क्या पीएम मोदी ने लोगों से काशी-तमिल संगमम का हिस्सा बनने की अपील की?
सारांश
Key Takeaways
- काशी तमिल संगमम का आयोजन 2 दिसंबर से होगा।
- इस बार की थीम 'लर्न तमिल– तमिल करकलम्' है।
- पीएम मोदी ने सभी से संगमम में भाग लेने की अपील की है।
- यह कार्यक्रम तमिल और काशी के बीच के सांस्कृतिक संबंधों को सशक्त करेगा।
- छात्र विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेंगे।
नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक कार्यक्रम मन की बात का 128वां एपिसोड रविवार को प्रसारित हुआ। इस अवसर पर उन्होंने तमिल भाषा और प्राचीनतम शहर वाराणसी का उल्लेख किया। उन्होंने सभी से तमिल सीखने का आग्रह करते हुए काशी तमिल संगमम में भाग लेने की अपील की।
पीएम मोदी ने कहा, "साथियों, विश्व की सबसे पुरानी भाषा और विश्व के सबसे प्राचीन शहरों में से एक का संगम हमेशा अद्भुत होता है। मैं काशी तमिल संगमम की बात कर रहा हूं। 2 दिसंबर से काशी के नमो घाट पर चौथा काशी-तमिल संगमम आरंभ हो रहा है। इस बार की थीम है 'लर्न तमिल– तमिल करकलम्'।
उन्होंने आगे बताया, "काशी-तमिल संगमम उन सभी के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है जो तमिल भाषा से जुड़े हैं। काशी के लोग हमेशा बताते हैं कि इस संगमम का हिस्सा बनना उनके लिए बहुत सुखद होता है। यहाँ वे न केवल नया सीखते हैं बल्कि नए लोगों से भी मिलते हैं।"
पीएम मोदी ने सभी से काशी-तमिल संगमम में भाग लेने और 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की भावना को मजबूत करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, "काशीवासी पूरे उत्साह के साथ तमिलनाडु से आने वाले अपने भाई-बहनों का स्वागत करने को तैयार हैं। मेरा आप सभी से निवेदन है कि आप काशी-तमिल संगमम का हिस्सा बनें। इसके साथ ही ऐसे और मंचों के बारे में सोचें, जो 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की भावना को सशक्त करें।"
काशी तमिल संगमम (केटीएस) 4.0 के लिए छात्रों का पहला दल शनिवार को कन्याकुमारी से वाराणसी के लिए रवाना हुआ। इस दल में कन्याकुमारी के 43, तिरुचिरापल्ली (टीपीजे) के 86 और चेन्नई एग्मोर (एमएस) के 87 छात्र शामिल हैं। ये छात्र विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से हैं, जो वाराणसी में होने वाली सांस्कृतिक, शैक्षणिक और अनुभवात्मक गतिविधियों में भाग लेकर दोनों क्षेत्रों के बीच प्राचीन सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक संबंधों को पुनः सशक्त करेंगे।