर्यात को शून्य शुल्क पर पहुँच मिलेगी, जबकि विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिटेन के निर्यातकों के लिए भी व्यापक अवसर सुनिश्चित होंगे। सेवा क्षेत्र में भी इस समझौते से नए द्वार खुले हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सामाजिक सुरक्षा पर दोहरे अंशदान से बचाव संबंधी समझौता प्रतिस्पर्धी मूल्यों पर सेवाओं की आपूर्ति और लाभप्रदता में और सुधार ला सकता है।

पाँच प्राथमिकता क्षेत्र

मंत्री गोयल ने भारत-ब्रिटेन सहयोग के लिए पाँच प्रमुख क्षेत्रों की रूपरेखा प्रस्तुत की। पहला — बुनियादी ढाँचा और स्वच्छ ऊर्जा: नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, बिजली पारेषण लाइनों और उपयोगिता क्षेत्र के वित्तपोषण में सहयोग। दूसरा — उन्नत विनिर्माण और मजबूत आपूर्ति शृंखलाएं: विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सटीक इंजीनियरिंग में। तीसरा — प्रौद्योगिकी और नवाचार: सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास।

चौथा — वित्तीय सेवाएँ: गोयल ने गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी और लंदन के वित्तीय केंद्र के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता रेखांकित की। फिनटेक, बीमा, सीमा पार भुगतान और व्यापार वित्तपोषण को प्रमुख उपक्षेत्र बताया। पाँचवाँ — स्वास्थ्य सेवा और उपभोक्ता क्षेत्र: भारत की जेनेरिक दवाओं और ब्रिटेन के इनोवेटिव दवा उत्पादों के बीच तालमेल, साथ ही निदान सेवाओं, खाद्य प्रसंस्करण और उपभोक्ता वस्तुओं में सहयोग।

व्यापारिक पूरकताएं और निर्यात संभावनाएं

गोयल ने दोनों अर्थव्यवस्थाओं की परस्पर पूरकता को रेखांकित करते हुए बताया कि भारत स्मार्टफोन, फार्मास्युटिकल उत्पाद, आभूषण, कपड़े, चमड़े का सामान, चावल, लौह एवं गैर-मिश्रधातु इस्पात, मशीनरी पुर्जे और ऑटोमोबाइल कलपुर्जों का प्रमुख निर्यातक है। वहीं, ब्रिटेन की ओर से पेट्रोलियम मूल्य शृंखला उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोटर कारें और स्कॉच व्हिस्की की आपूर्ति में बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने जोर दिया कि भारत-ब्रिटेन विजन 2035 को अधिक आर्थिक महत्वाकांक्षा और संरचित सहयोग का आधार बनाया जाना चाहिए।

ब्रिटेन की प्रतिक्रिया

जेटको के 16वें सत्र को संबोधित करते हुए ब्रिटेन के व्यापार, नवाचार, विज्ञान एवं व्यापार राज्य सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स ने कहा कि सीईटीए पर सहमति दोनों देशों की सरकारों और कारोबारियों के बीच निरंतर एवं व्यावहारिक संवाद की एक नई शुरुआत है। उन्होंने बताया कि सीईटीए को लागू हुए लगभग 100 दिन हो चुके हैं और उत्साहजनक संकेत मिल रहे हैं — दोनों देशों के कारोबारी उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, जीवन विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रचनात्मक उद्योगों में नए अवसर तलाश रहे हैं। रेनॉल्ड्स ने कहा कि इस समझौते की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कारोबारी इसका इस्तेमाल निर्यात, निवेश और साझेदारी बढ़ाने के लिए किस प्रकार करते हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह सत्र ऐसे समय आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी भूमिका विस्तारित करने की रणनीति पर काम कर रहा है और ब्रिटेन ब्रेक्जिट के बाद के दौर में नए व्यापारिक साझेदार तलाश रहा है। दोनों पक्षों की प्राथमिकताओं में यह समन्वय द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई देने का अवसर प्रस्तुत करता है। अब नजरें इस पर होंगी कि जेटको की इस बैठक में तय हुई कार्ययोजनाएं जमीनी स्तर पर कितनी तेज़ी से अमल में आती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य तभी यथार्थवादी होगा जब शून्य-शुल्क पहुँच का लाभ छोटे और मझोले निर्यातक भी उठा सकें, न केवल बड़े औद्योगिक घराने। गौरतलब है कि भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार वार्ता वर्षों तक लटकी रही और सीईटीए को अंतिम रूप देने में जितना समय लगा, उसे देखते हुए क्रियान्वयन की रफ्तार पर निगरानी जरूरी है। एआई, सेमीकंडक्टर और क्वांटम कंप्यूटिंग में सहयोग की घोषणाएं तब तक कागजी रहेंगी, जब तक द्विपक्षीय अनुसंधान वित्तपोषण और वीजा-गतिशीलता ढाँचे ठोस नहीं होते। विजन 2035 को एक महत्वाकांक्षी दस्तावेज़ से क्रियाशील साझेदारी में बदलना ही इस रिश्ते की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ब्रिटेन सीईटीए क्या है और इससे क्या फायदा होगा?
सीईटीए यानी 'व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता' भारत और ब्रिटेन के बीच एक द्विपक्षीय व्यापार संधि है, जिसके तहत ब्रिटेन के बाजार में अधिकांश भारतीय निर्यात को शून्य शुल्क पर पहुँच मिलेगी। यह समझौता सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा करता है और सामाजिक सुरक्षा दोहरे अंशदान से बचाव का प्रावधान भी इसमें शामिल है।
पीयूष गोयल ने 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य क्यों रखा?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जेटको के 16वें सत्र में कहा कि भारत और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और सीईटीए से उभरे अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए 2030 तक व्यापार दोगुना करना व्यावहारिक लक्ष्य है। उनका तर्क था कि निर्यात की विविधता और नए क्षेत्रों में निवेश से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
भारत-ब्रिटेन सहयोग के पाँच प्रमुख क्षेत्र कौन से हैं?
गोयल ने पाँच प्राथमिकता क्षेत्र बताए: (1) बुनियादी ढाँचा और स्वच्छ ऊर्जा, (2) उन्नत विनिर्माण और आपूर्ति शृंखलाएं (ईवी, इलेक्ट्रॉनिक्स), (3) प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (सेमीकंडक्टर, एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग), (4) वित्तीय सेवाएँ (गिफ्ट सिटी-लंदन सहयोग, फिनटेक), और (5) स्वास्थ्य सेवा एवं उपभोक्ता क्षेत्र (जेनेरिक दवाएँ, खाद्य प्रसंस्करण)।
जेटको का 16वाँ सत्र क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सत्र सीईटीए लागू होने के लगभग 100 दिन बाद आयोजित हुआ, जो दोनों देशों के लिए समझौते के शुरुआती नतीजों की समीक्षा और आगे की कार्ययोजना तय करने का पहला बड़ा मंच था। ब्रिटिश मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने भी इसे दोनों सरकारों और कारोबारियों के बीच व्यावहारिक संवाद की शुरुआत बताया।
गिफ्ट सिटी और लंदन के बीच वित्तीय सहयोग से क्या उम्मीदें हैं?
गोयल ने गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी और लंदन के वित्तीय केंद्र को 'परस्पर जुड़े मार्ग' के रूप में विकसित करने की बात कही। फिनटेक, बीमा, सीमा पार भुगतान, ऊर्जा परिवर्तन के लिए वित्तपोषण और व्यापार वित्तपोषण को सहयोग के प्रमुख उपक्षेत्र बताया गया, जो दोनों वित्तीय केंद्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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