क्या भारत तोड़ने वाले छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए? - पूनम महाजन
सारांश
Key Takeaways
- जेएनयू में विवादित नारे लगाना गंभीर मुद्दा है।
- पूनम महाजन ने छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
- 90 प्रतिशत छात्र अच्छे हैं, लेकिन एक छोटा हिस्सा समस्याएं पैदा कर रहा है।
- बीएमसी चुनाव में बहुजन विकास अघाड़ी की स्थिति पर भी बात की गई।
- हिन्दू-मुस्लिम राजनीति पर ध्यान केंद्रित करने वाले नेताओं की आलोचना की गई।
मुंबई, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा की नेता पूनम महाजन ने जेएनयू परिसर में उठाए गए विवादित नारों पर कड़ा विरोध प्रकट करते हुए कहा कि जिन छात्रों ने इस प्रकार के विवादित नारे लगाये, मैं मांग करती हूं कि उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
पूनम महाजन ने मुंबई में कहा कि गृह मंत्रालय को यह समझना बहुत आवश्यक है कि छात्र देश को किस नजरिये से देखते हैं। जेएनयू में अच्छे छात्रों की जिंदगी प्रभावित हो रही है, उन छात्राओं के बीच जो देशविरोधी नारे लगाते हैं।
उन्होंने कहा कि उन युवाओं को किसी भी प्रकार की सुविधा न देना बेहतर होगा जो भारत को तोड़ने की बातें करते हैं। 90 प्रतिशत छात्र अच्छे हैं, जबकि एक छोटा सा प्रतिशत देश विरोधी नारे लगाकर समस्याएं उत्पन्न कर रहा है। ऐसे लोगों को पहले बाहर निकालना चाहिए। यह बोलने की आज़ादी नहीं है; वे देश के साथ धोखा कर रहे हैं।
बीएमसी चुनाव के संदर्भ में भाजपा नेता ने बहुजन विकास अघाड़ी को निशाना बनाते हुए कहा कि यह कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है, बल्कि एक प्राइवेट लिमिटेड फैमिली पार्टी है। इसमें केवल परिवार के सदस्य ही चुनाव लड़ते हैं और इसे एक व्यवसाय की तरह चलाते हैं।
कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण के पीएम मोदी पर दिए बयान पर भाजपा नेता ने कहा कि जब से उन्होंने चुनाव हारा है, उनका दैनिक रूटीन एक कॉमेडी शो बन गया है। उन्हें पूरी तरह से रिटायरमेंट लेना चाहिए। उन्हें यह नहीं पता कि वे पीएम मोदी के बारे में किस प्रकार का बयान दे रहे हैं। ऐसे लोग देश के बारे में क्या सोचते हैं?
उन्होंने वारिस पठान के बयान पर भी कहा कि मैं ऐसे नेताओं की बात नहीं करना चाहती, जो देश को बांटने का काम करते हैं और केवल हिंदू-मुस्लिम की राजनीति में लगे रहते हैं।