क्या पीएम मोदी का सोमनाथ में भव्य स्वागत हुआ?
सारांश
Key Takeaways
- सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन 8 से 11 जनवरी 2026 तक।
- प्रधानमंत्री मोदी का सोमनाथ में भव्य स्वागत।
- भारत की शाश्वत चेतना और आत्म-सम्मान का उत्सव।
- मंदिर का पुनर्निर्माण और आध्यात्मिक परंपरा का संरक्षण।
सोमनाथ, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहले श्री सोमनाथ महादेव के पास हो रहे 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' में भाग लेने के लिए सोमनाथ पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित कई प्रमुख नेताओं ने हेलीपैड पर उनका उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
सोमनाथ पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' में भाग लेंगे।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर बताया कि गुजरात में अपने भव्य दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सोमनाथ हेलीपैड पर जोरदार स्वागत किया गया। पीएम मोदी की उपस्थिति में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत की शाश्वत चेतना, अटूट आस्था, एकता और आत्म-सम्मान का उत्सव बनने जा रहा है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' पर लिखा, "सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हमारी आध्यात्मिक परंपरा का एक सशक्त प्रतीक है, जिसे देशभर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में रात करीब 8 बजे सोमनाथ मंदिर में ओंकार मंत्र के दिव्य जाप का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिलेगा। अगले दिन सुबह लगभग 9:45 बजे मां भारती के अनगिनत वीर संतानों को समर्पित शौर्य यात्रा में शामिल होने के बाद मंदिर में दर्शन एवं पूजन करूंगा। इसके बाद यहां एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने का अवसर भी मिलेगा।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन 8 जनवरी से 11 जनवरी 2026 तक एक राष्ट्रीय उत्सव के रूप में किया जा रहा है।
इस आयोजन की परिकल्पना विनाश के स्मरण के रूप में नहीं, बल्कि सहनशीलता, विश्वास और सभ्यतागत आत्म-सम्मान को श्रद्धांजलि के रूप में की गई है। सदियों से, सोमनाथ को बार-बार उन आक्रमणकारियों द्वारा निशाना बनाया गया जिनका उद्देश्य भक्ति के बजाय विनाश था। हालाँकि, हर बार देवी अहिल्या बाई होल्कर जैसे भक्तों के सामूहिक संकल्प के माध्यम से मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया। पुनरुद्धार के इस अटूट चक्र ने सोमनाथ को भारत की सभ्यतागत निरंतरता का एक शक्तिशाली प्रतीक बना दिया।