'मन की बात' में PM मोदी ने की 'हर घर मुनगा' अभियान की चर्चा, धमतरी के लोगों ने बताया पोषण का खज़ाना
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2026 को प्रसारित 'मन की बात' कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के 'हर घर मुनगा-घर घर मुनगा' अभियान का विशेष उल्लेख किया। यह पहल पोषण माह के अंतर्गत परिवारों को अपने दैनिक आहार में मुनगा (मोरिंगा) को शामिल करने के लिए प्रेरित करती है। धमतरी जिले के स्थानीय निवासियों ने इस अभियान की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए मुनगा को एक सस्ता, सुलभ और गुणकारी औषधीय पौधा बताया।
मन की बात में अभियान का उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' के इस एपिसोड में छत्तीसगढ़ की इस जन-स्वास्थ्य पहल को राष्ट्रीय मंच पर उजागर किया। 'हर घर मुनगा-घर घर मुनगा' नारे का उद्देश्य यह है कि हर परिवार अपने घर-आंगन में मुनगा का पेड़ लगाए और इसे नियमित आहार का हिस्सा बनाए। यह पहल पोषण माह के व्यापक ढाँचे के भीतर आती है, जो कुपोषण से निपटने की दिशा में एक सामुदायिक प्रयास है।
धमतरी के निवासियों की प्रतिक्रिया
धमतरी के स्थानीय निवासी दुर्गेश कुमार यादव ने कहा, 'मुनगा छत्तीसगढ़ में बहुत लोकप्रिय सब्जी है और प्राचीन काल से ही हमारी संस्कृति का पारंपरिक हिस्सा रही है। मुनगा के इस्तेमाल का चलन हमारे दादा-दादी और पूर्वजों के समय से चला आ रहा है, जब लगभग हर घर में मुनगा का पेड़ लगाया जाता था।'
उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक व औषधीय दृष्टि से मुनगा की पत्तियों और फलों में विटामिन, कैल्शियम तथा अन्य आवश्यक खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यादव के अनुसार, पारंपरिक रूप से प्रसव के समय महिलाओं को मुनगा की सब्जी खिलाई जाती थी, जो उनकी शारीरिक शक्ति बढ़ाने में सहायक मानी जाती थी।
मुनगा के औषधीय गुण
एक अन्य स्थानीय निवासी कविलास राम यादव ने कहा, 'यह जीवन के लिए बेहद उपयोगी पौधा है। यहाँ तक कि इसकी जड़ों का इस्तेमाल भी दवा के तौर पर किया जाता है। हमारे पूर्वज और बुजुर्ग इसे प्राकृतिक उपाय के तौर पर इस्तेमाल करते थे।' उन्होंने पीएम मोदी के नारे 'हर घर मुनगा, घर घर मुनगा' को सटीक और जन-उपयोगी बताते हुए इसे अपनाने की अपील की।
गौरतलब है कि मोरिंगा को वैश्विक स्तर पर 'सुपरफूड' माना जाता है। इसकी पत्तियों में दूध से अधिक कैल्शियम, गाजर से अधिक विटामिन A और संतरे से अधिक विटामिन C होने का उल्लेख पोषण विशेषज्ञ करते हैं — हालाँकि इन दावों की पुष्टि संदर्भ और मात्रा पर निर्भर करती है।
अभियान का व्यापक महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में कुपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। पोषण माह के दौरान मुनगा जैसे देसी, सहज उपलब्ध और किफायती विकल्पों को बढ़ावा देना सरकार की सामुदायिक स्वास्थ्य रणनीति का हिस्सा है। धमतरी जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ मुनगा पहले से पारंपरिक आहार में शामिल रहा है, यह अभियान स्थानीय ज्ञान को आधुनिक पोषण विज्ञान से जोड़ने का प्रयास करता है।
आगे की राह
प्रधानमंत्री के 'मन की बात' में उल्लेख के बाद अभियान को राष्ट्रीय पहचान मिली है। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से उम्मीद की जा रही है कि वे इस पहल को और गाँवों तक फैलाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे। यदि इसे नीतिगत समर्थन और संस्थागत ढाँचे के साथ जोड़ा जाए, तो 'हर घर मुनगा' अभियान कुपोषण से लड़ाई में एक सस्ता और टिकाऊ हथियार साबित हो सकता है।