क्या पीएम मोदी द्वारा सनातन संस्कृति की प्रतिष्ठा पुन: स्थापित करने की कोशिश की जा रही है?

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क्या पीएम मोदी द्वारा सनातन संस्कृति की प्रतिष्ठा पुन: स्थापित करने की कोशिश की जा रही है?

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति को पुनर्स्थापित करने का प्रयास हो रहा है। मोहन यादव ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में पूजन किया और प्रदेश की खुशहाली की कामना की। आइए जानें इस महत्वपूर्ण अभियान के बारे में।

Key Takeaways

  • प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति का पुनर्निर्माण।
  • सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन 2026 में होगा।
  • नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर की ऐतिहासिकता।
  • भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण।
  • आर्कियोलॉजी और धार्मिक आस्था का समन्वय।

विदिशा, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति की प्रतिष्ठा पुन: स्थापित करने के लिए अनवरत कार्य जारी है। देश भर में मनाए जा रहे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री यादव ने विदिशा जिले के बासौदा के प्रसिद्ध उदयपुर स्थित प्राचीन नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव की पूजन-अर्चना की और प्रदेश की खुशहाली व सुख समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री यादव ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति की प्रतिष्ठा पुन: स्थापित करने के लिए अनवरत कार्य किया जा रहा है। अयोध्या में भगवान श्रीराम मुस्कुरा रहे हैं। उज्जैन में श्री महाकाल महालोक और वाराणसी में बाबा विश्वनाथ की भव्यता से संसार आलोकित हो रहा है। जनवरी 1026 में महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। वर्ष 2026 में इस आस्था और सभ्यता के महान प्रतीक पर किए गए बाबर आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

सोमनाथ की इसी एक हजार वर्षों की सहनशीलता, पुनरुत्थान और निरंतरता को रेखांकित करने के लिए वर्ष 2026 को हम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के रूप में मना रहे हैं। यह सनातन संस्कृति की ध्वजा को अनंत ऊंचाइयों पर स्थापित करेगा। 1000 वर्ष के उतार-चढ़ाव के बावजूद यह मंदिर आज भी अपनी भव्यता और गौरव के साथ खड़ा है। यह सोमनाथ को उसके वैभव में पुन: स्थापित करने के निरंतर एवं सामूहिक प्रयासों का प्रतीक है। मंदिर निर्माण के 75 वर्ष भी 2026 में पूरे हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री यादव ने इस अभियान के लिए प्रधानमंत्री मोदी को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ जैसे सिद्ध स्थान को फिर से प्रतिष्ठित करने का बड़ा कार्य किया है। सच्चे अर्थों में अतीत के घटनाक्रम को स्मरण करते हुए भविष्य की दृष्टि से चाक-चौबंद कर देश को मजबूत करने का कार्य कर दुनिया के सामने भारत की महत्वता को भी बढ़ाया है। उन्होंने बासौदा के उदयपुर स्थित नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में पूजा के बाद कहा कि भगवान महादेव का नीलकंठेश्वर मंदिर अत्यंत सुंदर ऐतिहासिक और 1000 वर्ष पुराना है। इतनी अद्भुत पुरातत्व संपदा को धार्मिक आस्था की दृष्टि से और अधिक सशक्त बनाने के लिए बेहतर कार्य किए जाएंगे। आर्कियोलॉजी से जुड़े जिज्ञासुओं के लिए भी इस स्थल की जानकारी और ज्ञान का मंदिर बनाने का प्रयास किया जाएगा।

मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के गंजबासौदा के पास उदयपुर गांव में स्थित एक प्राचीन और भव्य शिव मंदिर है। यह भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसकी नक्काशी खजुराहो मंदिरों से मिलती-जुलती है। प्रत्येक महाशिवरात्रि पर यहां 5 दिवसीय मेले का आयोजन होता है। सूर्य की पहली किरण शिवलिंग पर पड़ती है, जो उदयपुर को एक अनोखा और पूजनीय स्थल बनाता है। यह मंदिर खजुराहो शैली की याद दिलाने वाली सुन्दर नक्काशी के साथ गणितीय, खगोलीय ज्ञान का अद्भुत समायोजन है।

Point of View

NationPress
26/02/2026

Frequently Asked Questions

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का महत्व क्या है?
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का महत्व एक हजार वर्षों की सहनशीलता और पुनरुत्थान को रेखांकित करना है।
नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर कब बना था?
नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना है।
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